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लोकतांत्रिक सरकारों का कातिल मो .अली जिनना

Swatantra Vaartha  Wed, 13 Jan 2010, IST

लोकतांत्रिक सरकारों का कातिल मो .अली जिनना

पाकितान में लोकत यों नही टिकता ? वहा थाडे थोडे अतराल से सनिक तानाशाह यों आ धमकते है? यह दोष पाकितान के वतमान शासकों में है या फिर उसकी जम कुडली में ? इस बात की पडताल करने के लिये जब मोहमद अली जाि के किया कलाप पर एक नजर दाडाते ह, तब पता लगता ह कि वातविक दोष तो उसके सथापक में है। इन दिनों जसवत सिंह की पुतक को लेकर भारतीय उपखड में एक शोर मचा हआ है। जाि के लिये लिखा जा रहा ह कि वे सेकुलर थे आर भारत पाकितान का विभाजन नहीं चाहते थे। लेकिन जब इतिहास के पों को पलटते ह, तो उनके चाका देने वाली बातें हमारे सामने आती है। उनका यह चरि इस बात को उजागर कर देता ह कि जाि लोकतवादी नहीं थे।

आज वहा सनिक तानाशाहों को दोष दिया जाता है। लेकिन असलियत यह है कि जिस पाकितान को हम आज देख रहे है, वह केवल भारत को तोड कर ही नहीं बना गया, बकि वय पाकितान के जिन भागों में चुनी हइ सरकारें थी, वहा भी मोहमद अली जाि उनकी हया करने से नहीं चूके। कबिनेट मिशन जब भारत में आने वाला था, उस समय यह घोषणा की गइ थी कि जिन देशों में जिस पाटी की साा होगी आयोग उही को आजादी के पचात साा सिपुद करेगा। जाि तो केवल साा मुलिम लीग की चाहते थे, इसलिये उहोंने एकएक करके अपने मिलने वाले भाग में जिन पाटियों की जहा साा कायम थी, उसे एक ही झटके में समा करवा दी। मुलिम लीग की साा न होने के बावजूद लीग के गुडो से आदोलन चलवाया आर तकालीन साा को उखाड फेंका।

वतता मिलने से पूव पाकितान में केवल सिंध आर बगाल में लीग की सरकार थी। लेकिन पजाब में युनियनिट पार्टी की आर फटियर में कागेस की सरकार थी। इसी कार लूचितान में २७ माच १९४८ को मोहमद अली जाि ने थल आर वायु सेना भेजकर राजधानी ेटा पर कजा कर लिया। कमान के नवाब मीर अहमद यार खान ने जाि के विलय ताव पर हताक्षर करने से इकार कर दिया था। वय मोहमद अली जाि इस दमन पकिया का दिदशन करने ेटा गए। लेकिन गभीर प से वहा बीमार पड गए आर कराची लाट आए। उसी साह उनका निधन हो गया। लूच वाेिह को पाकितान सेना ने कुचल दिया। लूचितान एक बार फिर ताजा हो गया, जब पिछले दिनों शम अल शेख में पाक धानमी गिलानी ने डाटर मनमोहन सिंह के समुख लूचितान का मामला उठाया। उस समय भारत के पधानमी को कलात रियासत के युवा नवाब आर निवासित नेता खान सुलेमान खान ने लदन में २२ जुलाइ २००९ को लदन में अपना वय जारी करते हए कहा कि अब भारत अतराीय तर पर लूचितान में लोकत आर वशासन के लिये हतक्षेप करेगा।

दूसरे निवासित नेता खान वाहिद लोच जो उारी अमेरिका लूच सघ के अयक्ष ह, उहाेेंने माग की कि भारत ने जो गलती भूतकाल में की ह, उसे अब सुधार ले आर लूचों को उनका देश दिला दे। अपने वय में उहोंने माग की कि ऐतिहासिक दरा बोलन से सटे हए लूचितान की भारत उसी कार सहायता करे, जिस तरह से उसने पजाबी शासित पचिमी पाकितानी तानाशाहों के वि बगालियों की सहायता की थी। १९४८ के बाद पाकितान अय थानों की सरकारों को जड मूल से उखाडने में सफल हो गया, लेकिन लूचितान में अब भी वह अपने पाव नहीं जामा सका ह। साराश यह कि लूचितान की सरकार को जिस तरह से जाि ने अपने हथकडों से भग करवाइ वे अब भी पूण प से आमसमपण नहीं कर पाए ह आर पुराने लूचितान को अब वत देश के प में पाकितान के पजे से छुडाना चाहते ह। इसलिये यह प ह कि पाकितान बनाने के समय तकालीन लूच सरकार को जो तोडा गया अब भी वहा की जनता ने उसे वीकार नहीं किया है। या इसका यह अथ नहीं होता ह कि जाि की तानाशाही का खामियाजा अब भी पाक सरकार भुगत रही है। जाि को लोकताकि कहने वाले नेता लूचितान की चली आ रही इस समया में झाक कर यह फसला करें कि उनका नेता कितना लोकताकि आर कितना वतता का पोषक था।

