बिहार में कब चुनाव ?
बिहार में यों जनता दल यू आर भाजपा के नेता विधानसभा चुनाव जदी होने की सभावना से इकार कर रहे है । बावजूद इसके एक सभावना नवबर २०१० के तय समय से पहले जून में चुनाव की है। सभावना की वजह जुलाइअगत में बिहार में आने वाली बाढ है। बाढ आएगी आर उसके सकट के तुरत बाद अटूबर में चुनाव पोसेस चालू हआ तो राहत काम में कमी रहेगी। महीने भर में सभी को राहत मुहया कराना सभव नहीं होगा। वसे नीतीश कुमार के कइ करीबियों का मानना ह कि बाढ के बाद सरकार के पास लोगों को राहत के नाम पर सीधे पसा आर सामान देने का माका होता है। सरकारी खजाने से नीतीश कुमार जमकर खच करवाएगे। उसका फायदा नवबर के चुनाव में होगा। इसलिए समय पर ही चुनाव की अधिक सभावना ह। मगर बाढ का नुकसान यदि भारी हआ आर अटूबर में आचार सहिता लागू हो गइ तो लोगों को पया राहत नही मिलेगी। इससे नीतीश कुमार को लेने के देने पडेंगे, इसी गणित पर कइ नेताआें का मानना ह कि नीतीश कुमार जून में विधानसभा चुनाव करवा सकते है।
इसका अथ ह कि फरवरी में आठ दस दिन का बजट स होगा। उसमें फटाफट बजट पास कराकर चुनाव में जाने का फसला होगा। बजट पास कराकर आर तमाम तरह की घोषणाए के साथ चुनाव में जाने की एक कारगर रणनीति बनती ह। फिर सीएसओ की साढे यारह तिशत की रिकाड विकास दर का ताजा हा भी नीतीश कुमार में जोश बढाने वाला है। चुनाव आयोग को वोट लिट के मकसद में २२ दिनों की मोहलत चाहिए। मतलब चुनाव आयोग के लिए भी जून में चुनाव करा सकना सभव ह। जो हो, तवीर फरवरी में साफ होगी।
बमबम नीतीश
बिहार में नीतीश कुमार बमबम ह। सीएसओ ने गुजरात के बाद बिहार में साढे यारह तिशत के रिकाड विकास की बात या कहीं, नीतीश कुमार आर सुशील कुमार मोदी दोनों फूले नहीं समा रहे ह। इस वाहवाही को जदयू में भी कइ नेता पचा नहीं पा रहे ह। कुछ बडे नेताआें का मानना ह कि सरकारी आकडे से नीतीश कुमार का गर बढेगा। उनकी अफसरशाही बढेगी । पार्टी नेताआें, कायकताआें को साथ लेकर चुनाव तयारी की रणनीति से उनका फोकस हटेगा। बहरहाल नीतीश कुमार की खुशी पर जदयू के ही एक पुराने दिगज भुनाथ सिंह ने कुछ पानी डाला ह। भुनाथ आर नीतीश कुमार में परोक्ष डायलागबाजी हइ ह।
पूव सासद भुनाथ सिंह ने खुली बगावत का ऐलान करते हए मुयमी पर अपनी जाति के लोगों की तरफदारी का आरोप लगाया ह आर कहा ह कि झारखड विधानसभा चुनाव में नीतीश माडल फेल था। भुनाथ सिंह ने मुयमी को चीि लिखकर उहें सावधान किया ह। उनके अनुसार लोकसभा में जदयू को विकास के कारण नहीं, बकि लालू विरोधी माहाल के कारण यादा सीटें मिली थीं। जवाब देने में नीतीश कुमार कहा चूकने वाले थे। उनका जवाब था कि उहोंने भुनाथ सिंह से बातचीत की कोशिश की थी। उहोंने पूछा कि कोइ बात हो, तो बताए। लेकिन उनका जवाब था कि कोइ बात नहीं ह। फिर बिना नाम लिए नीतीश कुमार ने कहा यह बिहार ह। यहा कोइ खाली नहीं बेठेगा। खाली ह, तो काम ढूढेगा ही। बाद में नीतीश कुमार ने आरजेडी को भी आडे लिया। रिकाड गोथ रेट पर लालू की पार्टी की माखाल पर नीतीश कुमार का कहना था हमारे काम से कुछ लोगों के कलेजे में जलन हो रही है।
