अफसरी ढर्रे में राजनीित
पिचम बगाल आर आध देश दोनों महव के बडे राय है। इन दोनों में आइबी के पूव अफसरों को डामनमोहन िसंह ने रायपाल बनाया है । यह बात इसका माण ह कि कागेस ने नाकरशाहों ारा चलने वाली नाकरशाहों की खातिर एक नाकरशाह सरकार चलवाइ हइ ह। एक मायने में कागेस दुचक में फसी हइ है ।
विपक्ष योंकि अपने कारणों से बबादहै , इसलिए कागेस सफल है । इस सफलता के चलते वह भविय के लिए जसा अराजनतिक तानाबाना बुन रही ह, उससे उसकी सफलता थाइ नहीं बनेगी। डामनमोहन सिंह ने पूरा ढरा अफसरी बनाया ह। सरकार राजनतिक सोच से नहीं, बकि अफसरी फाइलों से चल रही ह। आध देश मे गडबडझाला डामनमोहन सिंह आर पी चिदबरम की नाकरशाही एाेच से हआआर उसका समाधान भी ये अफसरी रायपाल के बूते सोच रहे ह। एक व था, जब उारपूव के रायों में अफसरी बकगाउड के लोग इस सोच में रायपाल बनाए जाते थे, ताकि उनसे अलगाववादी आदोलनों की कें को फीडबक मिले। उारपूव के रायों में अफसरी रायपालों का एक लाभ था।
मगर डामनमोहन सरकार में उार देश से लेकर पचिम बगाल आर आध देश में रिटायर पुलिस अफसरों को रायपाल बनाया ह। इएसअल नरसिंहन ने यूरोकेटिक अदाज में आध देश पर ऐसे जेंटशेन दिए जिससे चिदबरम आर डामनमोहन सिंह ने यह उमीद पाली कि इस रिटायर बाबू से आध देश का राजनतिक समाधान निकलेगा। लेकिन अफसरशाही से इसका उटा भी हो सकता ह। राजनतिक समया को राजनतिक कमान के जरिए राजनतिक सूझबूझ से निपटाया जा सकता ह।
बाबुआें ारा बाबुआें के लिए
डामनमोहन सिंह का राज बाबुइ ह, इसके माण में अनगिनत बातें गिनाइ जा सकती ह। जसे चीनी सकट ह। महगाइ ह। सबसे बडी बात यह तय ह कि सरकार में राजनेता बेमतलब ह आर अफसरों की पाबारह ह। यह जानने के लिए अपने को दिमाग पर जोर देना होगा कि किस सचिव के रिटायर होने के बाद उसकी वापस पोटींग नहीं हइ। ७०७० साल के रिटायर अफसरों के बूते सरकार चल रही ह। कोइ सचिव रिटायर हआ तो उसे फिर दो साल का एसटेंशन मिला आर वापस पाचपाच साल की चेयरमनशीप मिली ह। एक तरफ सोनिया गाधी, अहमद पटेल, जनादन वेिदी, मोहसीना किदवइ सहित पूरी कागेस लीडरशीप ह। दूसरी तरफ डामनमोहन सिंह, उनके मुख सचिव टीएके नायर की अफसरी टीम ह, जो हर मामले में अफसरशाही को मोट कर रही ह।
कागेस को अपने किसी नेता को रायपाल बनाने में पसीना बहाना होता ह। शिवराज पाटिल, मोहसीना किदवइ या अजुन सिंह जसों को रायपाल बनाने के लिए कागेस मनेजरों को मेहनत करनी होती ह, लेकिन एमके नारायणन, शेखर दा या इएसएल नरसिंहन आराम से रायपाल बन जाते ह। सरसरी निगाह में देखे तो आज पचिम बगाल, आध देश, उार देश जसे तीन बडे रायों में रिटायर पुलिस अफसर रायपाल ह। फिर दिली के पुलिस कमिनर रहे निखिल कुमार भी रायपाल ह, तो शेखर दा, एनएन वोरा, वामीकी साद, तेजेदर खा, जनरल सिंह, मुशाहारी की लबी अफसरी रायपालों की लिट ह। आगे की कतार में भी टीएके नायर, बीके चतुर्वेदी सहित कइ अफसर ह आर बेचारे कागेसी मुह ताक रहे ह।
