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बैठक का स्वागत, लेिकन सदेह बरकरार

swatantrvartha  Fri, 1 Jan 2010, IST

बैठक का स्वागत, लेिकन सदेह बरकरार

कें सरकार ने तेलगाना समया पर विचार के लिए ५ जनवरी को तेलगाना के ८ राजनीतिक दलों को दिली आमति किया ह। ाय: सभी दलों ने इसका वागत िकया , लेकिन सभी के अपनेअपने सदेह बरकरार । हा, कागेस ने अवय राहत की सास ली है । तेलगाना क्षे के जिन १३ मयाेिं ने अपना इतीफा भेज रखा था, उहोंने उसे वापस लेने का निणय लिया ह। उनका याल ह कि केींय नेतव ने अब यदि तेलगाना मामले में बातचीत आगे बढायी , तो इसका परिणाम ठीक ही निकलेगा।

पार्टी की राय इकाइ के अयक्ष डी श्रीनिवास ने इस बठक को पथक तेलगाना राय निमाण की दिशा में पहला कदम बताया ह। तेलगाना आदोलन के लिए गठित सयुत कारवाइ समिति ने भी वागत किया ह, किंतु उसकी राय ह कि कें को इस बठक में विचारणीय विषय की सीमा (कोप) आर लय को पट करना चाहिए था। एजेंडा पट हो तो विचारविमश अधिक साथक हो सकता ह। दूसरी तरफ आध क्षे के नेताआें की माग ह कि बठक का ‘कोप’ बढाकर पूरा राय किया जाना चाहिए, योंकि माग भले ही पथक तेलगाना की हो, लेकिन मुा पूरे राय से जुडा हआ ।

इस सारे मामले में अब यदि सकट में कोइ पार्टी ह, तो वह तेलुगु देशम ह, योंकि अब उसे अपना ख पूरी तरह पट करना होगा। अब घपले वाली बयानबाजी से काम नहीं चलेगा। कें का वातव में इरादा ही यही ह कि राय के विभाजन का दायिव राय की सभी मुख पाटियों के कधे पर डाल सके। वह अकेले अपने तर पर कोइ निणय नहीं लेना चाहती। उसकी योजना ह कि राय के विभाजन से यदि कोइ राजनीतिक हानि की थिति पदा होती ह, तो उसका भागीदार सभी दलों को बनाया जा सके। कागेस ही या, हर राजनीतिक दल यही चाहता ह कि यदि कोइ अछा काम हो जाए, तो उसका श्रेय उसे मिले आर कुछ गडबड हो जाए, तो उसका ठीकरा दूसरे दलों के सिर पर फूटे। फिलहाल के की पूरी तेलगाना नीति इसी कोशिश के इदगिद घूम रही ह।

यह सभी जानते ह कि ५ तारीख को इस बठक में कुछ खास नहीं होने जा रहा ह, फिर भी इसे एक अछी शुआत के प में गहण किया जा रहा ह, योंकि कें सरकार ारा बुलायी गयी यह पहली तेलगाना केंति सवदलीय बठक ।

अभी ऐसी आर कितनी बठकों की जरत पडेगी, पता नहीं, फिर भी यह आदोलन को शात करने का एक अछा बहाना तो ह ही। सयु कारवाइ समिति (जेएसी) के सयोजक कोदडराम अभी भी यह मानते ह कि तेलगाना के लोगों को अपना दबाव बनाए रखना चाहिए, लेकिन उसमें शामिल कागेस व तेलुगु देशम के लोग शिथिल हो गये ह। छा वग में कितना उसाह ह, यह ३ जनवरी की रली में पट हो जाएगा। ५ की दिली बठक की गभीरता बहत कुछ इस रली पर निभर होगी, योंकि यदि रली वसी ही हइ, जसी कि दावा किया जा रहा ह, तो कें पर इसके लिए अधिक दबाव रहेगा कि वह तेलगाना के पक्ष में वातावरण बनाने की कोशिश करे, लेकिन यदि रली यों ही सामाय तर की रही, तो वह भी आराम से इसे निपटाने की कोशिश करेगी। लेकिन तेलगाना समथकों को यह याद रखना होगा कि यदि उसने अपने दबाव में थोडी भी ढील दी, तो तेलगाना उसके हाथ से फिसल जाएगा।


