ADVERTISEMENT

आपका वोट

क्या राहुल गांधी भ्रष्टाचार खत्म करेंगे?

  • सही
  • गलत
  • पता नहीं
और भी

फोटो दीर्घा

Share

नक्सालियों का महिमा मंडन क्यों

Swatantra Vaartha  Wed, 10 Mar 2010, IST

नक्सालियों का महिमा मंडन क्यों

इसमें कोइ शक नहीं कि आतकवाद में तदील हो चुका नसलवाद अब देश के लिए खतरा बनते जा रहा है आर नसलियों के खतरनाक मसूबो से हम सभी वाकिफ है। धानमी से लेकर गहमी तक नसली हिंसा को लेकर चिंता जता चुके है। ऐसे में देश के गह सचिव जी के पिइ का ये बयान कि ‘माओवादियों का मकसद २०५० तक भारतीय लोकत को उखाड फेंकना है’, या साबित करता है? ‘भारत में वामपथी उगवाद की थिति’ विषय पर सेमिनार को सबोधित करते हए गह सचिव ने ये भी कहा कि अगर माजूदा समय में माओवादी चाहें तो भारतीय अथयवथा के कइ सेटरों को घुटने के बल बठा सकते है, मगर वे फिलहाल ऐसा नहीं करना चाहते, योंकि उहें पता है कि अगर ऐसा किया तो शासन उन पर कडी कारवाइ करेगा। या इस तरह के बयान से नसलियों के नापाक मसूबों को आर शह नहीं मिलेगी ? या गह सचिव नसलियों का महिमा मडन कर रहे है ? यदि ऐसा नहीं है, तो फिर इस तरह के बयानों का या आचिय है? गह सचिव जी के पिइ ने सेमिनार में नसलियों का जिस तरह से महिमा मडन किया उसका असर तुरत दिखाइ दिया आर अगले ही दिन माओवादी नेता कोटेवर राव उफ किशनजी का बयान आ गया कि हम २०५० से पहले ही भारत में तता पलटकर रख देंगे। इतना ही नहीं, किशनजी ने ये धमकी भी दे डाली कि हमारे पास अपनी पूरी फाज है।

देश के तथाकथित कणधारों के बीच इन दिनों ये एक नया रिवाज बनते जा रहा है, जिसकी मर्जी देश की विदेश नीति से लेकर सुरक्षा नीति पर अपनी बात धडे से कह देगा। कोइ टिवटर पर विदेश नीति जसे सदेवनशील विषयों पर चहकते दिखाइ देगा तो कोइ देश की सुरक्षा जसे अहम मसले पर किसी सेमिनार में बाकि उछलकूद करेगा। सरकार में अहम पद पर बठे हए लोगो को देश से जुडे किसी अहम मसले पर अपनी बात सोचसमझकर ही रखनी चाहिए। आए दिन हो रही नसली हिंसा आर सरकारी अफसरों को अगवा कर जिस तरह से नसली दबाव बनाने में जुटे है, उसे देखते हए गह सचिव जसे अहम पद पर बठे य से ये अपेक्षा तो की ही जा सकती है कि उनके बयान से देश में अलगाववादी ताकतों के हासले आर बुलद न हों।

नसली हिंसा को लेकर पिछले कइ बरसों से सरकार रणनीति पर रणनीति बनाए जा रही ह आर इसको लेकर समयसमय पर रायों के मुयमी से लेकर गहसचिवों आर पुलिस महानिदेशकों तक के समेलन होते रहते ह। महारा के गढ चिराली में माओवादियों के हमले में १७ पुलिसकमियों के मारे जाने के बाद कुछ समय बाद ही माओवादियों के खिलाफ नइ रणनीति की घोषणा हो जाती है, जिसमें ये कहा जाता है कि नसलियों के खिलाफ अभियान की कमान राय की पुलिस सभालेगी, जबकि केीय पुलिस सिफ सहायक होगी। माओवादियों के खिलाफ भावी अभियानों में विशेष कमाडो दतों के साथ लगभग ७० हजार केीय अधसनिक बल तनात करने की बात भी की जाती है। इन अधसनिक बलों के साथ सनिक आर वायुसेना के सश हेलीकाटर उपलध कराने का भी जिक होता है। कभी केीय गह मालय की तरफ से सकेत आते है कि माओवादियों के ठिकानों पर चालक रहित विमान से हमले किए जाएगे तो कभी इस बात को खारिज कर दिया जाता है।

