भाजपा का बडा जुआ
सन २००९ के आखिर में भाजपा ने बहत बडा जुआ खेला। इससे सन २०१० में भाजपा को लेने के देने पड सकते ह। झारखड में शिबू सोरेन की सरकार बनाने का भाजपा को नफा आर नुकसान दोनों ह। यदि शिबू सोरेन ने पहले की तरह बदनामी कराइ तो सन २०१० के ही बिहार के विधानसभा चुनाव में भाजपा को नुकसान होगा। भाजपा ने शिबू सोरेन की सरकार इसलिए बनाइ ताकि कागेस को माका नहीं िमले।
इससे हमेशा के लिए अब जेएमएम के कागेस से जुडने का अवसर खम हए ह। कागेस बाबूलाल मराडी का एलायस मजबूत होगा। यों भी सोनिया गाधी आर डामनमोहन सिंह सभी ने दो टूक अदाज में यह बता दिया ह कि उनकी इमेज में अब शिबू फिट नहीं ह। कागेस से जेएमएम को काट लेना भाजपा के लिए झारखड के सथाल परगना क्षे में फायदेमद होगा। शिबू सोरेन के सथाल वोटो की विरासत भाजपा को मिल सकती ह। देश के बाकी भाजपाइ मसलन अजुन मुडा आदि सरकार में कोइ दखल नहीं रखेंगे। भाजपा आलाकमान की तरफ से राजनाथ सिंह का यह दायिव ह कि वे रघुवरदास को टाइट रखें। राजनाथ सिंह के अलावा दूसरा कोइ केीय नेता इसलिए समथ नहीं ह, योंकि दूसरे किसी को न देश की समझ ह आर न शिबू सोरेन या जेएमएम या आजसू के सुदेश महतो के तारतरीकों का उसे अनुमान लग सकेगा।
भाजपा के लिए ारभिक सकेत शुभ नहीं ह। झारखड के एलायस की नींव गलत पडी ह। शिबू सोरेन आर उनके बेटे हेमत साेेरेन जसे थे, वसे ही ह। सरकार नए दलालों आर छुटभये कारोबारियों के असर में फसती लगती ह। अकेले सुदेश महतो की पार्टी इस तरह दबाव बनाती लगती ह कि मधु कोडा के व के निदलीय मयाेिं से अधिक मनमानी आर लूट वाला माहाल बन सकता ।
शिबू सोरेन की फीकी शपथ
भाजपा के किसी दिगज नेता ने शिबू सोरेन के शपथ समारोह को अटेंड नहीं किया। वजह भाजपा ससदीय बोड के आला नेताआें को यह समझ में आना ह कि शिबू सोरेन के यहा की राजनीति आग से खेलना ह। दरअसल शिबू की कमान हेमत सोरेन ने सभाली हइ ह आर हेमत सोरेन को पता नहीं ह कि कसे भाजपा को हडल किया जाए। हेमत सोरेन ने देश भारी कणा शुला या सरकार को बनवाने के लिए अधिकत राजनाथ सिंह के यहा सीधे सपक सबध नहीं बनाया। उलटे आपाधापी में मुबइ आर दीि जाकर शिबू के साथ फोटो खिंचवाए। याा का मकसद शपथ समारोह के लिए यातने का था। लेकिन इसके लिए जसे दलाल की
मदद ली गइ उसने नितिन गडकरी, सघ पदाधिकारियों आर दीि के आला भाजपा नेताआें को चाका दिया।
यह भी यान रहे कि मुबइदीि जाने के ाेगाम के लिए न देश के अजुन मुडा कप को सूचना होने दी गइ आर न दीि में राजनाथ सिंह या हाइकमान नेताआें से लियरेंस ली गइ। जो हो, शिबू सोरेन मुबइ पहचे आर नितिन गडकरी के साथ उनका फोटो हआ। इससे गडकरी बदनाम हए। उनके करीबियों में ही यह चचा हइ कि उहोंने अपनी अयक्षता का पहला फोटो ही दागी शिबू के साथ खिंचवाया। उधर नागपुर में सघ के एमजीव ारा शिबू सोरेन से अपने को चिति करने के सवाल ने भी गडकरी खेमें को परेशानी में डाला।
गडकरी की तुलना में दीि के भाजपा नेता यादा होशियार निकले। उहोंने शिबू सोरेन के साथ अपना फोटो नहीं होने दिया। दीि में शरद यादव के यहा के ाेगाम में न लालकण आडवाणी पहचे आर न सुषमा वराज या अण जेटली या राजनाथ सिंह । शरद यादव को भी भाजपा नेताआें की यह सोच शाम छह बजे मालूम हो गइ थी। इसलिए उहोंने बारबार पूछे जाने के बावजूद शिबू सोरेन के एनडीए में शामिल होने के सवाल को टाला। तभी शिबू सोरेन का शपथ गहण समारोह फीका था।
बदलेगा भाजपा सविधान
