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दुनिया को दूसरे इस्लामी बम की चिंता

Swatantra Vaartha  Wed, 10 Mar 2010, IST

दुनिया को दूसरे इस्लामी बम की चिंता

इरान ने अभी तक परमाणु विफोट नहीं किया है। उसके पास कितने परमाणु बम है ? उसकी परमाणु श कितनी खतरनाक है? इन नों का उार अभी मिलना कठिन है। फिर भी शायद उसने परमाणु श हासिल कर ही लिया है। खुद इरान के रापति अहमदीनेजाद ने ऐलान कर दिया कि वह परमाणु श सप रा हो गया है। उसने दुनिया को ललकारा भी है कि वह तिबधों का मुहतोड जवाब देगा आर तिबधों से इरान को कोइ नुकसान नहीं होगा, बकि खुद अमेरिकायूरोप तबाहकुन होंगे। इरान के इस ऐलान से अमेरिका आर यूरोप हलकान जर है। खासकर अमेरिका की चिंता निचित तार पर बढी है। बराक ओबामा की इरान के खिलाफ कूटनीति धरी की धरी रह गयी आर इरान परमाणु श सप रा बन गया। अमेरिका की अदणी राजनीति गम है आर इरान के खिलाफ कडे तिबधों की माग हो रही है।

अतराीय कूटनीतिक पच ही वह श है, जिससे इरान को परमाणु श बनने के लिए उकसाया आर मदद मिली। चीन आर स का वाथ इरान के साथ जुडा हआ ह। सुरक्षा परिषद में चीनस की पक्षधर नीति से ही अब तक तिबधों से इरान आजाद रहा है। भारतीय काेिण से भी इरान का परमाणु सप रा होना खतरे की घटी है। इसलिए कि भारत पहले से ही चीन आर पाकितान जसे देशों की परमाणु श के घेरे में कद ह। इरान चीनी खेमे में पहले से ही ह आर भारत के खिलाफ पाकितान की मदद करना इरान की कूटनीति है। इरान कहीं से भी जवाबदेह देश नहीं ह आर उसकी सोच एक इलामिक यवथा के घेरेबदी में ही कद रहती है। इसीलिए इरान की परमाणु श सपता को शाति आर सदभाव के खिलाफ देखा जा रहा ह। लोकतवादियों पर अहमदीनेजाद के दमन आर अयाचार से पहले से ही दुनिया अकात रही है। हाल के दिनों में लोकत के समथक १० आदोलनकारियों को इरान की इलामिक साा ने फासी पर लटकाया है।

दुनिया को पहले से ही पता था कि इरान परमाणु बम बना रहा ह आर उसका एकमा लय परमाणु श सप रा बनने की है, लेकिन इरान यह कहता रहा कि वह परमाणु बम नहीं बना रहा है। वह अपनी ऊजा जरतों को यान में रखकर परमाणु कायकम शु किये है, जबकि इरान को परमाणु ऊजा की जरत ह ही नहीं। ऊजा के अय वकपिक ाेतों की कमी उसे थी नहीं। पेटो आर गस पदाथा] का चुर भडार ह इरान के पास। इसलिए उसके इस तक में कोइ दम नहीं था कि वह शातिपूण उेयो के लिए परमाणु कायकम चला रहा ह। परमाणु टेनोलाजी उसकी अपनी नहीं ह। चीन आर स ने उसे परमाणु टेनोलाजी दी है। अतराीय परमाणु विशेषज्ञयों का साफ तार पर मानना ह कि चीन आर स ने ही उसे परमाणु टेनोलाजी उपलध करायी है। इस साइ को नकारा नहीं जा सकता है। कारण यह है कि इरान के पास न तो परमाणु टेनोलाजी की तिभाए थी आर न ही उसके लिए आधारभूत सरचनाए। खासकर चीन की इजीनियरों आर वज्ञानिकों के नेेतव में ही इरान का परमाणु कायकम चला आर इरान परमाणु बम बनाने में कामयाब हआ। इरान के पास परमाणु बम बनाने के लिए यूरोनियम भी थी नहीं। यूरोनियम उसे स से मिला ह। वह भी अवध यापार के मायम से। यूरोनियम वध तरीके से देने में अतराीय बाधाए थीं।