अफसरों की चादी
डामनमोहन सिंह के सेटअप में अफसरों का बोलबाला ही वह वजह ह, जिससे रिटायर हआ हर बडा सचिव वापस नाकरी पा जाता ह। अपने को सचमुच ऐसा नाम याद नहीं आता ह,जो कबिनेट सचिव या किसी बडे मालय से रिटायर हआ हो आर उसे वापस नाकरी नहीं मिली हो। बीके चतुर्वेदी योजना आयोग के सदय ह। सीबीआइ से रिटायर विजयशकर आर गह मालय से रिटायर वी के दुगल केंराय सबध आयोग के सदय बने हए ह। एल मानसिंह पेटोलियम गस ाधिकरण के तो एसवी भावे नागरिक उयन ाधिकरण के चेयरमन ह। पीके मिश्रा, विजय सिंह यूपीएससी के सदय ह। विनिता राय शासनिक सुधार आयोग की सदय तो याम शरण, सतीश लाबा विदेश मालय से रिटायर होने के बाद लाइमेट आर अफगानितान के वाताकार बने हए ह।
आइबी के रिटायर डायरेटर या तो रायपाल ह या गोरखालड जसे मसलों में वाताकार ह। इस तरह की सभी पोटीग मे सचिव तर या रायमी तर की सुविधाए मिल जाती ह। मनमोहन सरकार में एक आर कमाल हआ पडा ह। खाटी राजनीतिज्ञों को महव नहीं ह, लेकिन टेनोकेट के नाम पर लोगों को कबिनेट या रायमी तर मिला हआ ह। जसे सम पािदा या नदन निलकर्णी, मोंतेक सिंह को कबिनेट मी का दजा ह, वहीं टीएके नायर, रगराजन जसे कइ लोग रायमी का दजा लिए हए ह। सुधार के नाम पर जितने ाधिकरण आर आयोग बन रहे ह, उन सभी में रिटायर आइएएस आर आइपीएस चेयरमन या सदय के प में एडजट हए ह। आरटीआइ के तहत यह सूचना मागना दिलचप होगा कि मनमोहन सरकार में ६० साल से ऊपर कितने रिटायर आइएएस आर आइपीएस अफसरों को नाकरी मिली आर कितने सावजनिक जीवन के लोगों या नेताआें को पद मिला ?
तब आर अब
याद करें इदिरा गाधी, राजीव गाधी, नरसिंहराव, अटल बिहारी वाजपेयी की सरकारों को। इन धानमयाेिं के कबिनेट में कितने आर कसे दिगज मी हआ करते थे। इदिरा गाधी के व चान, वण सिंह, कमलापति पािठी, नरसिंहराव, णव मुखर्जी, मोहन धारिया, ललित मोहन मिश्र, देवराज अस, बनद रेी जसे मी हआ करते थे। मतलब कबिनेट मयाेिं का अथ राजनीति में मरे खपे, लोगों की नज पर पकड रखने वाले जमीनी नेता का हआ करता था।
डामनमोहन सिंह के आज के कबिनेट में वसे मी कितने ह ? ले देकर अकेले सिफ णव मुखर्जी। अयथा एसएम कणा, चिदबरम, वीरपा मोइली, एके एथोनी, रमेश जयराम, आनद शमा, कपिल सिबल, सलमान खुशीद, सीपी जोशी का बुनियादी मिजाज अराजनतिक ह। मनमोहन सरकार के य कम के नहीं, बकि भाय के मी ह। अपनी जगह सही ह कि इनके भाय को मानना होगा। डामनमोहन सिंह आर उनके मयाेिं का भाय ह, जो अपने पाव कुहाडी मारते विपक्ष ने इस बाबुइ सरकार की कला को चढाया हआ ह।
अमेठी का उदाहरण
बेहाल विपक्ष आर भ