भाजपा की राीय कायकारिणी की बठक फरवरी के दूसरे साह इदार या भोपाल में होगी। बहत मुमकिन ह, इस बठक में पार्टी का सविधान बदला जाए। सघ आर भाजपा के आला पदाधिकारियों में यह राय बन रही ह कि पार्टी अयक्ष का कायकाल पाच साल का हो। दीि में जमे जमाए पुराने नेता इस तरह का सशोधन नहीं चाहते ह। यान रहे पहले भी राजनाथ सिंह के टम को बढाने के लिए अयक्ष का कायकाल पाच साल बनाने का विचार आया था। लेकिन आडवाणी खेमें ने राजनाथ सिंह को हटवाने की ऐसी ठानी कि कहीं कोइ बात ही नहीं हो पाइ।
बहरहाल नए अयक्ष नितिन गडकरी पूरी कमान में ह। उहोंने यह घोषणा की हइ ह कि वे तीन साल में कोइ चुनाव नहीं लडेंगे। शायद इसलिए कि सघ उनके लिए पाच साल का कायकाल बनवा रहा ह। बहत मुमकिन ह कि जनसघ के दिनों की पार्टी में फिर यवथा बने। मतलब सगठन आर विधायिकी के नेताआें को अलगअलग रखा जाए। जो अयक्ष होगा या जो लोग सगठन में होंगे, वे चुनाव नहीं लडेंगे। आर जो चुनावी राजनीति में होंगे उहें सगठन में पद नहीं मिलेगे। सघ के भाजपा भारी सुरेश सोनी इसकी पहल करवा रहे ह।
नितिन गडकरी की टीम
भाजपा मे युवा आर नए चेहरों की किमत खुलती लगती ह। नए अयक्ष नितिन गडकरी आर सघ परिवार के पदाधिकारियों में जो बातचीत हइ ह, उसमें युवा लोगों को आगे करने की ाथमिकता बनी ह। भाजपा मुयालय के महासचिवों की टीम शायद पूरी नइ हो। भात झा, मुरलीधर राव, मनोहर परिकर, वसुधरा राजे, सजय जोशी के नाम बतार महासचिव विचाराधीन ह। वही नए सचिवों में वण गाधी, अनुराग ठाकुर, विनय सहबुे, अमित ठाकुर, धर्मे धान के नाम चचा में ह। पार्टी मुयालय के पुराने चेहरों में मुतार अबास नकवी, रविशकर साद, राजीव ताप ढी, काश जावडेकर आर शहनवाज हसन का या रोल बनेगा, इसको लेकर कइ तरह के फामूले ह। ये सभी नइ पीढी के ह। नए ढाचे के नाते इनका रोल बनता ह। सगठन महासचिव के नाते रामलाल का रोल बना रहेगा। पर तब सजय जोशी की भूमिका कुछ आर ही होगी। पुराने सेटअप के थावरचद गहलोत, विनय कटियार, अनत कुमार जसों का रोल कोटे की बदालत बनेगा।
केीय मुयालय में नाजवान चेहरों को महव मिलेगा, वहीं पुराने अनुभवी नेताआें को देशों का भारी बनाने की बात ह। मुरली मनोहर जोशी, राजनाथ सिंह, अनत कुमार, वेंकया नायुडू, शाता कुमार, अजुन मुडा आर बीसीखडुरी को पदेशों की जिमेवारी या उपायक्ष जसे पदों में एडजट किया जाएगा। पीयूष गोयल को नितिन गडकरी काफी महव दे रहे ह। बहत मुमकिन ह कि गडकरी उहें कोषायक्ष बनाए। माटे तार पर गडकरी सघ पदाधिकारियों से सलाह कर रहे ह। नइ टीम के फसले जदबाजी में नहीं होंगे। फरवरी में भोपाल में राीय परिषद की दो दिन की बठक ह। तभी भाजपा की नइ टीम का पूरा ढाचा बनकर तयार हो सकेगा।
तिवारी की हिमतनारायण दा तिवारी की इसे हिमत कहे या बेशर्मी, वे सेस सीडी मामले में पकारों के सवालों का सामना कर रहे ह। उहोंने कहा ह जीवन में उतारचढाव आते ह। जिहोने साजिश रची उहें उनसे भी शिकायत नहीं ह। वे गीता में भगवान कण की इस बात का पालन कर रहे ह कि य को सुखदुख, मानअपमान आर जयपराजय में समान भाव से रहना चाहिए। कागेस नेता दिविजय सिंह ारा उनके बचाव पर तिवारी का कहना था, यह उनका बहत साहस भरा कदम था। लगता ह सोनिया गाधी के यहा से मसेज पर तुरत इतीफे देने की तिवारी की पहल से कागेस में उनके ति अनुकूल माहाल ह। तभी देहरादून में उनके घोर विरोधी हरीश रावत ने भी उनसे जाकर मुलाकात की। रावत ने तिवारी की तारीफ की। उाराखड के कागेसियों में उम के इस पडाव में तिवारी की फजीहत से सहानुभूति का कुछ माहाल बना ।
