युवाआेके सहारे विकास की डोर
वर्तमान में भारत की अनुमानित आबादी १२२ अरब के लगभग है। इसमें करीब ७५ कऱोड लोग १५ से ५९ वर्ष आयु वर्ग के होंगे। ये सभी लोग देश की कार्यशील जनसंख्या में शामिल हैं, यह आबादी देश की विशाल श्रमशक्ति को भी प्रदर्शित करती है।
इस श्रमशक्ति में करीब ३४ कऱोड यानी ४५ फीसदी की आयु १५ से ३० वर्ष के बीच होगी और यह ऐसा वर्ग है, जिसमें सृजनात्मकता की चरम क्षमता होती है। वर्ष २०१५ तक देश की आबादी ब़ढकर १३ अरब हो जाएगी तब कामकाजी वर्ग की आबादी ८१२ कऱोड होगी और इसमें ३६ कऱोड लोगों की आयु १५ से ३० वर्ष के बीच होगी। युवाआें की यह विशाल संख्या देश के विकास के नए आयाम स्थापित करने में सक्षम है।
युवाआें की यह संख्या देश के आर्थिक और राजनीतिक परिदृश्य को बदलने के लिए पर्याप्त है। अर्थव्यवस्था में श्रमशक्ति सर्वाधिक महत्वपूर्ण होती है, तो देश में आने वाले पांच वषा]ं के दौरान ६५ कऱोड श्रमिकों की ब़ढोत्तरी संभावित है और इसमें ३३ फीसदी १५ से ३२ वर्ष की आयु के होंगे और इनमें से अधिकांश आधुनिक तकनीकी शिक्षा और कम्प्यूटर के ज्ञान से दक्ष हाेेंगे। इस युवाशक्ति का सकारात्मक उपयोग देश को नई ऊंचाईयां दे सकता है। यह वर्ग अपने अंग्रेजी ज्ञान की बदौलत साफ्टवेयर और बीपीओ के जरिए काफी मात्रा में रोजगार और विदेशी मुद्रा को देश में लाने में सक्षम हो सकेगा। विधि और शिक्षा के क्षेत्र में भारतीय मेधा का आज सारी दुनिया में डंका बज रहा है, जो कि आने वाले पांच सालों में और उन्नति करेगा। भारत के प्रतिष्ठित शिक्षा संस्थानों से प़ढकर निकले युवाआें की सारी दुनिया में मांग है। बायोटेक्नोलॉजी जैसे विज्ञान के नवीन क्षेत्र में भी भारतीय युवा अपने ज्ञान का परचम लहराने के लिए तैयार हैं। भारतीय उद्योगों को भी पर्याप्त मात्रा में श्रम शक्ति मिलेगी जो उत्पादकता और विकास को गति देगी। यह युवा प़ीढी वित्तीय रूप से भी साक्षर होगी, जिससे देश में बचत की संभावनाएं और उसके सदुपयोग की प्रवृत्ति ब़ढेगी, सामाजिक सुरक्षा योजनाआें जैसे पेंशन, बीमा और चिकित्सा व्यवस्था के मामलों में भी लोगों की सरकार की ओर मुंह ताकने की प्रवृत्ति में कमी आएगी। सही मायने में विश्व में इतनी ब़डी संख्या में युवा शक्ति और किसी देश के पास शायद ही हो?
यह युवा प़ीढी निश्चित रूप से देश में कार्यशैली में भी परिवर्तन लाएगी, क्योंकि युवा उत्साही होते हैं, निरपेक्ष होते हैं और परिवर्तन के अनुगामी होते हैं। देश में युवाआें की ब़ढती संख्या राजनीतिक व्यवस्था को परिवर्तित कर देगी। आज देश भर में जनता नौकरशाहों और झूठे थके हारे थुलथुल नेताआें के भ्रष्ट और घमंडी व्यवहार से त्रस्त है और एक ही झटके में इन्हें सत्ता से बाहर फेंकना चाहती है। देश में यह परिवर्तन लोकतांत्रिक प्रक्रिया द्वारा ही आएगा, इसके लिए जरूरी है कि अधिक से अधिक संख्या में युवा राजनीति में सक्रिय हो, जैसा कि २००९ के राष्ट्रीय आम चुनावों में देखने को मिला है कि जनता ने जहां भी मौका मिला है, वहां युवा नेतृत्व को ही स्वीकारा है। वास्तव में देश में युवाआें की ब़ढती संख्या २०१४ के आम चुनावों में युवा भारत को नया आकार देगी और देश की विधायिका में ज्ञानशक्ति से युक्त युवाशक्ति का परचम होगा।
भविष्य में देश का युवा वर्ग तो पोंगापंथी नेताआें को बिल्कुल भी नहीं स्वीकारेगा, क्योंकि उसका तेज इनकी बासीं बातें सुनने को तैयार नहीं है। ऐसा पिछले दिनों देखने आया जब देश का एक युवा नेता विश्वविद्यालयों के परिसरों में गया तो युवाआें ने हाथों हाथ लिया और युवाशक्ति के गठज़ोड से भयभीत नेताआें ने इसमें अडंगे डाले विश्वविद्यालयों के प्रशासकों को ऐसे कार्यक्रमों को अनुमति देने से रोका उन्हें फटकारा। वास्तव में यह रोक युवाशक्ति के प्रवाह को नहीं रोक पाएगी। इन नेताआें में अगर युवाआें को रोकने की क्षमता है, तो इन्हें भी विश्वविद्यालय परिसरों में जाकर अपनी बात रखना चाहिए। निश्चित रूप से इनकी पोंगापंथी की बातें युवाआें को बिल्कुल नहीं रोक पाएंगी।
भविष्य युवाआें का है और जो भविष्य युवाआें का होगा, वही देश का होगा। व्यवस्थापक युवाशक्ति का सदुपयोग कर लें तो देश का भला होगा और अगर उनका शोषण होता रहा तो शक्ति का प्रवाह विनाश को भी आमंत्रित करता है। अभी मप्र के एक सरकारी कॉलेज ने कम्प्यूटर विषय के प्रोफेसर का विज्ञापन निकाला जिसका मासिक वेतन होगा मात्र २५०० रुपए ! यह युवा शक्ति के शोषण की पराकाष्ठा है और भावी प़ीढी को ज्ञान से वंचित रखने की साजिश भी।