चीन आर स का आखिर वाथ या ह ? चीन आर स ने आखिर यों इरान को परमाणु श सप बनने में मदद की आर यों सयु रासघ के सुरक्षा परिषद ारा तिबधों के यास में रोडा डाला गया ? आखिर कब तक चीन आर स का दुनिया में अराजक देशों को घातक हथियारों से लेश होने आर दुनिया की शाति को खतरे में डालने की कूटनीतिक खेल जारी रहेगा ? चीन, स, उार कोरिया आर इरान का एक सुरक्षा गठबधन ह आर समयसमय पर ये चारों देश सनिक अभियान करते रहते ह। एशिया में चीन अपने दबदबे के लिए कूटनीतिक घेरेबदी कर रहा ह। इसमें चीन को सफलता भी मिली ह। उार कोरिया को उसने पहले ही परमाणु श सप रा बनाया। अब उसने इरान को परमाणु श सप रा बनाया। यामार की सनिक शासन को उसका सरक्षण ह। पाकितान, नेपाल आर श्रीलका जसे देश पहले से ही चीन के दायरे में खडे ह। चीन एशिया में भारत आर जापान को अपना विरोधी मानता ह। चीन ने १९६२ में हमला कर भारत के लाखों मील भूमि कजा रखी ह,जबकि जापान के साथ उसका झगडा उपनिवेशिक काल से है। कभी चीन जापान का उपनिवेश था। उपनिवेशिक काल में जापान के उपीडनों से चीन की थायी नाराजगी है। इसके अलावा चीन की नजर इरान के गस आर तेल भडार पर है। अमेरिका की एशिया में दमदार उपथिति को चीन आर स अपने लिए खतरा भी मानते है। पाकितान आर इराक में अमेरिका की सनिक छावनिया थापित ह, जहा से चीन आर स पर उसकी नजर टेढी हो सकती है। पाकितान आर इराक के बीच मे इरान अमेरिका को नियति करने वाला देश हो सकता ह। यही सोच आर नीति चीन आर स की है।

इरान की परमाणु श से या विव की शाति को कोइ नुकसान है ? या परमाणु हथियारों की होड भी बढेगी ? निचित तार पर ये खतरे बढे ह। इरान ने विव शाति को खतरे में डाली ह। जानना यह जरी ह कि इरान एक अराजक देश है। अगर वह एक जिमेदार देश होता आर अतराीय सहिताआें में उसे विवास होता तो जाहिर तार पर इतनी चिंता की बात नहीं होती आर न ही इरान के खिलाफ वविक परिथितिया निमत होती ह। इरान बारबार कहता ह कि इायल का नामोनिशान मिटा कर दम लेगा आर इसके लिए इलामिक देशों को एकजुट होने का आहवान भी करता ह। इरान के रापति अहमदीनेजाद की धमकी से इायल का नाराज होना जरी ह। अहमदीनेजाद उस आतकवादी सगठन ‘हमास’ का हितषी आर सरक्षणकता ह, जिसकी नीति फलतीन समया का समाधान सिफ आर सिफ खूनी जग ह। इायल के अतिव पर खतरा उप हो गया ह। इायल को भी अपनी सुरक्षा का अधिकार ह। सुरक्षा की बढती चुनातिया आर खतरे के अनुसार इायल अपनी नीति तयार करेगा ही आर घातक परमाणु हथियारों का उपादन भी कर सकता ह। कहा यह जाता है कि इायल भी परमाणु श सप रा है, पर वह अभी तक इससे इनकार करता आया ह, पर यह सही ह कि इायल इरान की तरह अराजक देश नहीं है आर न ही वह धामिक तार पर उददड आर पूवागसित।

इरान के खिलाफ तिबध अतराीय कूटनीति का जटिल न है। इरान के खिलाफ तिबध की बात काफी पहले से उठ रही है। जबसे इरान परमाणु कायकम चला रहा ह, तबसे उसके खिलाफ तिबधों की कोशिश हो रही है। अमेरिका के सभी यास बेकार साबित हए है। सयु रासघ में जबजब इरान के खिलाफ तिबधों के ताव आये तबतब चीन आर स ने कावटें डाली । बातचीत का सुझाव आया। इरान के साथ बातचीत के भी यास भी बेकार गये। उलटे इरान के रापति अहमदीनेजाद अमेरिका सहित अय यूरोपीय देशों को हडकाने आर शाति को खतरे में डालने की धमकिया पिलानी बद नहीं की। अब यह जाहिर हो जाने के बाद कि इरान ने अपनी तिबता से हटते हए परमाणु श हासिल की है, तब तिबधों की जरतें भी पूरी हो जाती है। अमेरिका, बिटेन आर फास इरान के खिलाफ तिबध चाहते है। बराक ओबामा पर तिबधों को लेकर भारी दबाव है। अगर सयु रासघ की सुरक्षा परिषद में इरान पर तिबध लगाने में अमेरिका को कामयाबी मिली तो इसका दश इरान की निर्दोष आर अभावगत आबादी को ही भुगतना होगा। इरान के रापति अहमदीनेजाद को अपने देश की निर्दोष आर गरीब आबादी की चिंता भी नहीं हो सकती? भारत के काेिण से भी इरान के पास परमाणु श होना खतरे की घटी है।

सपक : ०९९६८९९७०६०


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