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धर्म भी आलोचना से परे नहीं

swatantravartha  Fri, 8 Jan 2010, IST

धर्म भी आलोचना से परे नहीं

बाबे हाइकोट की सिदयीय पीठ ने इस बुधवार को एक बडे दूरगामी भाव वाला फसला दिया है । कोट ने कहा ह कि देश में कोइ भी धम आलोचना से परे नहीं है। वह हिदू हो, मुलिम हो, इसाइ हो या अय। उसके अनुसार इस देश में सभी क्षे आलोचना के लिए खुले ह, जिनके अतगत धम भी आता , इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि धम की आलोचना नहीं की जा सकती। शत यही ह कि यह आलोचना बाकि हो आर सदाशयता पूण हो। दुभावनाजनित निंदा को, आलोचना के नाम पर या अभियति वतता के नाम पर छूट नहीं दी जा सकती।

कोट ने इलाम के बारे में लिखी गयी एक किताब (इलाम : ए कासेट आफ पोलिटिकल वड इवेजन बाइ मुलिम) पर महाराट सरकार का २००७ में तिबध लगा दिये जाने के वि दायरा याचिका पर फसला देते हए उपयुत टिपणी की ह। कोट ने पुतक पर तिबध के राय सरकार के निणय को बहाल रखा, लेकिन साथ में यह टिपणी भी की कि किसी धम को आलोचना के परे नहीं माना जा सकता। अपने १५० पठों के फसले में पीठ के सदयों यायमूति रजन देसाइ, डीवाइ चचूड तथा आरएस मोइले ने लिखा ह कि वथ आलोचना विचार होतीहै तथा उस पर सकारामक बहस की जा सकती ह, लेकिन आलोचना या अभियति वतता के नाम पर किसी को अपमानजनक टिपणिया करने का अधिकार नहीं दिया जा सकता। इस पुतक में की गयी आलोचना दुभावनापूण ह तथा इसमें जानबूझकरधामिक भावनाआें को भडकाने का यन किया गया है ।

इसलिए इस पुतक पर से तिबध नहीं हटाया जा सकता। पुतक के लेखक आरवी मसीन तथा उनके वकील हाइकोट के उपयुत तक से सहमत नहीं है, इसलिए वे इस निणय को सर्वोच यायालय में चुनाती देने वाले है। श्री मसीन, जो वय भी वकील ह, का कहना ह कि याया के आधार पर अभियति वतता पर रोक नहीं लगायी जा सकती, इसलिए वे इस फसले को सर्वोच यायालय में चुनाती देना चाहते है।

इस समय यहा चचा का विषय पुतक पर तिबध लगने या न लगने का नहीं ह। चचा का विषय ह धमा] की आलोचना के अधिकार का। अपने देश में ‘सव धम समभाव’ तथा ‘धमनिरपेक्षता’ के की आड में पयेक धम को किसी भी तरह की आलोचना से परे कर दिया गया ।

यहा कुछ धमा] के सगठन इतने आकामक ह कि उहें जरा भी आलोचना बदात नहीं ह। वे आलोचना के पहले ही वर पर इतना जबदत आकमण करते ह कि कोइ छोटी भी आलोचना करने का साहस न कर सके। सरकार की तरफ से उहें मूक समथन हासिल रहता है। विव राजनीति के जानकार जानते ह कि धमनिरपेक्षता का केवल इतना ही अथ ह कि कोइ सरकार अपने नागरिकों के साथ धम या मजहब के नाम पर कोइ भेदभाव नहीं करेगी।

सव धम समभाव का भी इससे भि कोइ अथ नहीं ह। लेकिन अपने देश में इसे अयाधिक अथ वितार दे दिया गया ह। यहा का नागरिकका : हर धम के हर विवास को आदर देने के लिए मजबूर कर दिया गया ह। ाय: सभी धमा] के अपने साित व विवास ह आर उन सबके अनुयायी अपनेअपने धम को सवश्रेठ मानते ।

इन धमा] के साथ केवल इवर के ति विवास का मुा ही नहीं जुडा ह, उनके अपने राजनीतिक व सामाजिक आदश भी ह, जिहें वे पूरे समाज पर आरोपित करना चाहते ह। निचय ही बिना वथ आलोचना या साथक बहस के यह नहीं किया जा सकता कि किस धम का कानसा सामाजिक या राजनीतिक साित यापक समाज के लिए उपयोगी है या अनुपयोगी। इसलिए बाबे हाइकोट का उपयुत फसला भारत के भविय के समाज के लिए बहत उपयोगी ह, जिसका वागत किया जाना चाहिए।

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