जाज के यहा रानक
जाज फनाडीज बेहद असहाय ह। पर घर परिवार का इन दिनों वे भरपूर सुख भोग रहे ह। दीलदी की उनकी कण मेनन माग की कोठी में चहलपहल ह। पूव पनी लला कबीर उनके साथ ह। जाज का बेटा, बह आर पोता भी दीि आया हआ है। नववष के माके पर जाज के भाइ आर अय परिजन भी कण मेनन माग के मकान में आए हए थे। पोते की खुशी में घर पर एक जमावडा भी हआ, जिसमें शरद यादव सहित दो चार नेता आमति थे। जाज फनाडीज के बेटे को दीि रास आया लगता ।
जापानी पनी आर विदेश में नाकरी के चलते जाज के बेटे ने विदेश में ही रहने की ठानी हइ थी। लेकिन लगता ह, अब उनका दीि से जुडाव बनेगा। पारिवारिक समारोह आर घर की इस रानक से जया जेटली पूरी तरह बाहर ह। सुनकर हरानी होगी कि जाज के बेटे ने अपनी सुरक्षा की गुहार लगाइ ह। उधर लला कबीर ने जाज फनाडीज के नाम पर काशन में जो छप रहा ह, उससे उनका सबध नहीं होने का नोटिस दिया ह। कुल मिलाकर जाज फनाडीज की राजनतिक विरासत में परिवारजनों का रोल बन गया है।
ममता बनाम णव
पचिम बगाल में णव, ममता आर बुदेव के रितों में गजब राजनीति हो रही ह। णव मुखर्जी पर लेट नेता डोरे डाल रहे ह। उधर णव मुखर्जी ने ममता बनर्जी के ति सदरवया अपनाया हआ ह। ममता बनर्जी पहले से ही कम नहीं ह। उहोंने पचिम बगाल के कागेसियों को हसियत बताइ हइ ह। तभी कुल मिलाकर ममता बनर्जी आर णव मुखर्जी में सद रिते ह। कुछ जानकारों के अनुसार दोनों नेताआें में दो महीने से बातचीत नहीं हुइ ह। णव आर ममता में एकदम कुी भले नहीं हइ हो, लेकिन दोनों एक दूसरे के साथ दिखलाइ देने से बच रहे ह। दरअसल ममता बनर्जी ने सिलिगुडी नगरपालिका के चुनाव से कागेस को जसे निशाने में लिया ह, उससे देश कागेस आर तणमूल कागेस में आपसी सदभाव लगभग नहीं के बराबर ह। इसे बुझते हए सीपीएम नेताआें आर खासकर बुदेव भाचाय ने णव मुखर्जी पर डोरे डाले ह। बुदेव भाचाय ने दीि आकर डामनमोहन सिंह से तारतय बनाया। यह सहमति बनाइ कि नया रायपाल उनसे पूछकर तय होगा। फिर लेट सरकार ने अपने सरकारी आयोजनों में णव मुखर्जी को यातने का सिलसिला शु किया।
तय ह कि णव मुखर्जी की लेट नेता ऐसी ललोचपो कर रहे ह जसे वे उनके साथी कामरेड हो। जनवरी आर फरवरी के दो महीनों में शिलायास जसे विभि ाेगामों के लिए णव मुखर्जी को कोइ २०२२ याते मिले हए ह। पिछले दिनों उहोंने राय सरकार के कइ ाेगाम अटेंड भी किए। ठीक विपरीत ममता बनर्जी आर उनके मी लेट सरकार के किसी ाेगाम को अटेंड नहीं करते ह। किसी लेट नेता के साथ ममता बनजी मच पर नजर नहीं आएगी। इसलिए जब वे णव मुखर्जी को लेट नेताआें के साथ मच पर बठा देखती ह, तो भडक उठती ह। जाहिर ह लेट ने कागेस आर तणमूल में दरार डालने की राजनीति की हइ ह। वहीं णव मुखर्जी ने भी ममता बनर्जी को यह मसेज दिया हआ ह कि कागेस अपने हिसाब से पचिम बगाल में राजनीति कर सकती ह। ममता बनजी आर णव मुखर्जी के बीच की यह राजनीति देश में दोनों पाटियों के नेताआें आर कायकताआें को भी गोलबद बनाए हए ह। ममता बनर्जी आला कागेस नेताआें को यह शिकायत कर चुकी ह कि देश कागेस का एक खेमा लेट के साथ रिते बनाए हए ह।
अमर को गुसा यों?