दरअसल नसल समया को जड से मिटाने के लिए अब तक के आर राय सरकारों ने कभी गभीरता से विचार नहीं किया। ये बात समझनी होगी कि न तो नसली ही कभी बदूक की दम पर देश का तता पलट सकते ह आर ना ही कोइ सरकार केवल सेना आर अթसनिक बलों का इतेमाल करके नसलवाद को खम कर सकती है। १९६७ में पचिम बगाल के लगभग सार गावों के एक समूह नसलबाडी से शु हए नसली आदोलन या विचारधारा को शुआती दार में नजरअदाज किया जाता रहा आर राजनीतिक दल अपनेअपने नफानुकसान के हिसाब से इसकी आग में अपनी राजनीतिक रोटिया सेंकते रहे आर अदर ही अदर नसलवाद की जडें पनपती रही। हालाकि ये भी उतना ही सच ह कि गरीब आर शोषित आदिवासी आर अधियाबटाइ पर खेती करने वाले लोगों को लेकर शु किया गया ये आदोलन अब न तो आदोलन ह आर ना ही इसकी कोइ विचारधारा। मुी भर लोग अपने वाथ के लिए बेकसूर गाव वालों की जान ले रहे ह आर बदूक के जरिए साा का वन देख रहे है।

नसलवाद से सबसे यादा भावित रायों में पचिम बगाल, बिहार, झारखड, आध देश, छाीसगढ आर उडीसा आते है आर इन रायों के कइ इलाकों में हालात वाकइ बदतर ह। आथिकविकास दर को दहाइ के आकडे पर लाने की बात तो की जाती ह, लेकिन इस बात को नजरअदाज कर दिया जाता ह कि देश के कइ गामीण आर आदिवासी इलाकों में हालात बद से बदतर होते जा रहे है। योजना आयोग से लेकर तमम विभागों की रिपोट इन इलाकों की कहानी बया करती ह। ये बात ठीक ह कि यूपीए सरकार ने पिछले कुछ बरसों में देश के गामीण इलाकों की तरफ यान देना शु किया ह आर बजट में भी गामीण इलाकों के लिए अधिक राशि का ावधान किया जा रहा है। के सरकार के इन यासों को अछा सकेत माना जा सकता ह, लेकिन हालात में सुधार तभी होंगे, जब इन इलाकों के लिए आबटित की गइ राशि की खच को लेकर सरकार पूरी तरह निगरानी बरते, नहीं तो फिर हम हमेशा की तरह वही पुराना राग अलापते नजर आएगे कि के से १०० पया चलता ह आर गावों में १५ पए तक ही पहच पाता ह। अब व आ गया ह कि सरकार विकास के लिए महानरेगा जसी जो भी योजनाए लेकर आ रही ह, उसके कियावयन में होने वाले भाचार पर भी लगाम कसनेे के लिए खुद को तयार करे। आने वाले बरसो में अगर हम गरीबी को जड से मिटा दें आर विकास की रोशनी को केवल महानगरों तक सीमित न रखकर देश के कोनेकोने तक पहचा दें, तो कोइ भी नसलवाद या आतकवाद देश के लोगों को अपने फायदे के लिए हिंसा की राह पर नहीं मोड सकेगा। (लेखक टीवी पकार ह)

डा शिव कुमार राय


आपकी राय