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एक छोटे राज्य की त्रासदी

swatantravaartha  Mon, 11 Jan 2010, IST

एक छोटे राज्य की त्रासदी

तेलगाना आदोलन से घबराकर के सरकार ने प्रथक तेलगाना राय की माग को वीकार करने में जो हडबडी दिखाइ उससे आध देश में तेलगाना समथक आर तेलगाना विरोधी आदोलनों की लपटें तो उठ ही रही है , लेकिन इसके साथ ही देश के अनेक भागों से छोटेछोटे राज्य के निमाण की माग उठने लगी है आर मुयमी पद के आकाक्षी अनेक राजनेता जनभावनाआं को भडकाने में लग गये है । दूसरे राय पुनगठन आयोग की चचा भी शु हो गइ है ।

छोटे रायों के पक्ष में सबसे बडा तक दिया जा रहा है सुशासन आर विकास का। पर, या किसी राय का सुशासन आर विकास उसके छोटे आकार पर ही निभर करता ह ? इस न का उार सन २००० में गठित झारखड नामक छोटे राय की इन ना वषा] में हइ दुदशा से मिल जाता है ।

चच ने उठायी माग झारखड के निमाण की माग वतता ा के समय से ही उठनी आरभ हो गइ थी। इस माग के पीछे इसाइ चच की मुय भूमिका थी। उसकी मुय ेरणा ‘सुशासन’ आर ‘विकास’ न होकर इस क्षे में बढी जनजातियों पर अपना वचव थापित कर उनके इसाइकरण की किया को निबाध आर तेज करना था। आगे चलकर सााकाक्षी राजनेताआ ने चर्च्र उठायी गयी इस माग को ‘सुशासन’ आर ‘विकास’ से जोड दिया। इसमें दो मत नहीं कि झारखड क्षे में विकास की असीम सभावनाए विमान ।

लोहा आर कोयला जसे आधारभूत खनिज पदाथा] का उसके पास अकूत भडार ह। इस भडार से आकषित होकर देश के दस बडे उाेगपतियों ने वहा २ लाख १७ हजार ८ सा दस करोड पये का पूजी निवेश किया ह। जमशेदपुर, धनबाद, राची आर बोकारो जसे कइ विशाल आाेगिक नगर उसे ा ह। वहा की धरती अयत उपजाऊ है , कितु यह सब होते हए भी सन २००० मे पथक राय बनने के बाद पिछले ना वषा] में झारखड में सुशासन के नाम पर या चि उभरा ह ? इन ना वषा] में वहा छह मुयमी बदले जा चुके ह। इसके अलावा यह राय पिछले ११ महीनों से रापति शासन को भोग रहा ह। अधिकाश समय वहा की सरकार निदलीय विधायकों की खरीद फरोत पर टिकी रही ह। सोनिया पार्टी ने भाजपा को साा से बाहर रखने के लिए मधु कोडा नामक एक निदलीय विधायक को बाहर से समथन देकर दो वष तक मुयमी पद पर टिकाये रखा आर अब वे मधु कोडा अपने कइ मंत्रा के साथ जनकोष से ४००० करोड पए का घोटाला करने के आरोप में जेल की हवा खा रहे ह। एकदूसरे मुयमी शिबू सोरेन सोनिया पार्टी के साथ गठबधन करके के सरकार में मी बने, उन पर एक सहयोगी की हया आर भाचार के कइ आरोप लगे।

वे गिरतार हए, जेल से छूटकर २५ अगत २००८ को उहोंने जोर डालकर मुयमी पद पर अपना अभिषेक करवा लिया, पर छह महीने के भीतर निवाचन की सवधानिक आवयकता को पूरा करने के लिए जनवरी २००९ में विधानसभा का उपचुनाव लडे आर हार गए। केवल ८१ सदयीय विधानसभा वाले छोटे राय झारखड की राजनीतिक थिरता आर सुशासन का यह हाल ह कि पिछले स में एक दजन से यादा विधायकों को दलबदल कानून के तहत अयोय ठहराया गया। भाचार के जाल में झारखड इतनी बुरी तरह फस गया ह कि निदलीय मयाेिं के भाचार से छुटकारा पाने के लिए जब रापति शासन थोपा गया तो सोनिया खानदान के ति वफादारी की योयता से सप तकालीन रायपाल सिते रजी के निकटतम सहायकों के दामन भी भाचार के कीचड में सने पाये गये। भाचार आर साा की इस अवसरवादी व घिनानी राजनीति ने झारखड के समाज को अनेक फाकों में बाट दिया ह। जनजाति आर गर जनजाति विभाजन तो पहले से विमान था। जनजातियों में भी सथाल, उराव, मुडा आर हो जसे विभाजन उभर आये ।

गर जनजाति समाज में जाति के आधार पर विभाजन करके अपनी राजनीति की रोटिया सेंकने के लिए लालू यादव की राजद आर रामविलास पासवान की लोजपा ने अपनी अपनी ‘दुकानें’ वहा खोल दी ह। चच आर उसका नसली आवरण झारखड की राजनीति में बहत भावशाली तव बन गयेहै । रावाद के वि इसाइ, मुलिम सदायवाद का वहा खुला गठबधन हो गया ह। इस सामाजिक, धामिक आर राजनीतिक विखडन के फलवप राीय दल वहा लगभग आसगिक बनते जा रहे है ।


