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७० भारतीयों की ‘हज सर’

swatantravartha  Fri, 1 Jan 2010, IST

७० भारतीयों की ‘हज सर’

सन २००९ की हज यात्रि गत नवबर के अतिम साह में सप हो गइ। अनुमान ह कि इस वष २६ लाख लोगों ने मामदीना पहचकर इस मजहबी अनुान को पूण किया। जो य हज यात्रि पूण कर लेता , वह हाजी कहलाने लगता । इलाम ने इस यात्रि को उन लोगों के लिए अनिवाय घोषित किया ह, जो अपने गहथ जीवन के सभी दायिव पूण कर चुके है ।

हज के लिए इलाम ने यह कडी शत रखी ह कि जो य अपने जीवन में खूनपसीने से कमाए धन में जब इतनी बचत कर ले कि वह मामदीना जा सके तो निचित ही उसे यह याा पूण करनी चाहिए। किसी के सहयोग अथवा आथिक मदद से की जाने वाली इस यात्रि को इलाम के के अनुसार वध नहीं माना जाता ह। इसलिए अपने जीवन के अतिम पडाव में बहधा नेक मुलिम यह यात्रि पूण किया करते थे। राता लबा आर कठिन होता था, इसलिए कइ बार इछा होने के बावजूद भी वे हाजी बनने में असमथ रहते थे। लेकिन यातायात की सुविधा के कारण वे कठिनाइया अब भूतकाल की बात बन गइ है ।

सऊदी अरब मूलत एक रेगितानी देशहै , इसलिए वह प्रारभ में गरीब रहा ह। एक समय था कि हज याा उसके लिए आथिक प से वरदान हआ करती थी। सऊदी शासक आर जनता इन हाजियों से इतना कमा लिया करते थे कि वष भर वे दो व की रोटी जुटाने में सफल हो जाते थे। १९३२३३ में वहा खनिज तेल की खोज हइ। ४० के दशक के पचात जब पेटोल का उपयोग आाेगिक प से होने लगा आर यातायात की सुलभता बढती चली गइ, तब से सऊदी अरब की काया पलट गइ। भले ही आज भी सऊदी सरकार हाजियों से कर वसूल करती हो, लेकिन उनके लिए पगपग पर वह इतनी सुविधाए जुटाती ह कि यह कर ऊट के मुह में जीरे के समान होता ह। भारतीय मुसलमान सदियों से मामदीना जाते रहे ह आर हाजी बनकर लाटते रहे ह। बिटिश सरकार ने भारतीय हाजियों के लिए ‘मुगल लाइन लिमिटेड’ की थापना की थी, जिसके मायम से पानी के जहाजों में जेददाह तक की याा की जाती थी। वहा से बसों के ारा मामदीना पहचा जाता था। तब इस याा को पूण करने में लगभग साढे तीन से चार महीने लग जाते थे। १९७५ में भारत सरकार के तािन ‘शिपिंग कारपोरेशन आफ इडिया’ ने ‘मुगल लाइन’ के सभी अधिकार ा कर हज याा को अपने अतगत ले लिया। जब सऊदी राजा के वि समयसमय पर राजनीतिक हमले होने लगे, तब सऊदी सरकार ने अपनी सुरक्षा चिंताआें के चलते हज याा को केवल ४० दिन के भीतर मयादित कर दिया। सऊदी सरकार को इससे कोइ लेनादेना नहीं था कि कोइ हाजी कितने समय में मा पहचता ह। उनका निणय यह था कि एक बार सऊदी अरब मे वेश कर लेने के पचात हज याी को केवल ४० दिन यहा ठहरने की आज्ञा दी जाएगी। उ निणय एव तेल की बढती कीमतों के कारण भारत सरकार ने यह निणय लिया कि पानी के माग की बजाय याा हवाइ माग से की जाए। यह बात तो दिन के उजाले की तरह प थी कि हवाइ माग का किराया पानी के माग की तुलना में महगा होगा, इसलिए सरकार ने हाजियों के किराए में अपनी तरफ से अनुदान देना ारभ किया। इस तरह से हाजियों को सरकारी सहायता मिल जाने के कारण कोइ कठिनाइ नहीं हइ, बकि उहोंने इस सुविधा का वागत ही किया। वातव में यह सुविधा हज याा के लिए इलामी साितों की भावना के विपरीत ह। लेकिन मुलिम नेता आर मालाना इसे अपने लिए वरदान समझने लगे आर कागेस को इस सुविधा के कारण मुलिम वोट की गारटी मिल गइ। अब इस अनुदान को लेकर जनता में बडी बेचनी ह, इसलिए सरकार को आज नहीं तो कल इस पर विचार करना ही पडेगा। हज यायाेिं के लिए सरकार ारा एयर इडिया से ही याा अनिवाय कर दी गइ ह। पर जब हाजियों की सया बढ गइ तो इसका लाभ सऊदी एयर लाइस को भी मिलने लगा। इसलिए जहा तक अनुदान को खम करने का सवाल ह, तो इसमें सबसे पहली बात यह आवयक ह कि एयर इडिया आर सऊदी अरब एयरलाइस का एकाधिकार समा किया जाए। यदि तिपधा में अय हवाइ कपनिया आइ तो इस अनुदान से भारत की जनता को मु मिल जाएगी। लेकिन कागेस सरकार अपनी मुलिम वोट की चाह को समा कर भला यह जोखिम यों कर उठाएगी ?

