नेता खुशहाल जनता बदहाल
बिहार के भागलपुर ससदीय क्षे से भारतीय जनता पार्टी के सासद एव पूव केींय मी शाहनवाज खा ने पिछले दिनों रमजान के पवि माके पर अपने दीि थित निवास पर रोजा इतार पार्टी आयोजित की। इस भय व आलीशान दावत में धानमी मनमोहन सिंह, लालकण आडवाणी, सुषमा वराज, अण जेटली, लालू साद यादव, मुलायम सिंह यादव, रामविलास पासवान तथा आर कइ केीय मयाेिं, पूव केींय मयाेिं, सासदों तथा कइ जानेमाने राजनेताआें ने भाग लिया। फशन का प धारण कर चुकी इस इतार पार्टी को देखकर यह कतइ नहीं कहा जा सकता था कि यह आयोजन बिहार जसे पिछडे व गरीब राय के किसी जनतिनिधि ारा आयोजित किया जा रहा है। पार्टी का लुफ उठा रहे तथा इस अवसरो का राजनतिक वातालाप के लिए योग कर रहे बिहार के मुख नेताआें के हावभाव को देखकर भी यह कतइ नहीं कहा जा सकता था कि यह किसी पिछडे व बदहाल राय के नेतागण है। इस पार्टी के एक आर विशेषता यह रही कि इसमें भाजपा से अधिक कागेसी नेता शामिल होते नजर आए। अब इसका राजनतिक महव अथवा मकसद या ह, यह तो भविय ही तय करेगा, परतु फिलहाल इतना तो सोचा ही जा सकता है कि भाजपा नेता शाहनवाज खा ने इस पावन अवसर पर आखिरकार उन नेताआें के आमति करने की जहमत यों की जिन पर उनकी पार्टी ‘सेकुलरिट ’ होने तथा तुकिरण की राजनीति करने जसे आरोप मढती रहती है ?
बहरहाल आइये उस बिहार राय की जमीनी हकीकत से ब होने की कोशिश करते जहा का सासद दीि में बठकर एक पाच सितारा आयोजन करता ह तथा बिहार के अय दलों के जनतिनिधि भी उस कायकम में शरीक होते ह। शीघ ही यह बदनसीब राय एक बार फिर विधानसभा चुनावों का सामना करने जा रहा ह। राय में वही राजनतिक दल सकिय है, जिनसे हम सभी बखूबी वाकिफ ह। अथात सााढ जनता दल यूनाइटेड जिसके अयक्ष शरद यादव ह तथा इसी दल के मुख नेता नीतीश कुमार वय को ‘विकास बाबू’ कहलाने में अयत आनद की अनुभूति करते ह। राय में साा की दूसरी भागीदार ह भारतीय जनता पाटी। भाजपा की पताका बिहार में सुशील मोदी के हाथों में ह आर इस समय वह राय गठन बधन सरकार के उपमुयमी भी ह। इनके अलावा राीय या बकि अतराीय याति ा लालू साद यादव की पार्टी राटीय जनता दल, रामविलास पासवान की लोकजनश पार्टी आर इन सबके अलावा देश की सबसे बडी राजनतिक पार्टी कागेस भी इस राय में राजनतिक प से पूरी तरह सकिय ह। कागेस पार्टी बावजूद इसके कि देश का सबसे ाचीन राजनतिक सगठन ह तथा तमाम विघटन एव उतारचढाव के बावजूद इाेफाक से आज भी सबसे अधिक सासदों के साथ केींय साा का सबसे बडा घटक भी ह, परतु दुभायवश बिहार के नाम आते ही यही कागेस पार्टी उस राय में नेतव विहीन सी दिखाइ देने लगी ह। सोनिया गाधी तथा राहल गाधी के तमाम यासों के बावजूद बिहार राय के पार्टी के लिए कोइ ऐसा मजबूत व गावर नेता नहीं मिल पा रहा है, जिस पर राय की जनता विवास कर सके।
उधर दूसरी ओर लगभग दो दशकों तक बिहार में राज कर चुकी लालू यादव की आभा अब फीकी पडती जा रही ह । उनके बोलचाल का विशेष बिहारी लहजा व खास अदाज जिसे उनके विरोधी लालू का मसखरापन कहा करते थे, अब बिहार के जनता के मय भी उनकी वह सभी अदाए बेनकाब हो चुकी है। यहा तक कि बिहार अपसयक मतदाता भी अब यह कहने लगा है कि लालू यादव ने लालकण आडवाणी की रथ याा को बाधित कर उहें गिरतार करने के सिवा बिहार के विकास के लिए आर कुछ किया ही नहीं । हा इतना जरी है कि उनके शासनकाल में विकास के नाम पर तमाम योजनाए कागजों पर अवय शु की गइ आर इहीं योजनाआें के नाम पर उनके साथियों, सहयोगियों तथा योजनाकारों ने दोनों हाथों से खूब बदर बाट भी की। परिणामवप कागजी विकास तो हए परतु धरातलीय विकास नदारद रहे। जाहिर ह बहसय मतदाता हो या अपसय, लालू यादव की पान चबाकर उनके विशेष अदाज में बिहारी भाषा बोलने की अदा देखदेख कर उहें आखिर कब तक वोट देते रहेंगे। बिहारी आम जनता अब यह महसूस करने लगी ह कि जीने के लिए तथा आगे बढने के लिए विकासोमुख योजनाआें का धरातल पर होना तो बहरहाल जरी ही ह।
