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राजनीित को अपराध मुकत करने की िचंता

Swatantra Vaartha  Thu, 28 Jan 2010, IST

राजनीित को अपराध मुकत करने की िचंता

भारतीय गणत की 60 वीं वषगाठ के पूव िदवस पर भारतीय चुनाव आयोग का हीरक जयती समारोह आयोजित िकया गया, िजसमें देश के तमाम शीष राजनीितक नेता उपिथत थे। राटपित प्रितब पाटिल ने इसका उदघाटन िकया, िजसमें उपराटपित हािमद असारी, धानमी डा मनमोहन िसंह, कागेस अयक्ष सोनिया गाधी, विपक्ष की नेता सुषमा वराज सहित साा पक्ष आर विपक्ष की अछी भागीदारी िदखायी दे रही थी। इस समारोह में सवाधिक उलेखनीय बात थी कि यहा दोनों पक्षों के नेता इस बात पर एकमत थे कि देश की राजनीति का तर सुधारा जाना चाहिए तथा उसे अपराधीकरण से मुत करने का यास किया जाना चािहए।

सभी ने ाय: एक वर में चुनाव आयोग की भूिमका की सराहना की तथा उसे देश के लोकत का एक अयत महवपूण तभ बताया। नेताआें का कहना था कि देश का बडे से बडा नेता चुनाव आयोग से डरता ह, यह उसकी शति आर सफलता का सबसे बडा राज ह।

समारोह में बोलते हए सोनिया गाधी ने राजनीित में अपराधीकरण को रोकने का मामला काफी गभीरता से उठाया। यह न उनके लिखित भाषण में शामिल था, इसका मतलब है िक उनका सुविचारित मुददा था। उहोंने इस मुे पर आम सहमति का आवान किया कि आपराधिक पठभूमि के लोगों को चुनाव में शामिल न होने दिया जाए। उनका साफ कहना था कि चुनावों में धनबल व बाहबल की भूमिका रोकने के िलए आपराधिक रिकाड वाले लोगों को चुनाव लडने से रोकना आवयक ह। लोकसभा में नेता विपक्ष तथा भाजपा नेी सुषमा वराज ने सोनिया गाधी का समथन किया आर राजनीति को अपराध मुत करने के लिए ठोस उपाय करने की आवयकता पर बल िदया।

यहा यह उलेख करना रोचक होगा कि लोकसभा में ऐसे सवाधिक सासद भाजपा व कागेस में ही है , जिनके ऊपर कोइ न कोइ आपराधिक मामला अदालतों में चल रहा ह। लोकसभा के १५३ यानी लगभग एक तिहाइ सदय ऐसे है , जिन पर आपराधिक मामले दज ह आर इनमें भी ४७ ऐसे ह, जिन पर हया व डकती जसे गभीर आरोप ह। इनमें सवाधिक सदय वे ह, जो भाजपा के टिकट पर चुन के आए ह, लेकिन कागेस भी उससे कुछ अधिक पीछे नहीं ह। भाजपा के ४३ ऐसे सदय ह, जिनमें से १९ पर गभीर आरोप ह आर कागेस के खेमे में ४१ ह, जिनमें से १२ पर गभीर मामले दज ह। अब इससे अनुमान लगाया जा सकता ह कि राजनीति के अपराधीकरण के लिए कान राजनीतिक दल सवाधिक दोषीहै ।

राजनीति को अपराध मुत करने की बात कोइ पहली बार नहीं उठी ह। इसके पहले भी जाने कितनी बार कितने ही मचों से इसका आवान किया जा चुका ह, लेकिन अब तक इसे यवहार में लाने की कोशिश नहीं की गयी। योंकि चुनाव लडते वत येक राजनीतिक दल अधिक से अधिक सीटें हथियाना चाहता ह, जिसके लिए उसे ऐसे उमीदवार की जरत रहती ह, जो विपक्षी उमीदवार को पराजित करके अपनी जीत सुनिचित कर सके। इसलिए हर पार्टी की ाथमिकता रहती ह कि किसी ऐसे दबग तथा पसे वाले को उमीदवार बनाया जाए, जिसे इलाके में लोग पहले से जानते हों। साा के लिए सासदों या विधायकों की सया महवपूण होतीहै , उनकी योयता व पविता नहीं। इसलिए हर पार्टी टिकट देने में ऐसे सभी थानों पर धनबलियों या बाहबलियों को ाथमिकता देती ह, जहा उसका पहले से कोइ लोकयि नेता नहीं रहता। चुनाव जब दूर हों, तो हर पार्टी मूयों की, साितों की तथा राजनीति में वछता की बात करती ह, लेकिन मुकाबलों का समय आने पर वह सब कुछ भूलकर जसे भी सभव हो, चुनाव जीतने का म अपनाने लगती है ।

