तालिबान के पंजे में दाऊद के प्राण
पाकिस्तान की सेना और आई एस आई की प्रेरणा से पाकिस्तान में आतंकवादी संगठन पैदा होने लगे। उनकी संख्या अब बतलाना भी कठिन है। एक समय ऐसा था कि सल्फी और वहाबी पंथ के मुल्ला दुनिया में इस्लामी राज कायम करने के लिए धर्मांध लोगों की जमाते बनाते थे। बाद में उन्हें सैनिक शिक्षा दी जाने लगी। धर्म की कोख से जन्में यह धर्मांध मुल्ला स्वयं को जिहादी कहने लगे। इनका एकमात्र उद्देश्य था दुनिया में इस्लामी हुकूमत स्थापित करना।
मध्यपूर्व के देशों में जहां किसी भी मुस्लिम बादशाह अथवा तो तानाशाह की सरकार थी उसे रातों रात गैर मुस्लिम और इस्लाम विरोधी सरकार घोषित करके उसके विरुद्ध बगावत का बिगुल बजा दिया जाता था। किसी भी वैध हुकूमत को गिराने का यह सबसे आसान तरीका था। १९२२ में इजिप्ट में अलबुरहान नामक संगठन बना जिसके मौलाना इसी प्रकार का मार्ग अपनाया करते थे। सैयद कुतुब इसके नेता थे। इजिप्ट की स्वतंत्रता के पश्चात कर्नल नासिर का इजिप्ट में जब राज आया तो इखवानुल मुस्लिमीन नामक संस्था ने उनके विरुद्ध विद्रोह करने का षड्यंत्र रचा। मजबूर होकर नासिर को इस संस्था पर प्रतिबंध लगा देना प़डा और सैयद कुतुब सहित अनेक मुल्लाआें को फांसी पर च़ढा दिया गया। समय के साथ उक्त संस्था भूगर्भ में चली गई। लेकिन इसका अस्तित्व बना रहा। अनवर सादात के समय में यह फिर से सक्रिय हो गई और उन्होंने अनवर सादात की जान ले ली। इजराइल के अस्तित्व में आने के बाद इसी परम्परा को जोर्डन सीरिया और लेबनान में पहुंचा दिया। इखवानुल मुस्लिम की कार्बन कॉपी के रूप में भारतीय उपखंड में मौलाना मौदूदी ने जमाते इस्लामी की बुनियाद डाली।
पाकिस्तान बन जाने के बाद जमाते इस्लामी जैसे अनेक संगठनों ने इस्लामी राज कायम करने की हलचल प्रारंभ की। जब कश्मीर का मसला पैदा हुआ तो भारत से निपटने के लिए इस प्रकार की संस्थाआें ने अपनी गुप्त हलचल प्रारंभ कर दी। जैशे मोहम्मद से लगाकर लश्करे तैयबा जैसे असंख्य संगठन पाक अधिकृत कश्मीर और भारतीय कश्मीर में पैदा होने लगे। इनकी खतरनाक गतिविधियों का प्रथम अनुमान विश्वनाथ प्रताप सिंह की सरकार के समय में भारत को महसूस हुआ। यासीन मलिक जैसे आतंकवादी गुंडे ने रुबिया का अपहरण कर लिया। यह अपहरण केवल नाटक था। मुफ्ती मोहम्मद सईद उस समय देश के गृहमंत्री थे। उनकी मिलीभगत से यह रोग सारे कश्मीर में फैल गया। जब भारत में तस्करों और आर्थिक अपराधियों की टोलियां संगठित होने लगी। उसमें सबसे शक्तिशाली टोली दाऊद इब्राहीम की थी। १९९२९३ में भीषण साम्प्रदायिक दंगे हुए। इनमें दाऊद इब्राहीम की भूमिका सबसे अधिक खतरनाक थी। स्थान स्थान पर बम विस्फोट होने लगे और निर्दोष भारतीयों का कत्लेआम होने लगा। इस पर रोकथाम लगाने के लिए ज्यों ही भारत सरकार सक्रिय हुई कि दाऊद इब्राहीम पाकिस्तान भाग गया। पाकिस्तान सरकार ने भारत के इन आर्थिक अपराधियों के साथ गठज़ोड कर लिया। भारत में आए दिन आतंकवादी कार्यावाहियां होने लगी।
