युवाआे को राजनीति से ज़ुडने का राहुल का आह्वान
कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने अपनी पुणे यात्रा केदौरान विभिन्न कॉलेजों से इकट्ठे हुए करीब १२०० युवा छात्रछात्राआें को संबोधित करते हुए राजनीति और शिक्षा के अवसर पर विस्तार से चर्चा की। युवाआ की इस सभा में पत्रकारों के आने की मनाही थी, इसलिए राहुल ने अपने इन युवा श्रोताआें से काफी खुलकर बातचीत की। राहुल वास्तव में देश की युवा शक्ति को संगठित करने के अभियान पर हैं। उनका इरादा अधिक से अधिक युवाआें को राजनीति में दीक्षित करने तथा कांग्रेस की युवा शाखा नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन) में शामिल करने का है।
उन्होंने राजनीति के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह देश के भविष्य का निर्धारण करने वाली अकेली सबसे ब़डी शक्ति है। वास्तव में हम सबका पूरा जीवन ही राजनीति पर निर्भर है। हमारे सांसद व विधायक जो फैसले करते हैं, उसी से हमारी जिंदगी परिभाषित होती है। राजनीति के माध्यम से व्यक्ति किसी भी क्षेत्र में प्रवेश कर सकता हैैै। उनका संदेश था कि छात्रोंयुवाआें का राजनीति से दूर रहना ठीक नहीं। यदि हमें अपने समाज को बदलना है, उसे आगे ले जाना है, यह राजनीति के बिना संभव नहीं है। इसके लिए राजनीति सबसे ब़डा और सबसे अधिक प्रभावशाली उपकरण है। यह समाज के प्रत्येक वर्ग को एक साथ लाने का भी सर्वाधिक महत्वपूर्ण साधन है।
उन्होंने शिक्षा की समानता के संदर्भ में कहा कि इसके लिए शिक्षा के अवसर का विस्तार करना होगा। शिक्षा का स्तर ब़ढाने के साथ ही अधिक से अधिक लोगों को इसमें शामिल करना सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। लोगों को शिक्षा के माध्यम से ज़ोडना तथा शिक्षा के आधारभूत ढांचे को मजबूत बनाकर ही लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है। यह रोचक है कि राहुल गांधी भी अब दो इंडिया की बातें करने लगे हैं। एक सुशिक्षित, समृद्घ तथा शक्ति संपन्न है और दूसरा अशिक्षित, गरीब तथा दुर्बल है। पहले जब कोई बुद्घिजीवी या विपक्षी नेता इस तरह की बातें करता था, तो कांग्रेस के सत्ताधारी नेता उसका खंंडन करते थे, लेकिन जबसे राहुल ने दो इंडिया की बात शुरू की है, तो कांग्रेस के शीर्ष सत्ताधारी भी उनकी हां में हां, मिलाने लगे हैं। कांग्रेस के संकटमोचक वरिष्ठ नेता प्रणव मुखर्जी ने भी इधर कई बार यह स्वीकार किया कि इस देश में दो देश हैं। राहुल गांधी का कहना था कि हमारा लक्ष्य अगले ३०४० वषा] में इन दोनों इंडियाआें के बीच की खाई को पाटना है।
राहुल गांधी की ये सारी बातें आकर्षक तो हैं, लेकिन कम से कम पुणे के उनके युवा श्रोता इससे बहुत प्रभावित नहीं हुए, क्योंकि राहुल गांधी बातें तो ब़डी अच्छीअच्छी कर रहे हैं, लेकिन उनके कार्यान्वयन की कोई योजना उनके पास नहीं है। जो कुछ वह करना चाहते हैं, उसे उन्हें सभाआें या बैठकों में कहने की जरूरत नहीं, बल्कि कर दिखाने की है। केंद्र में तथा कई राज्यों में उनकी सरकार विद्यमान है। प्रधानमंत्री से लेकर किसी निचले अधिकारी तक जब हर व्यक्ति उनका आदेश मानने के लिए तैयार हो, तो वह कोई भी योजना रातों रात कार्यान्वित कर सकते हैं। इसके लिए कोई संगठन बनाने, रैली करने और प्रेरणास्पद उपदेश देने की कोई जरूरत नहीं है। लेकिन उन्हें तो केवल अपनी पार्टी को मजबूत करना है और अधिक से अधिक लोगों को अपने साथ साथ लाना है। कोलकाता में आयोजित रैली में उन्होंने साफ कहा भी था कि वह युवा कांग्रेस को सही मायनों में देश का एक प्रतिनिधि युवा संगठन बनाने में लगे हैं। वे उन राज्यों में नई इकाइयां गठित करने में लगे है, जहां अभी तक युवा कांग्रेस की इकाइयां नहीं हैं या बहुत कमजोर स्थिति में हैं। उन्होंने तमिलनाडु का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां लोग कहते हैं कि यहां कांग्रेस की युवा इकाई को ख़डा करना संभव नहीं है, लेकिन उन्होंने एक मजबूत इकाई ख़डा करने का दावा किया, जिसमें इस समय ढाई लाख से अधिक सदस्य हैं।