देश की जनता की इसी नज को अब लगभग येक राय के नेता पहचानने लगे ह। शायद नीतीश कुमार भी। अयथा न जाने यह मतदाता कब किस नेता को यह कह बठे कि विकास नहीं तो गी छोडो। तभी नीतीश कुमार ने वाय व शिक्षा जसी बुनियादी जरतो के क्षे में कइ सराहनीय योजनाआें की शुआत की है। उनके इन विकासोमुख कदमों को काफी समथन भी मिल रहा ह। वय कागेस नेता राहल गाधी भी राय के विकास को लेकर उनकी तारीफ कर चुके है। यदि विव बक की एक रिपोट पर विवास कि जाए तो उसके अनुसार बिहार के विशेष पहचान दिलाने के मुयमी के यासों को राय से बाहर यापक वीकति मिल रही है। आगे यही रिपोट यहा तक कहती ह कि कारोबार करने के लिए बिहार के राजधानी पटना मुबइ से भी बेहतर है। वय सकिय योजना आयोग के उपायक्ष मोटेक सिंह का यह मानना ह कि पिछले कुछ वषा] से बिहार ने आथिक क्षे में अछी गति की ह। माइकोसाट मुख तथा विव सि उाेगपति बिल गेटस ने भी पिछले दिनों बिहार का दारा किया था। उसके पचात उनका यह कहना था कि बिहार अब वह बिहार नहीं जो पहले हआ करता था। अब सडकें दिखती है, योजनाए नजर आती ह तथा खतरनाक बीमारियों से बचाने वाले टीके भी लोगों को लग रहे ह। आइये अब लगे हाथों बिल गेटस के उपरो कथन का छोटा सा पोटमाटम किया जाए।
बेशक बिल गेटस ने जो कहा वह काफी हद तक ऐसा कहा जसा उहोंने देखा या उहें दिखाया गया। बिहार में इस समय निचित प से कइ क्षेाें में कहीं ६ लेन तो कहीं ४ लेन के राीय राजमाग बन रहे है। गारतलब कि राीय राजमागा] के निमाण से नीतीश कुमार की सरकार का कोइ लेनादेना नहीं ह। चूकि यह राीय राजमाग बिहार में बनाए जा रहे ह, इसका श्रेय नीतीश कुमार वय भी ले लेते ह तथा जनता भी उहें इसका श्रेय आसानी से दे देती है। वाय सबधी कइ योजनाए सरकारी अपतालों में लागू होने की खबरें तो जर ह, परतु दरभगा व मुजफरपुर यहा तक कि राजधानी पटना जसे राय के मुख शहरों के सडकों व सही डेनेज सिटम न होने के चलते वहा की जाम पडी बदबूदार व मछरों के पालने वाली नालियों व गों पर नजर डालिए तो आपको यह पता चल जाएगा कि इस राय में उपचार होने के बाद अधिक सया में मरीज वाय लाभ उठा रहे है या इन गदगियों के परिणाम वप वथ लोग अधिक बीमार पड रहे है। अफसोस तो इस बात का ह कि उपरो शहरों में गदे नाले के ऊपर ही रोटिया व सजिया बनाइ, बेची व खाइ जा रही है ।
कीचड व धूल मीि से सने हए समोसे, पकोडे, मिठाइया आदि खुलेआम लगभग पूरे राय में बिक रहे ह। न इन बेचने व खाने वालों को कोइ जागक करने वाला ह, नहीं इनका कोइ चालन करने वाला। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी ह कि यदि आपकी वाय सबधी योजनाआें से १० ययाेिं का फायदा हो भी गया तथा दूसरी ओर गे व नाले के बदबूदार भराव तथा की हइ नालियों के कारण सकडों नए लोग बीमार पड गए फिर आखिर यह अनुपात विकास की ओर इशारा करता ह या तबाही व बबादी का नजारा पेश करता ह। रहा सवाल चमचमाती नइ सडकों का तो, निचित प से हाइवे पर याा करने वालों के लिए यह एक बडी कायापलट ह ,जो बिहार में वत भारत में शायद पहले बार देखी जा रही है।
कुल मिलाकर बिहार में विकास की शुआत जर हो चुके है। चाहे वह पूव रापति एपीजे अदुल कलाम के उस आान से जिसमें उहोंने रापति के प में यह कहा था कि हरित काति की शुआत अब बिहार से की जानी चाहिए या फिर विकास बाबू नीतीश कुमार के यासों से, परतु जब तक राय में भाचार, रिवतखोरी, जातिवाद, सादायिकता तथा अराजकता का वातावरण समा नहीं होता, तब तक राय की जनता यू ही बदहाल नजर आती रहेगी तथा इसी बदहाल जनता के नुमाइदे हमेशा की तरह खुशहाल व सप दिखाइ देते रहेंगे।
