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अब ५ जनवरी की बैठक पर लगी नजर

swatantravartha  Fri, 1 Jan 2010, IST

अब ५ जनवरी कीबैठक पर लगी नजर

गृह मंत्रि पी चिदबरम ने कें सरकार की तरफ से यह सफाइ दी है कि तेलगाना के मुदे पर वह वय किसी ऊहापोह या दुविधा की थिति में नहीं ह। उसने तो केवल राय के राजनीतिक दलों के बदलते ख पर अपनी तिकिया यत की है । तेलगाना मसले पर आध देश के ८ राजनीतिक दलों को दिली आने आमति करने के अगले दिन के साथ बातचीत करते हए उहोंने कहा कि यदि ५ जनवरी की इस बठक में सभी दलों ने यदि अपनी सहमति दी, तो हम आसानी से समया के समाधान तक पहच सकते है ।

इस बठक में सभवत: राय के मुयमी भी उपथित रहेंगे आर हमारी कोशिश रहेगी कि तेलगाना के मसले पर एक आम सहमति का वातावरण बने। यह अभी पहला कदम ह, हम इस मसले पर अय गुटों के साथ भी बातचीत करेंगे। अतिम फसला निचय ही आम सहमति पर आधारित होगा।

यहा सबसे अहम सवाल ह कि या तेलगाना को अलग राय बनाने के न पर राय के सभी राजनीतिक दलों तथा मुख सगठनों में कोइ आम सहमति बन सकती ह। अभी पिछले दिनों लोगों ने देखा कि पूरा देश पट प से दो खेमों में विभाजित ह। एक पथक तेलगाना राय का समथक ह, तो दूसरा इसे अलग किये जाने के खिलाफ। कें ने जब तेलगाना को अलग राय बनाने की घोषणा की, तो आध क्षे में वाेिह भडक उठा आर दुबारा जब वह अपनी घोषणा से पीछे हटती नजर आयी, तो तेलगाना क्षे में लपटें उठने लगीं। जाहिर ह राय के दोनों क्षेाें में कतइ मतय नहीं ह। तो या जो जमीनी तर पर एकदूसरे के विरोधी ह, वे वाता की मेज पर परपर सहमत हो जाएगे।

जसे कि सकेत मिल रहे ह, सबसे जटिल विवाद का मुा हदराबाद ह। राय का कोइ हिसा हदराबाद को छोडने के लिए तयार नहीं ह। तेलगाना समथक किसी कीमत पर हैदराबाद छोडने के लिए तयार नहीं ह, तो आध व रायलसीमा वाले भी

हैदराबादको लेकर कोई समझाता करने के लिए राजी नहीं ह। इसलिए कें इस बारे में बीच का राता निकालने की कोशिश में ह। तरहतरह के सुझाव आ रहे ।

एक सुझाव ह कि हदराबाद को सबसे अलग करके एक कें शासित देश बना दिया जाए। राय के चाहे दो टुकडे हों, चाहे तीन, किंतु हदराबाद को उससे अलग रखा जाए। राता यह तय किया गया कि कुछ वषा] यानी ७ या ११ वषा] के लिए इसे कें शासित बना दिया जाए। तब तक यह दोनों रायों के लिए सयुत राजधानी का भी काम करेगी। जब आध की राजधानी अलग बन जाएगी, तो हदराबाद तेलगाना को साप दिया जाएगा। मगर इस पर भी आम सहमति हो पाना कठिन ह। हदराबाद को साझे का क्षे रखना एक थाइ सघष का बीज बोना ह।