चीन सुनने को तैयार नहीं

भारत सरकार के बारबार आपा करने के बावजूद चीन ने जमूकमीर तथा अणाचल देश के नागरिकों को अलग से एक कागज पर वीसा देना बद नहीं किया ह। तमाम एयर लाइनें भी ऐसे वीसा पर यायाेिं को देश के बाहर ले जा रही ह। अब इसे रोकने के लिए भारत सरकार ने देश से उडान भरने वाली सभी एयर लाइनों को आदेश दिया ह कि वे किसी भी यति को ऐसे अलग कागज पर दिये गये वीसा पर उडान की अनुमति न दें। अब आगे से यह जिमेदारी एयर लाइनों की होगी कि वे ऐसे यायाेिं को देश से बाहर जाने के लिए विमान में सवार न होने दें। कुछ यायाेिं ने वीसा के इस सकट से बचने के लिए एक नया तरीका खोज निकाला था।

वे यहा से हागकाग आर फिर वहा से चीन की मुय भूमि पहच जाते थे। लेकिन अब एयर लाइनों को निर्देश दिया गया ह कि वे अलग कागज पर जारी वीसा धारक यायाेिं को किसी भी तरह चीन की याा पर न जाने दिया जाए।

वातव में वीसा सबधित देश ारा अपने यहा आने देने का एक अनुमति प होता ह, उस पर याी के अपने देश का कोइ अधिकार नहीं होता। अपना देश याी को केवल बाहर जाने की अनुमति देता ह। जिस देश में जाना होता ह, उसकी अनुमति वह देश देता ह। चीन इस बारे में भारतीय नागरिकों के साथ दो तरह का यवहार कर रहा ह। वह जमूकमीर आर उार पूव के कुछ क्षेाें को छोडकर देश के शेष भाग के यायाेिं को तो सामाय वीसा देता ह, यानी उसके पासपोट पर मुहर लगाकर अपने देश में आने की अनुमति देता ह, किंतु जमूकमीर व अणाचल देश के यायाेिं को अलग से एक कागज पर वीसा दे देता ह आर पासपोट पर कोइ मुहर नहीं लगाता। इस तरह भारत के उस नागरिक के पासपोट पर चीन की याा का कोइ रिकाड नहीं रहता। इससे भारत सरकार को यह पता नहीं चल सकता कि सबधित यति ने कब तक तथा कितने दिनों के लिए चीन की याा की।

चीन की यह कारवाइ शु प से भारत विरोधी काय ह। अलग कागज पर वीसा देकर वह यह सि करता ह कि जमूकमीर तथा अणाचल देश भारत राट के भाग नहीं ह। यह भारत के ति नितात शुतापूण काय ह कि वह जमूकमीर को भारत का अग न मानकर एक अलग राट मानता ह। भारत सरकार ने चीन से इस पर अपनी आपा अवय यत की ह, लेकिन उसने कोइ कठोर ख नहीं अपनाया ह। ऐसे में भारत के पास केवल एक राता बचता ह कि वह अपने नागरिकों पर अकुश लगाए अथवा एयर लाइनों पर इसका दायिव डाले कि वह अलग कागज पर दिये गये वीसा को मायता न दें। वातव में भारत सरकार को चाहिए कि एयर लाइनों के साथ उन नागरिकों पर भी इसका दायिव डाले, जो चीन के लिए वीसा ले रहे ह। यदि कोइ नागरिक अवध वीसा लेकर याा करता ह, तो उसके खिलाफ भी कारवाइ का ावधान होना चाहिए। हम चीन सरकार पर नियण नहीं कर सकते, तो कम से कम अपने नागरिकों पर तो नियण कर सकते ह। लेकिन ऐसा लगता ह कि सरकार जमूकमीर के उन नागरिकों पर भी सती नहीं करना चाहती, जो अवध वीसा लेकर चीन जाना चाहते ।

चाहिए तो यह था कि भारत अपने नागरिकों पर सत नियण के साथ चीन के भी सीयाग या तिबत के यायाेिं के लिए ऐसे ही अलग कागज पर वीसा देने की यवथा कर देता, लेकिन वह यह भी नहीं कर रहा ह। ऐसे में सरकार को अपने नागरिकों पर ही इसकी सती करनी चाहिए कि वे अवध वीसा लेकर याा की कोशिश न करें। आर यदि ऐसा करते पकडे जाए, तो उहें सजा दी जाए।

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