प्रदंमंत्री का सतुलन साधने काप्रयास
प्रदमंत्री डा मनमोहन सिंह ने इस सोमवार को अपने आवास पर कुछ मीडिया सवादकों के साथ बातचीत करते हए देश की तमाम वलत समयाओं पर अपना विचार तुत किया आर अपना ख पट किया। जसा कि उनका वभाव है, वह समयाआें को वीकार करते है, किंतु समया के कारणों को नजरदाज करते हए उसके आहिताआहिता धय के साथ समाधान की बात करते है। वह अपनी बात कहते हए भी यह पूरा यान रखते ह कि जिस पर वह टिपणी कर रहे है, वह भी उनसे नाराज न हो। चीन आर पाकितान को लेकर पदा हइ तखी उनके शदों में साफ दिखायी पडी, लेकिन उहोंने किसी के खिलाफ कोइ उगली उठाने की कोशिश नहीं की। चीन के बारे में उहोंने यह वीकार किया कि वह दक्षिण एशिया में पाव फलाना चाहता ह आर पाकितान को भारत के वि ेरित करके एक तरह का सतुलन बनाये रखना चाहता ह। लेकिन इसके तिकार की उनके पास कोइ योजना नहीं थी। उहोंने केवल इतना कहा कि इसके ति हमें लगातार सतक रहना चाहिए आर इस सचाइ से इनकार नहीं करना चाहिए। उहोंने कहा कि मेरा मानना है कि भारत आर चीन के पास परपर तिपधा आर सहयोग दोनों के लिए पयात बडा ससार उपलध ह। यह कहते हए शायद उनका आशय यह था कि चीन के भारत विरोधी कदमों का मुकाबला करते हए हमें उसके साथ सहयोग का यास भी करते रहना चाहिए।
ऐसा ही उनका कुछ कहना पाकितान के ति भी था। वह पाकितान की भारत विरोधी टिपणियों तथा कारगुजारियों के बावजूद उसके साथ सहयोग की सभावनाआें की तलाश जारी रखना चाहतेे है। कमीर समया के समाधान के यनों के बारे में चचा करते हए उनका कहना था कि म कोइ जादूगर नहीं ह कि अपनी हट से समाधान का खरगोश निकाल कर सामने रख दू। कमीर की समया हो या भारतपाक की, उहें पूरे धय व सयम से उसका समाधान निकालना पडेगा। चीनपाकितान गठजोड को भी उहोंने पश किया। चीन के राटपति ह जिताआें व धानमी जियाबाओ तथा अय नेताआें के साथ अपनी पिछली मुलाकातों का हवाला देते हए उहोंने कहा कि मने यह महसूस किया कि चीन भारत के साथ अटके पडे मसलों को हल करने का इछुक है। लेकिन यह कुछ कर पाएगा, इसमें सदेह ह। वतमान चीनी नेतव केवल दो वषा] के लिए आर ह। चीन की नइ पीढी में एक नये तरह की गमता आ गयी है। कहा नहीं जा सकता कि नये नेतव की सोच किस तरह की होगी। इसलिए महवपूण यह ह कि हम किसी भी थिति के लिए तयार रहें। इसके विपरीत पाकितान के ति उनका याल था कि इलामाबाद में काेेइ भी थिति हो, यानी वहा कोइ भी नेता यों न हो, लेकिन हमें उसके साथ बातचीत जारी रखनी ह। बातचीत एकमा ऐसा राता है कि आप अपना असतोष या अपनी शिकायतें सीधे उसके तिनिधियों के सामने रख सकते ह। उहोंने साथ में यह भी पट किया कि यपि उनका विचार हर थिति में पाकितान के साथ बातचीत जारी रखने का ह, किंतु सरकार देश की आम जनता की भावनाआें का भी समान करती ह। इस आम जनता की भावना को देखते हए ही भारत ने २६ नवबर की घटना के बाद पाकितान के साथ चल रही बातचीत को तोड दिया था। हमने सोचा था कि पाकितान पर इसका कुछ दबाव पडेगा तथा वह भारत की चिंताआें की तरफ यान देगा। लेकिन जब यह यास सफल नहीं हआ तो, हमने पाकितान के धानमी गिलानी के साथ थिपू में हइ मुलाकात के समय बातचीत फिर शु करने का ताव किया।
उहोंनेे राटमडल खेलों की तयारियों में हए भारी विलब तथा भटाचार से जुडे नों से भी कनी काटने की कोशिश नहीं की। उहोंने वीकार किया कि उसमें गडबडिया हइ ह, भारी विलब भी हआ है, लेकिन अब इतनी देर हो चुकी हैकि सरकार के पास इसके अलावा आर कोइ चारा नहीं कि जसे भी हो सके, यह सुनिचित करे कि खेल ठीकठाक ढग से निपट जाए आर देश को बदनामी से बचाया जा सके। सरकारी त में भटाचार को वीकार करने में भी उहोंने सकोच नहीं किया आर माना कि केवल एक नियामक (रेगुलेटर) की नियुति करके विभिन विभागों की कायणाली में इमानदारी व पारदशिता सुनिचित नहीं की जा सकती।
धानमी ने सरकारी अनाज भडारों में अनाज की बरबादी के सदभ में सर्वो यायालय की टिपणी आर उस पर सरकार की तिकिया का जिक आने पर मीडिया के तिनिधियों के मायम से यायपालिका को सलाह दी कि वह सरकार के नीतिगत मामलों में हतक्षेप करने से बाज आए। उहोंने कहा कि सरकार सर्वोच यायालय का समान करती है, उससे कोइ टकराव नहीं चाहती। वह बबाद होते अनाज पर की गयी उसकी टिपणी के पीछे उपथित उसकी सदभावना का भी आदर करती है, लेकिन उसके गरीबों में मुत अनाज बाटने के आदेश का पालन नहीं कर सकती। धानमी का कहना था कि देश की ३७ तिशत जनसया गरीबी रेखा के नीचे (बीपीएल वग) है। उसे मुत अनाज नहीं बाटा जा सकता। धानमी की यह सलाह सही है, किंतु कषि मी ने अनाज की बबादी को भी जायज ठहराते हए जो तक दिये है, उहें किसी भी तरह वीकार नहीं किया जा सकता।
धानमी जी की निचय ही इसके लिए सराहना की जा सकती कि वह शासन की गलतियों को वीकार करने से नहीं हिचकते, लेकिन अफसोस की बात यही है कि उनमें थितियों को बदलने का सघषशीलता का घोर अभाव है। यह थिति शायद इसलिए है कि वह साा का नेतव जर कर रहे है, लेकिन देश का राजनीतिक व भावनामक नेतव उनमें निहित नहीं है।