इस समारोह में धानमी डा मनमोहन सिंह ने एक आर चिंता यत की। उनकी पीडा थी कि समाज के श्रेठ मतिक राजनीति की तरफ आकषित नहीं होते। राजनीति केवल धनी व ताकतवर लोगों का अखाडा बन गयी ह। इसमें धनशति में कमजोर वग के लिए कोइ अवसर नहीं रह गया ह। उहोंने इस बात पर भी चिंता यत की कि राजनीतिक दलों में इस तरह की कोइ सहमति नहीं हो पा रही ह कि गरीब आदमी को भी चुनाव लडने का अवसर मिल सके।

वातव में ये सारी चिंताए आर सारे सकप इस समारोह तक ही रह जाएगे। इन पर आगे कोइ फसला हो जाएगा यह सोचना भी कठिन है , योंकि इसके लिए देश के पूरे राजनीतिक ढाचे को बदलना होगा। आज देश के इन मुख राजनीतिक दलों में भी आतरिक लोकत नाम की कोइ चीज नहीं रह गयी ह। ऐसे में वाभिमानी, चरिवान श्रेठ मतिक वहा अपने लिए जगह कसे बना सकता है । फिर भी देश के गणताकि जीवन के ६० वष पूरे होने के अवसर पर इस तरह की चचा वगातयोयहै । कम से कम देश के राजनेता इसके बारे में सोचते तो ह कि राजनीति को धनबल व बाहबल से मुत होना चाहिए तथा धनहीनों को भी इसमें अवसर मिलना चाहिए।

तालिबान से बातचीत का यन

इताबूल में होने जा रही शिखर बठक में पाकितान व अफगानितान के नेता आतकवादियों के खिलाफ लडाइ में आर घनिठ सहयोग के उपायों पर विचार करने वाले ह, लेकिन जसी कि खबर ह, उनकी बातचीत का मुय एजेंडा यह ह कि या कुछ तालिबान नेताआें से बातचीत की सभावना बना सकती ह, जिससे कि उहें हिंसा छोडकर राजनीति की मुयधारा की तरफ आकषित किया जा सके। यह अमेरिकी राटपति ओबामा की इस नीति के तहत उठाया जा रहा कदम ह कि अलकायदा से बहत निकटता न रखने वाले तालिबान नेताआें को अलग करने की कोशिश की जाए। ओबामा के अनुसार कुछ कटटरपथी तालिबान हो सकते, तो कुछ उदारवादी। जो उदारवादी ह, उहें यदि बातचीत ारा कटटरपथियों से अलग किया जा सके, तो इससे एक तो लडाकू आतकवादियों की शति कम होगी, दूसरे उनके पाहा बदलने से लोकताकि शतिया मजबूत होंगी।

शायद इस कोशिश के अतगत ही काबुल थित सयुत राटसघ मिशन के तिनिधि अफगान सरकार के नेताआें से मिलकर इस बात पर विचारविमश किया कि सयुत राट सुरक्षा परिषद ारा आतकवादी घोषित तालिबान नेताआें की सूची में से कुछ वरिठ नेताआें के नाम हटा दिये जाए। फिलहाल तालिबान के तिबधित नामों की सूची में मुला मुहमद उमर सहित १४४ के नाम ह। इसी तरह सुरक्षा परिषद ने अलकायदा के तिबधित नामों की सूची में २५७ के नाम शामिल कर रखाहै । ओबामा की यह कोशिश कितनी सफल होगी, इसके बारे में तो कुछ नहीं कहा जा सकता, लेकिन इससे इतना तो पट ह ही कि वह तालिबान के खिलाफ पट जीत की आशा छोड चुके ह आर कूटनीतिक उपायों से किसी तरह ऐसी थिति कायम करना चाहते ह, जिससे अमेरिकी सेनाआें के अफगानितान से निकलने का राता तयार हो सके।

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