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क्या कभी सुधरेगी भारतीय पुिलस ?

Swatantra Vaartha  Tue, 19 Jan 2010, IST

क्या कभी सुधरेगी भारतीय पुिलस ?

अभी हाल में जब सोनभ िजले के िजला एव स यायाधीश ने दो इपेटर शामिल १४ पुिलस किमयों को झूठे इनकाउटर के लिये आजम कारावास की सजा सुनायी तो वहा उपथित पुिलसकर्मी तो जर तध रह गये, पर वहा माजूद जनता इसका जन मना रही थी। यह एक घटना ही काफी ह, इस बात को साबित करने के िलए की १८६१ में िबटिश राज ारा बनाये गये भारतीय पुलिस एट पर आज भी सामायवाद की मानिसकता पर काम करती भारतीय पुिलस, िजसका िक अतिव जनता के रक्षक का होना चािहए, आम जनता से िकतनी दूर जा चुकीहै ।

भारतीय मीडिया की सराहना करनी होगी की १४ वष की िचका के साथ १९ वष पहले छेडछाड करने वाले हिरयाणा के सबसे विर पुिलस अधिकारी पूव डीजीपी एसपीएस राठार का सफेदपोश चेहरा आज सारे देश के सामने बेनकाब हो गया ह। हमारे राठार साहब तब सिफ आइजी के ओहदे पर पदासीन थे। १९९३ में जब चिका ने इस छेडछाड की शिकायत को वापस लेने से इकार कर दिया तो राठार साहब ने उसके भाइ को झूठे केसो में फसा कर उसके पिता को जान से मारने की धमकिया देकर एव वय चिका को इसके कूल से निलबित कराकर पूरे परिवार को ही उजाड दिया। बेचारी चिका ने तो खुदकुशी कर ली, पर हमारे राठार साहब का काम उनके राजनीतिक आकाआें को इतना पसद आया कि उहें पदोति पर पदोति मिलती रही आर वह डीजी पी बन गये। उहें पुलिस मेडल से भी नवाजा गया।

राजथान के एक डीआइजी ओहदे के वरि पुलिस अधिकारी ‘टडन’ साहब ने करीब दस वष पहले अपने अदली की पनी का ही बलाकार कर दिया। उसके बाद से वह फरार हो गये ह आर आज तक राजथान की पुलिस को यह पता नहीं लग पाया ह कि वह कहा ह। वह बात दूसरी ह कि इस बीच उहोंने राजथान में ही अपनी कइ जमीनों के लाट बेचे ह। उडीसा में एक डीजीपी ओहदे के वरि अधिकारी के पु राजथान में एक विदेशी लडकी का बलाकार करते ह। उनको अदालत से ७ वषा] की सजा हो जाती ह। हमारे डीजीपी साहब अपने रसूख का इतेमाल करते हए अपने पु को परोल पर कुछ दिनों के लिए बाहर निकालते ह, फिर उसे भगावा देते ह। इस घटना को घटे २ वष ६ माह हो चुके ह, पर अभी तक हमारी पुलिस को उनका पता नहीं लग पाया ह। अभी मुबइ में नये साल का जन मनाते मुबइ पुलिस के पाच अधिकारी इसलिये निलबित किये गये ह, योंकि वह एक अडरवड के डान की पार्टी में थिरक रहे थे। बदकिमती से उनके चेहरे मीडिया ने अपने कमरो में कद कर लिए।

जाहिर ह कि भारतीय पुलिस की छवि देश में अछी नहीं ह। अभी हाल में एक विवयाति ा भारतीय एनजीओ ने एक सूची जारी की ह, जिसमें कहा गया ह कि हम भारतीय हर वष २१०६८ करोड पये घूस देते ह। भारत को विव का ८४ वा सबसे भ देश पाया गया ह आर भारत के अदर सबसे भ सगठन भारतीय पुलिस पायी गयी ह। भारत के सविधान में रायों के अदर कानून आर यवथा की जिमेदारी राय सरकारों की ह। यह सच ह कि राय सरकारें अपनी राय पुलिस को कानून आर यवथा थापित करने के नाम पर अपनी निजी सेना के प में इतेमाल करती ह। राजनेताआें आर पुलिस के बीच चोली दामन का गठबधन ह।

