थरुर की टिपणी को लेकर उठा नया विवाद
विदेश रायमी शशि थर अपने वभाव वश हमेशा किसी न किसी विवाद में घिरे रहते ह। वातव में वह एक राजनेता कम फड बुजीवी अधिक है । इस लेखक आदमी को शायद धानमी डामनमोहन सिंह ने उनके यापक अन्तरराष्ट्रीय सपक तथा बुजवी छवि के कारण राजनीति में घसीटा आर अपने ममिडल में शामिल किया। उहें उनके अनुभव के अनुसार विदेशमंत्रालय में जगह दी।
लेकिन वह अपनी टिपणियों से आए दिन पार्टी व सरकार दोनों के लिए समया पदा कर रहे है। ताजा समया उनके विदेश नीति सबधी एक बयान को लेकर खडी हो गइ है । मामला लदन का है । वहा लेबर पार्टी के सासद भिखू पारेख ने भारत की विदेश नीति सबधी एक यायान में भारतीय कागेस पार्टी की महान मूर्ति तिगाधी, नेह एव इदिरा की विदेश नीति की तीखी आलोचना की। वहा उपथित थर साहब ने पारेख के विचारों से पूण सहमति य करते हए कहा कि यह वातव में नतिकता का कमिक यायान जसी हो गइ थी। उहोंने पारेख की बातों को थोडा आर आगे बढाते हुए कहा कि नेह की नीतिया भारत की आमलाघा बढाने वाली थी। उहोंने इस बात को विशेष प से रेखाकित किया कि देश के थम धानमी ने अपनी नीतियों को इस तरह बनाया मानो वे पूरे एशिया के नेता हो आर पूरे एशिया की तरफ से बोल रहे हों। उहोंने पूरे महाीप को एक प मान लिया आर उसके अतविर्रोधों तथा भिताआें की तरफ कोइ यान नहीं दिया। इदिया गाधी के बारे में उनका कहना था कि उनके पास रणनीतिक सोच का अभाव था। उनकी नीतियों में दुनिया को कोइ आकार देने या कोइ लोबल भूमिका अदा करने की आकाक्षा नहीं थी। उनकी चि अधिक क्षेीय थी।
यदि तटथ से देखें तो थर ने कुछ गलत नहीं कहा। भिखू पारेख आर थर से असहमत होने का कोइ कारण नहीं ह, लेकिन थर साहब को शायद यह पता नहीं ह कि भारत की आधुनिक राजनीतिक सकति में अपने सगठन के वतमान या पूव नेताआं की आलोचना निषि ह। वे जसे भी रहे हो, लेकिन कायकताआें व नेताआें को उनकी महानता का ही गुणगान करना ह। इसीलिए कागेस के तमाम नेता थर की बातों से चकित ह। पार्टी के महासचिव जनादन वेिदी तथा वा शकील अहमद ने कहा ह कि वे थर की टिपणिया सुनकर चकित ह। उहें पडित नेह की विदेश नीति के बारे में ऐसा नहीं कहना चाहिए था। उनकी बात सही ह, योंकि राजनीति कोइ साइ से नहीं कूटनीति से चलती ह। अपनी पार्टी के बडे नेताआं की नीतिया गलत लगें तो भी उहें चुपचाप बदल देना चाहिए, उस पर भाषण नहीं देना चाहिए। आज सभी जानते ह कि के मे कागेस की ही सरकार ने नेह कालीन अथनीति व विदेश नीति को बदल दिया ह। लेकिन एक बार भी नेह की नीति की आलोचना नहीं की। अपने ही नहीं, दूसरे देशों की राजनीति में भी इसके उदाहरण देखे जा सकते ह। चीन की सारी नीतिया अपनी सायवादी दिशा खो चुकी ह आर विशु रावादी सामायवाद की तरफ बढ रही ह, लेकिन उसने अपनी राजनीतिक पहचान अभी भी वही बना रखी ह, जिसे वहा सायवादी काति के णेता माओसे तुग ने थापित किया था।
वातव में थर राजनीति के लायक य नहीं ह। सयु रासघ में उप महासचिव के तर पर काम करने के बाद वह राीय से अधिक अतराीय हो गये ह। देश की राजनीतिक पाटियों की सकति उनके वभाव के अनुकूल नहीं ह। इसलिए बेहतर ह कि वह राजनीति से अलग हो जाए आर पूणकालिक लेखक हो जाए या कोइ आर बाकि यवसाय अपना लें। आर यदि राजनीति में ही रहने के इछुक ह, तो उहें अपना तारतरीका बदल लेना चाहिए आर पार्टी के अनुशासित सिपाही की तरह सयमित यवहार करना चाहिए।
उमर का नजरिया
जमू कमीर के मुयमी उमर अदुला का कहना ह कि राय में आतकवाद दुबारा सिर नहीं उठा रहा ह। श्रीनगर व पुलवामा में हइ मुठभेडे सुरक्षा बलों की पहल पर हइ ह, आतकवादियों की पहल पर नहीं। गुतचर सूचनाआें के आधार पर लय बनाकर किये गये हमलों को आतकवाद की वापसी नहीं कहा जाना चाहिए। एक तरफ गुतचर एजेंसियों की सूचना ह कि ७०० से अधिक शिक्षित व हथियारबद जिहादी हमले के लिए तयार बठे ह। सीमा पार भी उनका जमावडा हो रहा ह। सीमा क्षे में पाकितान की तरफ से बारबार की जाने वाली गोलीबारी इसका माण ह कि जिहादी लगातार घुसपठ की कोशिश में लगे ह। इधर पाकितान की तरफ से करीब आधे दजन राकेट दागे जाने की भी खबर मिली ह। उमर अदुला आखिर इस साइ से यों मुह चुराना चाहते ह कि श्रीनगर का फिदाइन हमला पाकितान के इशारों पर वहा बठे आकाआें के निर्देश पर किया गया। सुरक्षा बलों ने यह भी माणित किया ह कि पूरे मुठभेड के दारान ये आतकी पाकितान थित अपने नेताआें के साथ सेलफोन पर सपक बनाए हुए थे।
उनका वासी भारतीयों के समेलन में तो यह कहना ठीक था कि जमू कमीर की थिति देश के किसी अय राय की थिति से भि नहीं ह। तथा कानून यवथा की थिति भी वहा किसी अय राय के मुकाबले बदतर नहीं ह। योंकि वह वासी भारतीयों को निवेश के लिए अपने राय में आमति करना चाहते ह, लेकिन इसका मतलब यह नहीं ह कि वह साइ को ढकने की कोशिश करें। जमू कमीर में अभी अपेक्षाकत शाति ह या आतकवादी हमले कम हो रहे ह, तो इसका कारण केवल यह ह कि ये आतकवादी सगठन वय पाकितान व अफगानितान में उलझे हए ह। वहा इतने जबदत अमेरिकी दबाव के बावजूद यदि वे कमीर में अपने फिदाइन भेजने की थिति में ह, तो यह उनकी विशि क्षमता की ही परिचायकहै ।
श्रीनगर आर पुलवामा की मुठभेडे इस बात की परिचायक ह कि घाटी में जिहादियों की इकाइया इस समय अपने हाथ पाव समेटे हए अवय ह, लेकिन उहोंने हार नहीं मानी ह। वे तयारी में लगी ह आर समय की तीक्षा कर रही ह। कहा गया ह कि दुमन आर आग को कभी छोटा नहीं समझना चाहिए। सुरक्षा बलों को उहें पूरी तरह नेतनाबूद किए बिना शात नहीं बठना चाहिए।