हज याा अनुदान के लिए तो चचित ह ही, लेकिन उस याा के अतगत एक आर सफेद हाथी ह, जिसका नाम ह ‘शुभचिंतक तिनिधिमडल’। उ तिनिधिमडल वहा यों भेजा जाता ह आर वह किसकी चिंता करता ह, इसका पता आज तक नहीं चल सका ह। जब इसकी थापना का इतिहास खोजते ह, तो मालूम पडता ह कि भारत सरकार ने इसकी शुआत १९६५ में भारतपाकितान यु के पचात की थी। भारत सरकार ने मुलिम जगत के सामने अपनी कमीर नीति को समझाने की से यह काम किया था। सरकार को पता चला कि हज याा पर अनेक मुलिम देशों के अधिकारी, नेता आर कूटनीतिज्ञ जाते ह, वहा पाकितान उन सबके समुख कमीर समया को अपनी नजर से तुत कर भारत विरोधी चार करता ह। इसलिए भारत सरकार को भी इसी तरह का एक तिनिधिमडल मामदीना भेजने का निणय लेना पडा था।

१९६६ से भारत सरकार ने हज याा के अवसर पर अपना एक तिनिधिमडल मामदीना भेजना ारभ किया। इस तिनिधिमडल में एक केीय मुलिम मी, कूटनीतिज्ञों तथा अधिकारियों को थान दिया जाने लगा। भारत सरकार की यह सोच थी कि सऊदी सरकार पर मुलिमों का भाव ह, इसलिए इस मजहबी याा से सरकार अपना राजनीतिक उेय पूरा कर सकती ह। ारभ में इस तिनिधिमडल की सया केवल पाच थी, लेकिन समय के साथ इसमें बढाेारी होती गइ। सरकार ने इस पर कभी विचार नहीं किया कि इस तिनिधिमडल से कोइ लाभ होता ह या नहीं ? पाठकों को याद होगा कि जब शेख अदुा जेल से रिहा किए गए थे, तो वे भी हज याा के नाम पर मामदीना पहच गए थे। उहोंने वहा जाकर भारत सरकार के वि विषवमन किया था। शेख को तो चीन ने सलाह दी थी कि वे इडोनेशिया सरकार से वीसा ा कर चीन चले आए, योंकि उन दिनों इडोनेशिया के रापति सुकर्णो भारत विरोधी हो चुके थे। लेकिन शेख अदुा अपना सपना साकार नहीं कर सके। चीन पारभ से कमीर को लेकर पाकितान को उताजित करता आ रहा ह आर यह प तार पर कहता रहा ह कि ‘कमीर भारत का अग नहीं ह।’ पिछले दिनों मीरवायज ने चीन की याा के नाम पर वही इतिहास दोहराया था।

