बगलादेश के साथ सहयोग सबधों की नई शुरुआत
बगलादेश की धानमी शेख हसीना ने भारत को विशवास दिलाया है कि वे अपने देश की जमीन को किसी भारत विरोधी गतिविधि के लिए इस तेमाल नहीं होंगी। इसका माण पिछले दिनों वह ‘उफा’ नेता को गिरतार करके भारत को साप कर दे चुकी है। आगे भी उनसे ऐसी इमानदार कारवाइ की अपेक्षा ह। भारत विरोधी आतकवादी सगठन बगलादेश को अपना अभयारणय न बना सकें। इसके बदले में भारत ने दिल खोलकर बगलादेश की सहायता करने की घोषणा की है।
धानमी ने एक अरब डालर का उदार कज देने की घोषणा की ह। इसके साथ ही वहा आधारभूत आथिक ढाचा तयार करने में भी मदद का आवासन दिया ह। भारत अपनी १५०० मेगावाट की वह जल वुित परियोजना रोक देने का भी ऐलान किया है , जिसे लेकर बगलादेश में काफी असतोष था। इसके साथ ही उसने बगलादेश को २५० मेगावाट अतिरित बिजली देने का भी वायदा किया ह। यह पिछले वष की घोषित १०० मेगावाट के अतिरित होगी।
शेख हसीना के पूव बेगम खालिदा जिया के शासनकाल में बगलादेश भारत की सुरक्षा के लिए एक बडा खतरा बन गया था। खालिदा की भारत विरोधी नीतियों तथा जिहादी सगठनों को को मिल रहे सरकारी सरक्षण के कारण बगलादेश पुन: भारत के लिए दूसरा पाकितान बनता जा रहा था, लेकिन शेख हसीना के आने के बाद थिति काफी बदल गयी है।
वातव में यह शेख हसीना की भी मजबूरी ह कि वह भारत से दोती बढाए आर भारत विरोधी गुटों पर काबू करें, योंकि ये भारत विरोधी गुट व सगठन उनके भी दुमन है। शेख हसीना ने अब यह समझ लिया ह कि साा में रहने के लिए उहें भारत से अछे सबध रखना आवयक ह, योंकि उनकी तमाम समयाआें का समाधान भारत ही कर सकता है।
भारत ने आज तक कभी किसी देश को एक बार में इतनी बडी राशि (एक अरब डालर) कज में देने की वीकति नहीं दी थी, किंतु अपनी पूर्वी सीमा की तरफ से सुरक्षा के लिए वह कुछ भी कर सकता ह। शेख हसीना की इस याा के दारान दिली में जो समझाते हए ह, वे यादातर सुरक्षा केंदित ह। जसे दोनों देश आपराधिक मामलों में परपर कानूनी सहायता देने, सजा याता कदियों के थानातरण, आतकवाद के खिलाफ लडाइ तथा सगठित अपराधाेें की रोकथाम के उपाय। इसके अलावा दो समझाते बिजली के क्षे में सहयोग तथा साकतिक आदानदान सबधित है। भारत ने कुल मिलाकर आतकवाद पर नियण में सहयोग देने के बदले में बगलादेश के आथिक निमाण में पूरा सहयोग देने का वचन दिया है। अब यदि दोनों देशों के बीच यह तालमेल आगे बढता ह, तो निचय ही यह दोनों के लिए ही अयत शुभ है।
चीन की शतिपधा
चीन ने अपनी तरफ आते हए क्षेपााें (मिसाइलों) को नट करने की एक नइ टेनोलाजी का सफल परीक्षण किया है। यह टेनोलाजी या ह आर कसे काम करती ह, यह तो नहीं पता, लेकिन चीन के रक्षा विशेषज्ञों का दावा ह कि यह टेनोलाजी पिछले दिनों युत उस टेनोलाजी से बेहतर ह, जो उसने अतरिक्ष में घूमते हए अपने एक उपगह (सेटेलाइट) को वत करने में इतेमाल की थी।
उनके अनुसार अतरिक्ष में घूमता उपगह तो पूव निधारित गति व दिशा में पवी की एक निचित कक्षा में घूमता रहता ह, इसलिए उसे निशाना बनाना आसान ह, किंतु किसी शु देश ारा छोडे गये क्षेपा की न गति का पता होता ह, न दिशा का। उनकी गति व दिशा बदलती हइ भी हो सकती है, इसलिए उसे सफलतापूवक निशाना बनाना मुकिल काम ह, लेकिन चीनी रक्षा वज्ञानिकों ने उसे कामयाब कर दिखाया है।
चीन ने यह परीक्षण शायद अमेरिका को यह चेतावनी देने के लिए किया ह कि यदि वह ताइवान को विकसित हथियारों से लस करेगा, तो उसके कारण इस क्षे में श तिपधा तेज होगी। वातव में अमेरिका ने अभी मा एक सताह पहले ताइवान को मिसाइल रोधक णाली पेटियाट बेचने की घोषणा की है। ३ अरब डालर में ३०० ऐसे क्षेपा (पेटियाट पीएसी३) ताइवान को बेचने का सादा हआ है। चीन ने इस पर गहरी नाराजगी बतायी है। आर अभी अमेरिकी राटपति ओबामा की चीन याा के दारान दोनों देशों की सेनाआओओं के बीच सतत सपक का फसला र कर दिया है।
यहा यह उलेखनीय ह कि चीन अपनी रक्षा तयारी आर तेज करने में लगा ह। इस वष उसने अपना रक्षा बजट गत वष के मुकाबले १५ तिशत बढाकर ६९ अरब डालर कर दिया ह। चीनी ाेतों के अनुसार वह अपनी सेना के आधुनिकीकरण में लगा ह, जिसके लिए धनराशि बढानी आवयक ह। चीन की वातविक तिपधा शात क्षे में अमेरिका के साथ ह, किंतु उसकी सनिक तयारी से सुरक्षा का सवाधिक खतरा भारत को ह। इसलिए चीन की सय शति को देखते हए भारत को अपनी तिरक्षा तकनीक में सुधार पर विशेष यान देना चाहिए।