पाकितान के निमाण के समय पजाब में भी मुलिम लीग की सरकार नहीं थी। उस समय वहा युनियनिट पार्टी की सरकार थी। जाि को चिंता लग गइ कि कहीं युनियनिट के पास वतता के पचात सरकार चली गइ तब या होगा। यदि उहोंने वय को वत घोषित कर दिया तो फिर उहे वहा भी लडाइ लडनी पडेगी। इसलिये तकालीन पजाब के धानमी खिजर हयात खान तिवान को हटाया जाना बहत आवयक था। उन दिनों पजाब में हिंदुआें की बडी सया थी, इसलिये जाि को यह भय हो गया कि पजाब ने कभी पाकितान में विलय से इकार कर दिया आर अपनी सरकार को वत इकाइ का वप दान कर दिया फिर तो बाजी उनके हाथों से निकल जाएगी। इसलिये सबसे पहले तो खिजर हयात खान के हाथों से सरकार निकलनी चाहिए आर पजाब में युनियनिट पार्टी की सरकार भग होकर वहा मुलिम लीग की सरकार बननी चाहिये।

इसलिये जाि आर उनके चेले हयात खान के वि भरपूर ताकत से आदोलन ारभ कर दिया। इस य को निकट से निहालने वाले जगनाथ शमा जो इन दिनों कु के निकट भुतर में रहते ह, उहोंने कहा कि आज जो नेता जाि को समझदार आर लोकताकि नेता कह रहे ह, काश वे उस समय के यों को देखते जब लीगी गुडे साइकिलों पर टोलियों में आते आर खिजर हयात खान की सरकार में बठे लोगों को अपनी हिंसा का शिकार बनाते।

गली आर मोहों में जाि के गुडे घूमते आर नारे लगाते थे पजाब बनेगा पाकितान। अतत खिजर हयात खान ने इतीफा दे दिया। तब लीगियों ने नारा लगाया था, नइ खबर आइ ह खिजर साडा भाइ ए। यानी अब यह समाचार मिला ह कि खिजर ने घुटने टेक दिये आर अब हमारे साथ शामिल हो गया ह। इसलिये जो आज जाि की शसा करते हए नहीं थक रहे ह, उहें बडे कद का नेता बतला रहे ह, वे इन घटनाआें पर विचार करें आर इस बात के लिये आममथन करें कि जाि कितना साालोलुप य था ? उसने किस तरह से जनता की चुनी हइ सरकारों का खून किया।

सरहदी सूबे की कहानी तो इससे भी अधिक शमनाक ह, योंकि उस समय वहा कागेस की सरकार थी। सरहदी गाधी खान अदुल गफार खान गाधीजी के कटटर अनुयाइ थे। उनके भाइ डाटर खान उस समय फटियर के धानमी थे। वे नहीं चाहते थे कि वे अपनी सरकार का विलय जिना की मुलिम लीग में करें। सरहदी गाधी ने तो यहा तक कह दिया था कि महामा जी हम आजीवन आपके साथ रहे, अब इन भेडियों के समुख हमको यों फेंकते हो ? यह तो बतला दो कि हमारा अपराध या ह ? यदि भारतीय सघ में फटियर का विलय नहीं हो सकता ह, तो फिर हम आजाद पतुनितान कायम कर लेंगे, लेकिन किसी भी हालात में जाि जसे डिटेटर आर अहकारी के साथ नहीं जाएगे। लेकिन तकालीन कागेस आर गाधीजी ने कोइ साथ नहीं दिया आर लाचार होकर फटियर पर मुलिम लीग ने डाका डाल दिया।

इस तरह से वहा भी जाि की लीग का झडा फहराने लगा। उस समय भारतीय कागेस का यह तक था कि हजारों मील दूर का कोइ हिसा भारत का अग किस कार बन सकता ह ? तब डाटर गाधी का कहना था कि हजारों मील दूर पचिमी पाकितान से पूर्वी पाकितान बन सकता ह, तो भारत का भाग सरहदी सूबे में यों नहीं बन सकता ? सरहदी गाधी ने उसके पचात लाल कुर्ती दल बना लिया था। जब इदिरा जी के समय कागेस के शतादी समारोह के अवसर पर खान अदुल गफार खान भारत आए थे, तो विमान तल से दीि नगर की ओर जाने वाली सडक पर इस दल के कुछ वयसेवक लाल कुता पहने खडे अपने यि नेता का अभिवादन कर रहे थे। खान साहब या सोच रहे होंगे उस समय के कागेसी नेता आर जाि के उस मानस के बारे में जिसने एक अहिंसक पठान की बात को शिरोधाय नहीं किया।

सिंघ में मुलिम लीग की सरकार थी। वहा के धानमी अलाबश नामक एक रावादी मुलिम थे। इसके बावजूद वे सिंध का विलय पाकितान में न करके उसे सिंधु देश बनाना चाहते थे। उहोंने तक दिया कि सिंध की जनता पाकितान बनाना नहीं चाहती ह। अलाबश का विरोध जवाहरलाल जी ने भी किया। जनमत का पता लगाने के लिये नेह ने मालाना आजाद के नेतव में एक आयोग थापित कर दिया। इस आयोग के एकमा सदय मालाना साहब थे। उहोंने नेह के इशारे पर एक प में अपनी रपट दे दी, जिसमें लिखा था सिंधी जनता सिंधु देश नहीं बनाना चाहती। बाद में जाि ने अलाबश की हया करवा दी। इसलिये जाि कितना तानाशाही आर करवादी था, इन घटनाआें से प हो जाता ह। जाि को देशभ, उदारवादी आर लोकताकि कहने वाले भारतीय नेता विचार करें कि मुलिम लीग का यह नेता पाकितान में लोकत का सबसे बडा कातिल था।

सपक : ०९८१९१८६८६६

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