भारतीय राय पुलिस आज भी अगेजों ारा १८६१ में बनाये गये पुलिस एट पर काम कर रही ह। वष २००७ में सोली सोहराबजी समिति ने नया पुलिस कानून भारत सरकार को साप दिया ह। दो वषा] के बाद भी भारत सरकार ने यह विधेयक हमारी ससद में अभी तक पारित नहीं किया ह। वष २००६ में भारतीय सर्वो यायालय ने एक जनहित याचिका के मेनजर राय सरकारों को एक पूरा खाका दिया था पुलिस सुधारों का, जो कि उहें लागू करना था। इस आदेश के अनुसार राय सरकारों आर के सरकार को एक राय सुरक्षा आयोग थापित करना था, जहा कि अगर किसी पुलिस अफसर को गलत राजनीतिक हम मिलता ह, तो वह अपनी शिकायत दज करा सकता ह। पुलिसकमियों के मोशन, पोटिग आर काय निधारण के लिये पुलिस थापना बोड गठित होना था। इसपेटर ओहदे से ऊपर हर अधिकारी को कम से कम एक पद पर दो वषा] की अवधि तक अनिवाय नियु का ावधान था। अपराध विवेचना आर कानून यवथा को अलग किया जाना था। पुलिस शिकायत ाधिकरण गठित होना था, जहा की आम जनता पुलिस के खिलाफ अपने ऊपर हए अयाचार की शिकायत दज करा सकती ह।

सुीम कोट ारा रायों के दिये हए पुलिस सुधार के इस आदेश को तीन वष से ऊपर हो चुके ह। केद सरकार ने तो इहें पिछले वष दीि आर बाकी के शासित देशों में लागू कर दिया ह, पर राय सरकारें इसको लागू करने में दुनिया भर के रोडे अटका रही ह। जाहिर ह कि जब तक जनता आर मीडिया वय इसके लिये जागक नहीं होते ह, हमारे राजनेता इन सुधारों को पूणत लागू नहीं होने देंगे।

चिका करण के बाद भारतीय कानून मी साहब ने एलान किया ह कि बहत जद कानून में बदलाव आ रहा ह, जिसमे की थाने में आने वाली हर शिकायत को पुलिस को एफआइ आर के प में दज करना

अनिवाय हो जायेगा। यही नहीं गलत सूचना या रपट दज कराने वाले पर दस वष तक का कारावास भी हो सकता ।

अगर यह लागू हो जाता ह, तो इसमें कोइ भी दो राय नहीं ह कि पुलिस भाचार में इससे काफी लगाम लगेगी। अब चूकी हर अपराध की रिपोट वादी की जुबानी दज होगी अत पुलिस इसकी धाराआें में फेर बदल या सज्ञेय अपराध को हके में बनाकर या फिर एफआइआर दज ही न करके हाथ नहीं झटक पायेगी। पसों का लेन देन कम हो जायेगा। झूठी एफ आइ आर दडित होगी अत लिखाने वाले को भी सोचना पडेगा। इसके साथ यह भी जरी ह कि जो पुलिस विवेचना अधिकारी जानबूझ कर केस को खराब करते ह, उन पर भी गाज गिरे। हर जज साहब पर यह लाजमी होना चाहिए कि वह अपने जजमेंट में टिपणी करें की विवेचना अधिकारी ने विवेचना आर तहकीकात कसी की ह ? जज साहब की नकारामक टिपणी की पुलिस थापना बोड जाच करें आर विवेचना अधिकार को उचित दड मिले। अगर हमें देश को बढती अपराधिक अराजकता से बचाना ह, तो यह सुधार तुरत लागू करने होंगे।

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