५ जनवरी की बठक निचय ही विवाद सुलझाने का पहला कदम ह, लेकिन यदि इसमें एक कदम की भी गति हो सके, तो उसे एक उपलधि माना जाएगा। कें लोकताकि तरीके अपना रहा ह जर, लेकिन वह इस तरीके को भी अपनी ढाल की तरह इतेमाल कर रहा ह। उसने ऐसा लोकताकि तरीका ९ दिसबर की घोषणा के पहले यों नहीं अपनाया ? फिर उसके बाद जब आध व रायलसीमा में वाेिह की आग भडकी, तब भी उसे इस लोकताकि तरीके की याद नहीं आयी। उसने विभि क्षे के लोगों से अलगअलग बातें तो की, लेकिन पूरे राय के लोगों से एक साथ बातचीत करने का कोइ यास नहीं किया। उसकी ९ एव २३ दिसबर की दोनों घोषणाए आतिवादी थी। दोनों की विफलता के बाद अब साझा बातचीत की शुुआत की जा रही ह। तकनीकी दटि से यह अछी बात ह, लेकिन यायिक फसले की जिमेदारी अभी भी कें सरकार पर ह।

साितत: उसे ही यह फसला करना ह कि राय का विभाजन किया जाए या नहीं। देश के लिए तथा राय के लिए या हितकर ह, या नहीं, यह उसे ही तय करना ह। खर, अब तो एक नये चरण की शुआत हो ही गयी ह, इसलिए देखना चाहिए कि उसका या परिणाम निकलता ह।

यमन पर अमेरिकी हमले की सभावना

खबर ह कि अमेरिका यमन थित अलकायदा के अडडों पर हमला करने की तयारी में ह। यमन की सरकार इसमें अमेरिकी सरकार की मदद कर रही ह। फिलहाल दोनों मिलकर देश में थित अलकायदा के अडडों का पता लगाने में लगे ह। एक बार उनकी जगहों का पता चल गया, फिर हमला करना आसान हो जाएगा। अमेरिकी गुतचर एजेंसी एफबीआइ ने बताया ह कि किसमस के दिन यानी २५ दिसबर को नाथ वेट एयर लाइस के अमेरिकी विमान को विफोट से उडाने की नाकाम कोशिश में यमनी आतकवादी था। अलकायदा ने यह जिमेदारी कुबूल की ह कि उपयुत विमान में बम रखने का काम उसका ही था। मूलत: वह नाइजीरियायी युवक ह, जो यमन के अलकायदा सगठन के साथ जुडा ह।

यमन, यों इलामी जिहादियों का पुराना अडडा ह। पाकितान की तरह वहा की सरकार भी जिहादियों को बढावा देती रही ह, किंतु इस समय वह एक गुत समझाते के तहत अमेरिका का साथ दे रही ह। सभवत: पाकितान की सरकार की तरह लोभ आर भयवश उसने भी आतकवाद के खिलाफ अमेरिकी यु में शामिल होना वीकार कर लिया ह।

किसमस के दिन उपयुत जिस विमान को उडाने की कोशिश की गयी थी, उसमें ३०० याी सवार थे। सयोगवश ही उसमें विफोटक रखे जाने का पता चल गया आर विमान को हवा में उडा देने की कोशिश नाकाम हो गयी। एफबीआइ की रिपोट के अनुसार यमन में अलकायदा का मुख नशी बुहशी ह, जो अलकायदा नेता ओसामा बिन लादेन का करीबी ह आर उनके साथ काम कर चुका ह। लादेन वय कुछ दिन यमन में गुजार चुका ह। अब यदि अमेरिका वहा हमला करता ह, तो यमन, अफगानितान के बाद दुनिया का दूसरा देश होगा, जिस पर अलकायदा के कारण अमेरिकी हमला होगा।

अमेरिका ने दुनिया भर से अलकायदा को उखाड फेंकने का सकप लिया ह। वह इसमें कितना सफल होगा, इसके बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता, लेकिन जिहादी ताकतों के खिलाफ उसकी चातरफा कारवाइ से इतना तो अवय माणित होता ह कि फिलहाल वह अपने सकपों के ति ыढ ह।

खबर ह कि उसने यूयाक में मनहटटन थित चार मजिदों तथा एक मुलिम सगठन की ३६ मजिला इमारत को जत करने की कारवाइ शु कर दी ह। उसने इन सगठनों के आथिक सोतों पर भी अकुश लगाने की योजना बनायी ह। किंतु अलकायदा का जाल अब तक इतना यापक हो चुका ह कि उसके एक दो केाेंं के नट होने से भी उस पर कोइ भाव पडने वाला नहींहै

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