ADVERTISEMENT

आपका वोट

क्या राहुल गांधी भ्रष्टाचार खत्म करेंगे?

  • सही
  • गलत
  • पता नहीं
और भी

फोटो दीर्घा

Share

सरकारी स्तर की शमनाक लापरवाही का नमूना

Swatantra Vaartha  Tue, 26 Jan 2010, IST

सरकारी स्तर की शमनाक लापरवाही का नमूना

सरकारी मशीनरी कसे कामकाज करती है, इसका एक अछा उदाहरण केींय मिहला एव िशशु िवकास मालय का वह िवज्ञापन है, जो इस समय राटीय चचा का विषय बना हआ है। रिववार को ‘नेशनल गल चाइड डे’ पर मालयारा जारी अगेजी के एक िवज्ञापन में धानमी डा मनमोहन िसंह, कागेस अयक्ष सोिनया गाधी तथा देश के लोकिय िसतारों किपल देव, वीरें सहवाग तथा अमजद अली खान के साथ केींय थान पर एक सनिक अधिकारी का चि छपा ह।

यह सनिक अधिकारी कोइ भारतीय सय अधिकारी नहीं, बकि पाकितान के पूव वायु सेनायक्ष तनवर अहमद का ह, जो २००६ से २००९ तक इस पद पर थे। कोइ भी इस विज्ञापन को देखकर चकित हो सकता ह कि इसमें पूव पाकितानी सेनायक्ष की फोटो छापने का या आचिय ह। या यह भी ‘अमन की आशा’ का कोइ नमूना तो नहीं ह। आचय की बात यह ह कि इस विज्ञापन को जारी करने वाले विभाग की मी कणा तीरथ को इसे लेकर कतइ शमिदा नहीं ह। उनका कहना ह कि इस विज्ञापन का सदेश महवपूण ह, इसमें छपे चि नहीं। चि तो मा तीक ह। अब इन मी जी को कान बताये कि तीक किसी भी सदेश से अधिक महवपूण होते ह, योंकि वे ही सदेश के असली सवाहक होते ह। शुक ह कि इस शमनाक भूल पर धानमी कायालय ने सबसे पहले यान दिया आर उसने तकाल इस पर क्षमायाचना सदेश जारी किया, लेकिन सबसे अहम सवाल ह कि यह विज्ञापन छपा कसे ?

खबर ह कि मालय ने इस विज्ञापन को बनाने के लिए किसी बाहरी एजेंसी की सेवा ली थी। यह पता नहीं कि इसके लिए बाहरी एजेंसी की सेवा यों ली गयी, जबकि कें सरकार के पास इस काम के लिए विशेषज्ञों की एक पूरी फाज ह। य एव श्रय चार विभाग (डीएवीपी) जसा सगठन ह, जो ऐसे विज्ञापन तयार करता ह आर काशन के लिए जारी करता ह। फिर किसी विज्ञापन के बनने आर काशन हेतु जारी किये जाने के पूव उसे कम से कम चार तरों से गुजरना होता ह। मी जी ने खुद इसे न देखा हो, ऐसा भी नहीं हो सकता। बाहर से यह विज्ञापन तयार करने का निणय उनका ही रहा होगा। किसी नीचे के यति का निणय होगा, तो भी उसने उनकी वीकति अवय ली होगी। सवाल ह कि किसी तर पर या किसी ने यह नहीं देखा कि सनिक अधिकारी के प में किस यति की फोटो छप रही ह। विवास नहीं होता कि इस विज्ञापन को पास करने वालों की पूरी श्रखला ही टिहीनों की थी। विज्ञापन निमाण तथा उसे वीकति के तरों के पास उसे जारी करने वाले सथान डीएवीपी ने भी उसे नहीं देखा। डीएवीपी के अधिकारियों का कहना ह कि जब वे वय कोइ विज्ञापन तयार करते ह, तो देखते ह कि किसकी फोटो लग रही ह या किसकी नहीं, लेकिन यदि ऊपर से बना बनाया विज्ञापन आता ह, तो उसे वे सीधे जारी कर देते ह। इसके बाद अब किससे अपेक्षा की जा सकती ह कि वह किसी विज्ञापन में यह देखेगा कि उसमें किसकी फोटो छप रही ह।

आज की थिति में भारतपाक सबध किस तरह के चल रहे ह, यह किसी को बताने की जरत नहीं ह, ऐसे में यह अनुमान लगाया जा सकता ह कि ऐसे विज्ञापन पर उहें देखने वालों की या तिकिया हइ होगी। एक तो यह विज्ञापन वय में ही हायापद ह, ऊपर से इस तरह का फोटो चयन।