इस कालम में सिंगापुर में इलाज के व ही अमर सिह आर मुलायम सिंह के रितों की खटास का सबसे पहले जिक हआ था। सबधों में उतार का दार अब अतिम परिणति पर पहचता लगता ह। वजह कइ ह। माटे तार पर इस बार अमर सिंह ने रामगोपाल यादव आर पूरे परिवार को निशाना बनाया ह। इसका अथ यह ह कि फिरोजाबाद उपचुनाव के बाद मुलायम सिंह के भाइभतीजोंबेटे बह सभी ने मिलकर अमर सिह को आउट किया ह। फिरोजाबाद से पहले अमर सिंह की मुलायम सिंह से नाराजगी थी। पर बाद में मुलायम के परिवार वालों ने ठानी कि अमर सिंह की पहले जसी दुकान नहीं होगी। उार देश में विधान परिषद के चुनाव हए। उनमें अमर सिंह को महव नहीं मिला। समाजवादी पार्टी में अमर सिंह बेगाने हो गए ह। जहा हर बात आर हर व अमर सिंह को पूछा जाता था, वहा अब उनकी कोइ चिंता ही नहीं करता ह।
उधर मुलायम सिंह के ति अमर सिंह की गाठ सिंगापुर में इलाज के व से ही चली आ रही ह। सवाल ह मुलायम सिंह आर अमर सिंह के हिसाबकिताब का या हआ होगा ? या अब नेताजी की यवथाआें आर चिंताआें को अमर सिंह ने छोड दिया होगा? लगता ऐसा ही ह। अमर सिंह ने पूछा ह कि मने जितना किया ह, उसके एवज में मुझे या मिला ह? सदेह नहीं कि अमर सिंह ने मुलयाम सिंह के लिए सब कुछ किया था। उनके लिए पसों, ससाधानों आर लमर की कमी नहीं रहने दी थी। यह उनकी पीडा ह। उहें बहत बुरा लगा जब वे बीमार हए, किडनी बदलने की नाबत आइ आर मुलायम सिंह का उनके ति सवेदक यवहार नहीं हआ। अमर सिंह की चिंता करने के बजाय मुलायम के परिवार वालों को यह चिंता हइ कि यदि अमर सिंह के साथ कुछ हआ तो हमारा या होगा। इहोंने अपने हिसाब सोचा। बहरहाल पते की बात यह ह कि मुलायम सिंह से अमर सिंह का साथ ऐसे व छूटा ह, जब नेताजी का गाफ नीचे ह। मुलायम सिह से जब अमर सिंह जुडे थे, तब नेताजी का गाफ बुलदी पर था। उस नाते अमर सिंह के जीवन का फिर यह तय जाहिर हआ ह कि वे जिसके साथ जुडते ह, वह अतत: सडक पर ही होता ।
लक्षीप में सोनिया गाधी
कागेस में नए साल का पहला साह छुी में ही बिता। यों तेलगाना की सवदलीय बठक का हा रहा। लेकिन पार्टी के भीतर सोचविचार या फेरबदल की बाते अटकी ही रही। शायद इसलिए कि हाइकमान छुी पर था। लक्षीप में सोनिया गाधी आर उनके परिवार की छुी इस साल कायदे में मनी। यान रहे पिछले साल दिसबर के आखिर में चेट इफेशन की वजह से सोनिया गाधी को अपताल में इलाज कराना पडा था। इसलिए गम लक्षीप में छुी की बात समझ में आती ह। कुल मिलाकर बिना हे के छुी मनी ह। पहले राहल गाधी के राजथान में कही छुी मनाने का हा था, लेकिन वे भी लक्षीप ही पहचे।
सोनिया गाधी गोवा होते हए लक्षीप पहची। आर उस याा की यह नोट करने लायक खबर ह कि ३१ दिसबर की जिस लाइट से वे गोवा गइ थी, उसमें केींय वाय मी गुलाम नबी आजाद भी थे। मगर लाइट में उनकी बुकिंग आगे की बिजनेस लास की सीट की थी, जबकि सोनिया गाधी आर उनकी मा ने पीछे की इकोनोमी लास से याा की। मतलब सोनिया गाधी ने मितययता में केटल लास में याा की जबकि फिजूलखर्ची रोकने के सरकार के आदेश के बावजूद बतार मी गुलाम नबी आजाद बिजनेस लास में थे। सोचा जा सकता ह कि गुलाम नबी आजाद पूरी याा के दारान कितने बचेन रहे होगे।