वास्तव में राहुल गांधी की बातों पर विश्वास करना लोगों को इसलिए कठिन लगता है कि इस देश में अधिकांश समय तक कांग्रेस का ही शासन रहा है। उसके नेताआें में समझदारी की कमी रही हो, ऐसा कभी नहीं था, लेकिन आज यदि इस एक देश में दो तरह का देश दिखायी दे रहा है, तो उसकी जिम्मेदारी कांग्रेस की रही है। उसने बातें हमेशा समाजवाद और समानतता की की, लेकिन संरक्षण पूंजीवाद व समाजवाद को दिया। आगे वह बदल जाएगी, इसका किसी को कोई भरोसा नहीं है। फिर भी राहुल गांधी थ़ोडी आशा जगा रहे हैं।
ईरान परमाणु बम बनाने के करीब
वियेना स्थित अंतर्राष्ट्रीय परमाणु निगरानी संस्था आईएइए (अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा संगठन) की एक रिपोर्ट के अनुसार ईरान अब परमाणु बम बनाने की क्षमता अर्जित करने के बस कगार पर ही है। उसके पास कम से कम २२ किलो संवर्धित यूरेनियम ईंधन मौजूद है, जो एक परमाणु बम बनाने के लिए काफी है। परमाणु अस्त्र छ़ोडने लायक मिसाइल उसने पहले ही बना ली है। अब केवल उसे ऐसा परमाणु वार हेड बनाना है, जो मिसाइल के सिरे पर फिट की जा सके। यद्यपि ईरान के पास मौजूद यह २२ किलो यूरेनियम केवल २० प्रतिशत शुद्धता का है, जबकि बम के लिए ९० प्रतिशत शुद्धता वाला यूरेनियम चाहिए, लेकिन २० प्रतिशत शुद्धता वाले यूरेनियम को ९० प्रतिशत शुद्धता के स्तर तक पहुंचाना अपेक्षाकृत आसान काम है।
आईएइए के शस्त्र निरक्षकों ने चेतावनी दी है कि ईरान अब परमाणु अस्त्र निर्माण क्षमता से बहुत दूर नहीं है। डेली टेलीग्राफ में मंगलवार को प्रकाशित एक खबर के अनुसार संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा घोषित प्रतिबंधों तथा इजरायल की चेतावनी की परवाह किये बिना ईरान अपने परमाणु अस्त्र निर्माण कार्यक्रम को आगे ब़ढाने में लगा हुआ है। वह आईएइए द्वारा नियुक्त निरीक्षकों के साथ कतई सहयोग नहीं कर रहा है, जिससे जाहिर है कि उसके परमाणु प्रतिष्ठानों में वही कुछ हो रहा है, जिसको लेकर दुनिया चिंतित है।
ईर्रान की परमाणु अस्त्र क्षमता से सर्वाधिक खतरा इजरायल को महसूस हो रहा है, क्योंकि ईरान के राष्ट्रपति अहमदीनेजाद की यह कई बार दुहराई गयी टिप्पणी है कि इजरायल को धरती पर रहने का कोई अधिकार नहीं है। इसलिए इजरायल, ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों को ध्वस्त करने की तैयारी में बहुत पहले से है। इधर ईरान पर उसके हमले का खतरा कुछ इसलिए टल गया कि अमेरिका का यह आश्वासन आ गया कि ईरान परमाणु बम बनाने से अभी कम से कम एक साल दूर है। लेकिन आईएइए की इस ताजा रिपोर्ट ने सभी को चौंका दिया है। यूरोपीय देशों में जर्मनी, फ्रांस तथा ब्रिटेन की चिंता यह है कि यदि ईरान ने एक भी परमाणु बम बना लिया, तो उसका खतरा ब़ढ जाएगा। इजरायल की चिंता है कि यदि ईरान के पास परमाणु अस्त्र की मारक क्षमता पैदा हो गयी, तो वह उसका पहला इस्तेमाल इजरायल पर ही कर सकता है।
खबर है कि आईएइए की अगली बैठक में इस मसले पर विचार किया जाएगा कि ईरान को परमाणु अस्त्र निर्माण से विरत करने के लिए क्या किया जाए, लेकिन सच्चाई यह है कि अमेरिका व यूरोपीय देशों के पास इसके अलावा और कोई उपाय नहीं बचा है कि वे इजरायल को अपनी कार्रवाई करने की खुली छूट दे दें।
