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भारत की ढील का फायदा उठाया जिहादियों ने

swatantravartha  Sat, 9 Jan 2010, IST

भारत की ढील का फायदा उठाया जिहादियों ने

करीब एक वष की शाति के बाद कमीर घाटी फिर आतकी हमलों की सुखियों में ह। गत बुधवार को श्रीनगर के लाल चाक में हआ फिदाइन हमला कोइ फुटकर यदाकदा होने वाला हमला नहीं था। यह पाकितान द्दारवा नियोजित नये हमलों की श्रखला का शायद पहला हमला था। हमला यों छोटा था, जिसमें केवल दो फिदाइन शामिल थे, लेकिन इसे २६/११ के मुबइ हमलों की तरह अजाम दिया गया।

मुबइ हमले में जिस तरह हमलावरों को सेलफोन पर पाकितान से सदेश मिल रहे थे, उसी तरह इहें भी पाकितान में बठे उनके आका निर्देशित कर रहे थे। करीब २२ घटे तक चली इस मुठभेड के दारान दोनों आतकी सेलफोन पर बराबर पाकितान से सपक बनाए हए थे। सयोग से ये हमलावर कोइ बडी क्षति नहीं पहचा पाए, लेकिन गोलीबारी में एक पुलिसकमी व एक नागरिक की मात हइ तथा सीआरपीएफ के दो जवानों सहित करीब ११ लोग घायल हए। इनके कारण लाल चाक का पजाब होटल तबाह हो गया, योंकि ये दोनों वहीं जा छिपे थे। इस मुठभेड के २४ घटे के भीतर ही पुलवामा में सीआरपीएफ के साथ एक आर मुठभेड हइ, जिसमें लकर के दो आतकवादी मारे गये।

खबर ह कि पूरी तरह शिक्षित तथा हथियारबद करीब ७०० आतकवादी जमूकमीर में हमला करने के लिए तयार बठे ह। पाकितान थित उनके नेताआें का निर्देश ह कि वे जमूकमीर में नया मोचा खोलें। इसलिए लाल चाक जसे आर हमले ही नहीं, इससे बडे हमले भी हो सकते ह। गुतचर सूाें के अनुसार ये सारे जिहादी आतकवादी पिछले एकदो साल में धीरेधीरे घुसपठ करते हए भारतीय सीमा में पहचे। इनमें से ११० के वष २००९ में सीमा पार करके इधर आने की खबर ह।

यहा उलेखनीय ह कि पिछले डेढ दो सालों में भारत ने ३०,००० से अधिक सुरक्षा बलों को कमीर से हटाने का काम किया ह। रक्षा मालय ने जमूकमीर में अपेक्षाकत शाति को देखते हए राजनीतिक तर पर इसका निणय लिया था। उस समय यपि यह चेतावनी दी गयी थी कि जमूकमीर में आतकी हमलों में कमी आने का यह अथ नहीं ह कि आतकवादियों ने हार मान ली ह आर अब उहोंने जमूकमीर की ओर ख करना छोड दिया ह। थोडे दिन की शाति उनकी अपनी यु रणनीति का अग था।

इस शाति के कारण ही भारत पर इसके लिए दबाव पडा कि वह जमूकमीर से अपनी सेना हटाना शु करे। इस शातिकाल का उपयोग करके आतकवादियों ने एक तरफ तो अपना सपक वितार किया तथा जगहजगह सुत इकाइया गठित की। अभी लाल चाक पर जो दो फिदाइन मारे गये, उनमें से एक पाकितानी नागरिक था तथा दूसरा यहीं सोपोर में पदा हआ कमीरी था। अबूकरी नामक उपयुत पाकितानी नागरिक २००९ में भारत पहचा आर यहा लकरएतयबा का उारी कमीरी क्षे का कमाडर बनाया गया। उसके साथ मारा गया मजूर अहमद अभी मुकिल से एक वष पहले लकर में शामिल हआ था।

यह पूछा जा सकता ह कि जिहादियों ारा एकाएक यह हमला तेज करने का मकसद या ह। मकसद साफ ह। एक तो ये चाहते ह कि भारतपाक के बीच तनाव बढे, जिससे अफगानितान पर हमला तेज करने की अमेरिकी योजना विफल हो, योंकि वह बहत कुछ पाकितान पर निभर ह। दूसरे यहा कमीरी सगठनों से चल रही भारत सरकार की गुत वाता भी बद हो। इसके अतिरित भारत की शाति यवथा भग करना तो इनका उेय ह ही। अब देखना ह इनसे निपटने के लिए भारत सरकार कसी नीति अतियार करती ह।