यदि यह भूलवश लगी तो भी अक्षय ह आर यदि किसी सोच के तहत इसे लगाया गया, तो वह आर भी अक्षय ह। धानमी कायालय ने इसकी जाच का आदेश दिया ह, लेकिन इस जाच से कुछ होने वाला नहीं ह, योंकि इस जाच में गलती की वातविक जिमेदारी निधारित ही नहीं हो सकती। यादा से यादा वह बाहरी एजेंसी ‘लक लिटेड’ हो जाएगी, जिसने यह विज्ञापन तयार किया ह। जबकि ऐसी भूल को जाने देने की जिमेदारी वय मी महोदया तक जाती ह। यह पूरे विभाग के कामकाज की शली मेें यात लापरवाही की ाेतक ह। कोइ भी जाच कमेटी कम से कम मी महोदया को तो इसकी दोषी नहीं ही ठहराएगी। इसलिए बिना किसी जाच पडताल के ही देश को यह समझ लेना चाहिए कि सरकारी कामकाज का यही ढरा ह, जिसमें अपने निजी फायदेनुकसान के बाहर किसी भी मामले में सतकता या गभीरता से नजर रखने की कोइ जरत नहीं रहती।

सीमा पर पाकितानी सुरगे

खबर ह कि पाकितान पजाब ात के सरगोधा जिले में कइ विशाल सुरगे बना रहा ह। ये सुरगे भारतीय सीमा से बहत दूर नहीं ह। अनुमान लगाया जा रहा ह कि इन सुरगों में पाकितान अपने परमाणु अ थापित करने वाला ह। इन सुरगों की खबर ‘गूगल आइ’ के अलावा अतरिक्ष के भारतीय उपगहों से भी मिली ह। ये सुरगें किसी सडक की ओर नहीं जाती, जिससे यह समझा जा सके कि इसका कोइ नागरिक उपयोग हो सकता ह।

सरगोधा लाहार से पचिम में थित पाकितान का सबसे महवपूण सनिक अडडा तथा विकसित हथियारों का भडार ह। यह उसकी वायुसेना की सेंटल कमान का मुयालय ह। यहा कइ ऐसे भूगभ अ भडार पहले से ही ह, जहा चीन एम११ जसी मिसाइलें तथा अमेरिकी एफ१६ लडाकू विमानों को रखा गया ह। सरगोधा पाकितान का वह सनिक अडडा ह, जहा पाकितानी सय अधिकारियों को शिक्षण देने के लिए चीनी सय अधिकारी आते रहते ह।

सरगोधा के सनिक विकास में अमेरिका की भी काफी बडी भूमिका रही ह। उसने यहा एशिया का पहला बम निरोधी भूमिगत राडार कें थापित किया था, जिसका पाकितान ने १९६५ के यु में भारत के वि भरपूर इतेमाल किया था। अब सरगोधा पाकितानी परमाणु आें का शायद सबसे बडा भडार ह। यहा परमाणु आें के अलग अलग खडों का भडारण किया गया ह।

यह कहा जा सकता ह कि उपयुत सुरगें सरगोधा के परमाणु अ भडारों की सुरक्षा की किसी योजना के तहत बनायी जा सकती ह, किंतु यदि ऐसा होता, तो इसकी सूचना भारत को दी जानी चाहिए थी, किंतु न तो पाकितान आर न ही अमेरिका ने इसकी कोइ सूचना भारत को दी। यह सही ह कि सरगोधा के परमाणु अ भडारों के लिए अलकायदा के आतकवादियों की तरफ से खतरा ह, लेकिन उसकी सुरक्षा का यन कोइ गोपनीय कायकम नहीं हो सकता। इसलिए यदि पाकितान की तरफ से इसकी कोइ सूचना नहीं दी गयी ह, तो पट ह कि ये सुरगें किसी गोपनीय सनिक कायकम के तहत ही बनायी जा रही ह।

पाकितान अपनी सीमा के भीतर किसी तरह का कोइ निमाण कर सकता ह। वह सनिक हो या असनिक। इसका उसे पूरा अधिकार ह, लेकिन सीमा के निकटवर्ती क्षेाें में वह कोइ सदिध निमाण काय करता ह, तो इससे भारत सरकार को उसके ति सतक अवय हो जाना चाहिए। भारतपाक सबध इन दिनों जिस तरह कटु से कटुतर होते जा रहे ह, उसमें कभी भी कुछ भी हो सकता ह। इसलिए जरी ह कि सय गुतचर काय में लगी एजेंसिया सतक रहें तथा हमारे खोजी उपगह सीमावर्ती पाकितानी क्षे पर अपनी नजर गडाए रखें। पाकितान एक नितात धोखेबाज पडोसी ह, जिसकी तरफ से कभी भी निचित नहीं रहा जा सकता।

आपकी राय