देश के माजूदा आर पूव देश अयक्ष के अलावा कागेस के विधायकों ने मुलाकात की ह। भीड के ही चलते नारायण दा तिवारी के सहायक सजय जोशी ने दोपहर बाद रोज एक से तीन बजे के बीच तिवारी की आम लोगों से मुलाकात का ाेगाम बनाया।
कागेस मे लालू साद यादव अछूत
झारखड में कागेस ने इसलिए सरकार नहीं बनाइ, योंकि वह लालू यादव की पार्टी से एलायस नहीं चाहती ह। शिबू सोरेन आर उनकी जेएमएम पार्टी के बिना भी झारखड में कागेसजेवीएम की सरकार बन सकती थी। निदलीयों आर लालू की पार्टी आरजेडी के समथन से बहमत बनता। कागेस मनेजरों की निदलीयों से बात हो गइ थी, लेकिन लालू यादव के साथ एलायस बनाने के लिए कागेस आलाकमान तयार नहीं हआ। नेताआें की दलील थी कि यदि झारखड में लालू यादव के साथ सरकार बनी तो बिहार में कागेस कसे अकेले चुनाव लड सकेगी ? लालू यादव के पति कागेस लीडरशीप के टफ रवए से यह मानकर चलें कि बिहार में कागेस अकेले ही चुनाव लडेगी। किसी सूरत में लालू यादव से एलायस नहीं करेगी। नतीजों के बाद लालू यादव से किसी ने बात नहीं की।
लालू यादव को दीि बुलाए जाने की खबर झूठ मूठ में ेम गुा ने चलवाइ थीं। शिबू सोरेन के साथ नहीं जाने का राहल गाधी, सोनिया गाधी ने पहले से फसला लिया हआ था। चुनाव नतीजों पर विचार के लिए दीि के आला कागेेसी नेताआें में विचार हआ तो डामनमोहन सिंह आर णव मुखर्जी का यह दो टूक टेंड था कि शिबू सोरेन को फिर यूपीए से कतइ नहीं जोडे। कागेस में मानना ह कि बाबूलाल मराडी का साथ कागेस के लिए फायदेमद रहा ह। साफसुथरी इमेज आर राजनीति करके झारखड में कागेसजेवीएम एलायस को मजबूत किया जाए। कागेस में मानना ह कि शिबू सोरेन की सरकार लबी नहीं चलेगी। शिबू सोरेन अपनी करनियों से न केवल सरकार को बदनाम बनाएगे, बकि छहआठ महीने में साा भी गवा बठेगे। बिहार के चुनाव तक शिबू सोरेन सरकार को चलने दिया जाए। इससे भाजपाजदयू की बदनामी होगी। कागेस को बिहार में लाभ होगा। इसलिए कागेस हाइकमान में एक भी बार यह राय नहीं बनी कि शिबू सोरेन से कोइ डायलाग बने।
नए रायपालों का सपेंस
आध देश में नारायण दा तिवारी के इतीफे के साथ अब छह रायों में रायपालों की जगह खाली ह। हरानी की बात ह कि तमाम तरह की चचाआें, कागेस आला नेताआें की लाबिंग आर गह मालय की सकियता के बावजूद मनमोहन सरकार नए रायपालों की नियुतिया नहीं कर पा रही ह। माटे तार पर सोनिया गाधी के यहा नाम तय होते ह। लेकिन लगता ह मनमोह सिंह आर चिदबरम गर राजनतिज्ञों को रायपाल बनवाना चाह रहे ह। तभी कागेस में फसले अटके हए ह। फिलहाल राजथान, आध देश आर पचिम बगाल में पडोसी रायों के रायपाल अतिरि काम सभाल रहे ह। उधर पजाब, मय देश आर महारा में माजूदा रायपालों का टम भी खम हो गया ह। पजाब में जनरल राडिस का कायकाल १६ नवबर को खम हआ था, लेकिन वहा पजाब से अलग चडीगढ का भार करने के विचार में फसला नही हो पा रहा ह। पजाब में इससे राजनतिक बवाल की आशका ह। इसलिए नाकरशाह पूव कबिनेट सचिव बीकेचतुवेदी का नाम रायपाल के नाते विचाराधीन ह।
कुल मिलाकर जितने नेताआें के नाम चचा में ह, उतने ही अफसरों के ह। चतुवेदी के अलावा केपदमनाभया व राजिंदर सर भी रायपाल बनने की होड में ह। नेताआें में ले देकर शिवराज पाटिल, अजुुन सिंह, सतोष मोहनदेव आर मोहसीना किदवइ अर्से से लाइन में लगे हए ह। फिलहाल योंकि हर कोइ नए साल की छुटटी मना रहा ह, इसलिए लगता ह रायपालों की नियु में कुछ व आर लगेगा। कागेस हाइकमान या मनमोहन सरकार में कोइ जदी नहीं ह।