जदी कुछ भी होने वाला नहीं

कें सरकार तेलगाना के मामले में आगे विचारविमश के लिए एक उच तरीय कमेटी की किसी भी समय घोषणा कर सकती ह। गहमी पी चिदबरम ने गुवार को राय के दोनों क्षेाें के नेेताआें, मयाेिं, सासदों, विधायकों से मुलाकात के दारान सभी से आगह किया कि सबसे पहले वे राय में सामाय थिति बहाल करें, उसके बाद ही इस मामले में आगे निणय लिया जाएगा। खबर ह कि सोनिया गाधी ने आध देश कागेस के तमाम नेताआें आर मयाेिं के दिली में जमे रहने पर गहरी नाराजगी यत की ह आर कहा ह कि उहें राजधानी में तभी आना चाहिए, जब उहें बुलाया जाए या ऐसी कोइ अनिवाय आवयकता हो, जब उनका आना जरी हो। इसके साथ ही यह भी खबर ह कि इन सभी नेताआें आर मयाेिं ने राय में हर तरह से शाति बहाली का आवासन दिया ह, लेकिन साथ ही यह भी कहा ह कि तेलगाना मामले में कें को अपना ख जद से जद पट कर देना चाहिए।

वातव में कें सरकार अब ९ दिसबर को की गयी घोषणा की गलती को महसूस कर रही ह, इसलिए उसकी पूरी कोशिश उस गलती को सुधारने की ह। तेलगाना क्षे के नेता इसीलिए गहमी चिदबरम के आवासनों से सतुट नहीं नजर आ रहे ह योंकि उहें लग रहा ह कि पथक तेलगाना के बारे में अभी जदी कोइ निणय होने वाला नहीं ह। उसे इस मसले पर आगे विचार के लिए कमेटी गठित करने में भी इसीलिए विलब हो रहा ह कि वह डर रही ह कि इसके गठन के बाद अय क्षेाें से भी इस तरह की माग उठ सकती ह। पचिम बगाल, उार देश व तमिलनाडु इसकी तीक्षा में ह।

कहा जाता ह कि सिर चढी बिली को आहिता से ही उतारना पडता ह, इसलिए चिदबरम साहब आहिताअहिता मामले को शात करने में लगे ह। तेलगाना की सयुत कारवाइ समिति (जेएसी) को भी इसका अहसास ह कि चिदबरम साहब को तेलगाना पर फसले की कोइ जदी नहीं ह, फिर भी वह तीक्षा करना चाहती ह आर देखना चाहती ह कि आगे वह कानसा निणय लेते ह। इस बीच वह अपने आदोलन के वप पर भी विचार करने में लगी ह। उसे लग रहा ह कि यदि हदराबाद समेत अलग तेलगाना राय ात करना ह, तो उसे बाहर से आकर इस क्षे में बसे आम आदमी को इसके लिए आवत करना ह कि अलग राय बनने पर भी उनके लिए कोइ खतरा नहीं ह। उनकी सपा, यवसाय तथा अय सभी तरह के हित सुरक्षित रहेंगे।

इतना तो अब सभी के सामने पट ह कि आज नहीं तो कल तेलगाना को अलग करना ही पडेगा। कें सरकार अपने ९ दिसबर के निणय को टाल सकती ह, किंतु र नहीं कर सकती। अब तय केवल यह होना ह कि यह विभाजन किस तरह हो। असली मुा हदराबाद को लेकर फसा ह। यपि इसके बारे में भी सबको पता ह कि यदि तेलगाना अलग राय बनता ह, तो इसे उसे सापना ही पडेगा, योंकि इसकी भागोलिक थिति ऐसी ह कि इसका कोइ दूसरा विकप यावहारिक नहीं हो सकता, फिर भी अतिम क्षण तक इसकी लडाइ चलती रहेगी कि यदि इसे सयुत आधिपय में नहीं दिया जा सकता, तो इसे कें के अधीन अलग देश बना दिया जाए।

लेकिन इस समय एक अहम सवाल ह कि आखिर राय के विभाजन को कितने समय के लिए टाला जा सकता ह। या अगले चुनावों तक ? नहीं, ऐसा शायद नहीं हो सकता। योंकि ऐसा करना कागेस के लिए राजनीतिक टि से हानिकर हो सकता ह। तो फिर यदि चुनावों के पहले विभाजन करना ह, तो कम से कम उसे एकदो साल पहले यह काम पूरा कर लेना होगा। अब इस तरह यदि सोचे तो कें सरकार के पास इस बारे में फसले के लिए एकदो साल से अधिक का समय नहीं ह। तो या यह अनुमान लगाया जाए कि २०१० में इसके बारे में कोइ अतिम फसला हो जाएगा?

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