चीन आर पाकितान की रीतिनीति को उ तिनिधिमडल कितना भावित कर सका, इसका मूयाकन तो आज तक नहीं हआ। भारत सरकार अथवा सरकार के हज विभाग ने इस मामले में कोइ ऐतिहासिक काम किया हो, इसकी चचा सावजनिक प से कभी नहीं हइ। अब तो उ तिनिधिमडल हज के नाम पर आमोदमोद का मायम बन गया ह। इसमें पाच सदय सऊदी अरब जाएगे या पचास, इसका भी कोइ मापदड नहीं ह। जो मयाेिं आर बडे अधिकारियों को रिझा ले, बस उसी का नाम इसमें शामिल कर लिया जाता ह। ऐसे भी सदय ह, जो एक बार नहीं, कइकइ बार इस याा पर गए ह। मुलिम लीग के इ अहमद जब से लोकसभा में ह, वे वहा बिना किसी रोकटोक पहच जाते ह। किसी की योयता के सबध में कोइ कसाटी नहीं ह। जिसका जितना बडा परिचय आर राजनीतिक पहच वही इस तिनिधिमडल में शामिल कर लिया जाता ह। २००४ में इस तिनिधिमडल के सदयों की सया केवल १४ थी, लेकिन इस बार तो उनकी तादाद ७० पर पहच गइ। कुछ सदयों के तो सारे परिवारजन वहा सरकारी पसों पर ‘सर का लुफ’ उठाने पहच गए।

उ तिनिधिमडल के जेददाह पहचते ही वह सऊदी अरब थित भारतीय राजदूत का मेहमान बन जाता ह। मा आर मदीना के पाच तारा होटलों में उनके ठहरने की यवथा की जाती ह। हज याा से उहें कोइ दिलचपी नहीं होती। उनकी महिलाए वहा के बाजारों आर तडकभडक वाले ‘माल’ में खरीदारी करती हइ दिखाइ पडती ह। तिनिधिमडल में जो भी जाता ह, उसका परिचय भारत के बडे राजनीतिज्ञ, कूटनीतिज्ञ, समाजशाी आर शिक्षाशाी के प में कराया जाता ह। चूकि वे सरकारी अतिथि होते ह, इसलिए उनके लिए हर जगह सरकारी खर्चे पर आनेजाने की यवथा होती ह। कुछ सदय तो वहा अपनी सथा के लिए चदा मागते आर अपने अखबार के गाहक बनाते हए भी दिखाइ पडते ह। वे वहा पहचकर दोनों हाथों से सरकारी पसों पर अपना निजी ठाटबाट दशित करते दिखाइ पडते ह। टेलीफोन पर लबीलबी बातचीत तो ऐसे करते ह, मानो किसी थानीय य से बात कर रहे हों। वे ऐसा न करें तो फिर भारत में उनके रितेदारों को किस कार पता चले कि उनका सियासी तबा या ह ? भारत सरकार हर बार इस तिनिधिमडल के लिए बजट बढा देती ह। इस बार ६ करोड पये का बजट उनकी सेवा में तुत कर दिया गया। हज के खच को लेकर कइ बार जाच करने वाले सरकारी सगठन ‘कग’ ने आपा उठाइ ह, लेकिन इस मामले में किसी को चिंता करने की फुसत नहीं ह। इसलिए अब यह माग की जा रही ह कि मुलिम वोट के लिए अनुदान पर बहस तो दूर की बात ह, सरकार इस पतिनिधिमडल पर तो पतिबध लगा ही सकती ह। इसकी आलोचना देश के बाहर भी होती ह, लेकिन देश में इस पर सवाल उठाने वाला कोइ नहीं है ।

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