अमेरिका को जब ११/९ जैसी क्रूरतम घटना का सामना करना प़डा। उस समय लादेन और मुल्ला उमर जैसे आतंकवादियों के साथसाथ दाऊद इब्राहीम का भी नाम आने लगा। रोड कॉनर नोटिस दिये जानेे के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान से मांग की कि वह दाऊद को उसके सिपुर्द कर दे, लेकिन तब दाऊद उनके लिए कमाऊ पूत था, इसलिए सरकार ने राष्ट्रसंघ में सम्मिलित देशों सहित भारत की एक नहीं सुनी और दाऊद को सुरक्षा प्रदान करने में कसर नहीं छ़ोडी। भारत के भग़ोडे जिनमें तस्करों के साथसाथ अन्य क्षेत्र के अपराधी थे, वे पाकिस्तान सरकार के ल़ाडले थे। पाकिस्तान के नेताआें से इन्हें भरपूर पैसा मिला और उसके बदले में पाक सरकार ने उन्हें हर प्रकार की सुरक्षा मुहैया करवा दी। कराची के किलिफ्टन क्षेत्र में जहां पाकिस्तान के ब़डे राजनीतिज्ञों और उद्योगपतियों के बंगले हैं, उसी क्षेत्र में दाऊद का वैभवशाली आवास है। भारत ने अनेक बार दाऊद पाकिस्तान में है इसके सबूत दिये, लेकिन आज भी पाकिस्तान सरकार एक ही बात कहती है कि दाऊद उनके यहां नहीं है।
लेकिन पिछले कुछ समय से जिस पाकिस्तान ने भारत पर आतंकवादी हमले करने में अपना रिकॉर्ड त़ोड दिया उस पर ही आतंकवादी हमले होने लगे। इन हमला वर्ग की मांग थी कि पाकिस्तान अमेरिका का साथ छ़ोड दे। पाकिस्तान के लिए यह असंभव था। इसलिए अफगानिस्तान में बैठे सभी आतंकवादी गिरोह पाकिस्तान के फ्रंटियर वाले क्षेत्र में घुस गए। वजीरिस्तान में उन्होंने हाहाकार मचा दिया। पाकिस्तान की सेना का एक भाग और आई एसआई भी इन आतंकवादियों से मिल गए और पाकिस्तान पर अब आए दिन हमले कर रहे हैं। मस्जिद से लगाकर शहरी बस्ती में आत्मघाती बमों की घटनाएं घट रही है। पाकिस्तान में आतंकवादी जिस तेजी से हावी हो गए हैं, उससे लगाता है कि पाकिस्तान की काबीना और राष्ट्रपति भवन की स्थिति काबुल में करजाई सरकार जैसी हो जाएगी। आतंकवादी अब तालिबान में परिणित हो गए हैं। उनका अनुमान है कि वे बहुत जल्द अब पाकिस्तान के मालिक बन जाएंगे। तीन साल के भीतर इस्लामाबाद पर तालिबान का झंडा लहराने लगेगा। पाकिस्तान ने जो गड्डा भारत के लिए खोदा था, आज स्वयं पाकिस्तान उस गड्डे में आैंधे मुंह गिर प़डा है। दूसरी ओर पाकिस्तान कल तक जिन दाऊद जैसे अपराधियों को बचाने का प्रयास कर रहा था और किसी भी स्थिति में यह स्वीकार करने को तैयार नहीं था कि दाऊद पाकिस्तान में है, उसी पाक सरकार की सेना का एक भाग और आई एस आई अब तालिबानों से कहने लगे हैं कि पाकिस्तान में छिप अपराधी यदि उनकी आर्थिक सहायता नहीं करते हैं, तो उन्हें देश से बाहर निकाल देने में कोई हर्ज नहीं है। कल तक पाकिस्तान के नेता दाऊद को ब्लैकमेल करते थे, आज तालिबान दाऊद को ब्लैकमेल कर रहे हैं। यदि दाऊद उनकी मांग पूरी नहीं करता है, तो दाऊद को पाकिस्तान से भागना प़डेगा। लेकिन भाग कर कहां जाएगा ? जो पाकिस्तान दाऊद एंड कंपनी के लिए स्वर्ग था, वह अब उसके लिए नरक बन गया है। इससे एक बात सिद्ध हो गई है कि तालिबान किसी के दोस्त नहीं बन सकते हैं। उन्हें केवल सत्ता, पैसा और हथियार चाहिए।