ाय की बदालत कागेस की चढती कला में नाकरशाही एाेच से कुछ नहीं बन सकता ह, इसका माइको लेवल का एक उदाहरण उार देश में विधान परिषद के ताजा चुनाव ह। मायावती ने भरपूर राजनीति की । तमाम हथकडे अपनाए। समाजवादी पार्टी आर कागेस दोनों का सफाया हआ। इस सफाए में अमेठी की हार राहल गाधी को निजी झटका ह। विधान परिषद की यह सीट अमेठी आर सुतानपुर को मिलाकर बनी हइ ह। कोइ २८०० वोट ह। इनमें से ९०० वोट राहल गाधी के अमेठी क्षे के ह। राहल गाधी ने खुद उमीदवार तय किया। तिनिधियों की मीटिंग की। हिसाब से उनका चुना उमीदवार जगदीश सिंह सटीक था। मगर राहल गाधी के अमेठीरायबरेली के सेटअप में ही ऐसी अराजनतिक गडबड ह कि कागेस जीत ही नहीं सकती थी।
अमेठी रायबरेली दो ऐसे क्षे ह, जहा के मामले में सलाह देने की हिमत दिविजय सिंह या रीता बहगुणा जसे खाटी पार्टी नेता भी नहीं रखते ह। यहा सब कुछ सतीश शमा के व उनके पीए रहे किशोरी ने सभाला हआ ह। किशोरी या कि राहल गाधी की टीम की इलाके में राजनतिक पकड की ऐसी खराब थिति ह कि अमेठी क्षे के ९०० वोटों में से सा वोट भी कागेस को नहीं पडे। राहल गाधी के अपने क्षे में इतनी कमजोर पकड ह आर इसकी मूल वजह राहल गाधी की कनिक सिंह, किशोरी आदि की एनजीओअफसरी छाप टीम ह। किसी का यह कहना सही ह कि यदि अमेठी में मुलायम सिह यादव अपना उमीदवार उतार दे, तो राहल गाधी को लोकसभा सीट जीतने के लिए पसीना बहाना होगा। उार देश में फिर यह माणित हआ ह कि कागेस आर राहल गाधी को हाडकोर राजनीति करनी होगी। बाबुइ अदाज वाली हवा हवाइ राजनीति से कागेस की ठोस बुनियाद नहीं बननी ह।
आगे के अवसर
सवाल ह कागेस का माजूदा जलवा या थाइ बनेगा ? अपना मानना ह कागेस दुचक में फसी हइ ह। कागेस की चढती कला सिफ विपक्ष की दुदशा की वजह से ह। कागेस के जलवे में ८० फीसदी योगदान बेहाल विपक्ष का ह। बाकी २० फीसदी में कागेस की परपरागत खूबिया ह। सदेह नहीं कि राहल गाधी खूब मेहनत कर रहे ह। उनकी सजीदगी आर सहजता की एक छाप ह। पर यह छाप उस थिति में जीरो ह, जब विपक्ष तगडा हो। राहल गाधी आर कागेस दोनों के लिए बिहार आर उार देश निणायक साबित होने ह। हिसाब से कागेस को दोनों देशों में अछा परफाम करना चाहिए। लेकिन जो झारखड में हआ ह, वसा कहीं बिहार आर उार देश में नहीं हो जाए, इसके खतरे ह।
राहल गाधी की झारखड रणनीति में नाकरशाह मिजाज के रायपाल शकर नारायणन का अहम रोल था। इस रणनीति को चिदबरम का बकअप था। मगर कागेस को सफलता नहीं मिली। दरअसल राहल गाधी की शुआत में एनजीओ आर अफसरी असर वाली कायशली के जो बीज पडे ह, उसके कागेस को बहत खतरे ह। राहल गाधी आर उनकी टीम की बनावट राजनतिक कम आर अफसरी अधिक ह। इसलिए उसे डामनमोहन सिंह आर उनकी टीम आदश वाली लगती ह। राहल गाधी को इस विलेषण को समझने की कभी जरत नहीं हइ कि कसे इदिरा गाधी ने राजनतिक काशल से इतना लबा राज किया आर कसे राजीव गाधी की चार सा से यादा सीटो का बहमत अण सिंह, अण नेह, मणिशकर अयर की अराजनतिक टीम की बदालत पाच साल में बबाद हआ।