आचयजनक परिणाम झारखड विधानसभा के कल के चुनाव परिणामों को इस पभूमि में ही समझना होगा। नसली आतक के नाम पर ८१ विधानसभा क्षेाें का चुनाव पाच चरणों में कराया गया। रायपाल के शकर नारायण की देखरेख में शायद रापति यानी रायपाल शासन की वफादारी पर विवास के कारण ही चुनाव परिणाम आने के पहले ही सोनिया पार्टी के वा ने मीडिया में वातावरण बनाना आरभ कर दिया कि इस बार हमारी पार्टी को पूण बहमत ा होना सुनिचित ह। एक केीय मी सुबोध कात सहाय बोरियाबितार लेकर चुनाव भावी के नाते कइ महीनों से वहा जाकर डट गये थे, पर जब चुनाव परिणाम आये तो सोनिया पार्टी की झोली में केवल चादह सीटें आयीं अथात २००५ की ९ सीटों से केवल ५ यादा। जबकि सोनिया आर राहल ने झारखड जाकर पूरा जोर लगाया था। यह कहना कठिन ह कि पाच सीटों की यह व उनके चार का परिणाम ह या बाबूलाल मराडी की झारखड विकास पार्टी के साथ चुनाव पूव गठबधन का। विव हिदू परिषद के सगठन मी, १९९८ में के में भाजपानीत राजग सरकार के मी आर सन २००० में झारखड निमाण के बाद भाजपा ारा मनोनीत थम मुयमी बाबूलाल मराडी को इन चुनावों में ११ सीटों पर मिली विजय में सोनिया पार्टी का कोइ योगदान दिखाइ नहीं दे रहा। भाजपा का जनाधार अवय उनके पीछे गया लगता ह, योंकि भाजपा पिछली बार की ३० सीटों से घटकर इस बार केवल १८ सीटों पर रह गयी। भले अनजाने ही किया हो, पर भाजपा ने अपने अदनी साासघष के कारण २००६ में बाबूलाल मराडी को पार्टी से निकासित करके अपना जनाधार सोनिया पार्टी के हवाले कर दिया था। जहा तक सोनिया पार्टी के जनाधार का सवाल ह, उसका आकलन तो इसी बात से हो सकता ह कि उसके देश अयक्ष दीप बलमुचु, विधायक दल के नेता मनोज यादव, पूव उपमुयमी टीफन मराडी, पूव केीय मी रामेवर उराव, पूव विधानसभा अयक्ष आलमगीर आलम जसे सभी महवपूण नेता चुनाव हार गये, जबकि बाबूलाल मराडी केवल २५ सीटों पर चुनाव लडकर ११ सीटें जीत गये आर कागेस ५६ सीटों में से केवल १४ सीटें जीत पायी। कितु सोनिया पार्टी की यह दुगति भाजपा की पराजय को छोटा नहीं कर देती। झारखड राय के निमाण का श्रेय लेने वाली भाजपा, बाबूलाल मराडी आर अजुन मुडा के मुयमविकाल में लबे समय तक राजनीतिक थय दान करने वाली भाजपा, २००९ के लोकसभा चुनावों मे झारखड की १४ में से ८ सीटें जीतने वाली भाजपा पूण बहमत पाने के यापक विवास को पूरा यों नहीं कर पायी, इसकी गहरी कारणमीमासा होनी बहत आवयक ह। राजनीतिक अथिरता, भारी भाचार आर कमरतोड महगाइ जसे मुे उसके लिए अनुकूलता पदा कर रहे थे। पिछली विधानसभा के ति जन असतोष कितना गहरा आर यापक था, इसका अनुमान इस एक तय से लग जाता ह कि पिछली विधानसभा के केवल १९ चेहरे नयी विधानसभा में वापस लाट पाये ह। ६२ नये चेहरों में से ३४ पहली बार विधानसभा में पहचेहै ।

माओवादियों की भूमिका दीली के डाइगम में बठकर चाय की चुकियो के साथ जो नवधनाढ शिक्षित मयम वग भाचार आर महगाइ के बारे में गिलिटीनी आसू बहाता रहता ह, उसे झारखड के चुनाव परिणामों का बारीक अययन अवय करना चाहिए। उसे सोचना चाहिए कि ४००० करोड पये के भाचार के आरोप में जेल मे बद मधु कोडा की पनी गीता कोडा के चुनाव में उतरने की इसके अलावा या योयता थी कि वह मधु कोडा की पनी ह आर उनके चुनाव जीतने का इसके अलावा या अथ हो सकता ह कि जनता की में मधु कोडा का भाचार,भाचार नहीं ।

केवल गीता कोडा ही नहीं, मधु कोडा के दो मी भाचार के आरोप में जेल में बद होकर भी बिना चुनाव क्षे में गये चुनाव जीत गये। जो छह निदलीय जीते है , उनमें से येक के वि भाचार के आरोप है ।

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