दाऊद कल तक फिल्म स्टार, व्यापारी और बिल्डरों से प्रोटेक्शन मनी लिया करता था। उसकी मांग पूरी कर दो कोई तुम्हारा बाल बांका नहीं करेगा, लेकिन आज स्थिति इस प्रकार की आ गई है कि अपनी जान की रक्षा करने और पाकिस्तान में रहने के लिए तालिबानों को दाऊद प्रोटेक्शन मनी देने के लिए मजबूर हो गया है। हाफिज सईद और अन्य नेताआें ने दाऊद को स्पष्ट कह दिया है कि हम मांगे उतना पैसा दो नहीं तो पाकिस्तान छ़ोडने के लिए तैयार हो जाओ। बतलाया जाता है कि अब हर कोई छोटा ब़डा तालिबानी नेता दाऊद को ब्लैकमेल कर रहा है। दाऊद को भय है कि अब उसके त़डी पार किये जाने का समय आ गया है। भारत में २६/११ के मास्टर माइंड हाफिज सईद को जिस प्रकार पाकिस्तान के धर्म जुनूनी संगठन सुरक्षा प्रदान किये हुए हैं उसी प्रकार की सुरक्षा प्राप्त करने के लिए दाऊद ए़डी चोटी का जोर लगा रहा है। लेकिन उसकी कितनी ब़डी कीमत उसको अदा करनी प़डेगी यह वह स्वयं भी नहीं जानता है।
उपरोक्त जानकारी अटकल पर आधारित नहीं है, बल्कि १९९३ के मुंबई में बम धमाकों के एक अपराधी फिरोज अब्दुल रशीद खान से सीबीआई ने प्राप्त की है। उक्त अपराधी को सीबीआई ने हाल ही में अपने शिकंजे में कस लिया है। खान को मुंबई की सीआईडी शाखा ने गिरफ्तार करके सीबीआई को सौंप दिया है। दाऊद को गिरफ्तार किया जाने के लिए पाकिस्तान सरकार पर अंतर्राष्ट्रीय दबाव ब़ढ रहा है। दाऊद धर्म जुनूनी संगठनों को खुले हाथ से पैसा लुटा रहा है, इसलिए इस समय यह कहना कठिन है कि दाऊद को भारत अथवा तो अमेरिका को सौंप दिया जाएगा या नहीं। लेकिन बकरी की मां कब तक खैर मनाएगी ? इस कहावत से भी परिचित हैं। पाकिस्तान सरकार को कहा जा रहा है कि दाऊद को डिपोर्ट किया जाए। सीबीआई को मिली जानकारी के अनुसार जमातउददावा, सिपाहे सहाबा पाकिस्तान एवं अन्य दस ऐसी तालिबान समर्थक संस्थाएं हैं, जिन्हें दाऊद ब़डी मात्रा में पैसे जुटा रहा है। उसका मानना है कि इस मुसीबत से उसे केवल तालिबान ही निकाल सकतेे हैं। इसलिए तालिबान समर्थक जो भी संगठन दाऊद से मांग करता है दाऊद उनकी झोली भर देता है।
अब यह बात ढंकी छिपी नहीं है कि दाऊद पाक अधिकृत कश्मीर में चल रहे आतंकवादी संगठनों से भेंट किया करता था। उन्हें जिस चीज की आवश्यकता होती थी उसकी पूर्ति करता था। आज यही संगठन जब तालिबान के अंतर्गत चल गए हैं, तब वे दाऊद के विरोधी होकर उसे हर तरह से ब्लैकमेल कर रहे हैं। दाऊद को क्या पता था कि वह जिस आम के प़ेड को उगा रहा है, वह उसके लिए एक दिन बबूल का कांटेदार वृक्ष हो जाएगा। अब दाऊद के सामने तीन विकल्प है, वह भारत लौट आए या फिर किसी अन्य देश में हिजरत कर जाए या फिर तालिबानों के हाथों एक दिन मौत को गले लगा ले। दाऊद ने कल तक किसी को ब्लैकमेल करके उसका जीना हराम कर दिया था, आज वह उसी रास्ते का पथिक बन गया है। निर्दोष भारतीयों की जान लेने वाले को आज अपनी जान के लाले प़डे हुए हैं।
