मुकत व्यापार अब रग लाया है
नबे के दशक में देश में ववीकरण को लेकर भारी िववाद उठा था। िवषय था िक डलूटीओ सिध पर हमें हताक्षर करना चािहये अथवा नहीं। डलूटीओ के चार पमुख अग हयापार, िनवेश, किष एव पेटेट। अमीर देश चाहते थे कि यापार, िनवेश आर कषि को पूणतया खोल िदया जाये आर पेटेंट कानून को सत बना िदया जाये। कागेस मुयत पचिमी देशों से एकमत थी। भाजपा खुले यापार का समथन िकंतु िनवेश, कषि को समिलित करने एव पेटेंट कानून को सत बनाने का िवरोध करती थी।
वामपथी सभी मुददों पर डलूटीओ का विरोध करते थे। कागेस ने भाजपा एव वामपथियों के विरोध के बावजूद डलूटीओ सधि का हताक्षर कर दिये थे। परतु हमारी सरकार ारा पचिमी एजेंडों को लागू करने के बावजूद दूसरे देशों ारा सफल विरोध के कारण अमीर देशों का एजेंडा पूरी तरह लागू नहीं हो सका। केवल यापार को खोलने एव पेटेंट कानूून को सत करने के ाविधान वीकार किये गये। निवेश आर कषि यापार को खोलने के अमीर देशों के यास सफल नहीं हए। फलवप पिछले १५ वषा] में विव अथयवथा का प हमारे पक्ष में मुडाहै ।
विव यापार में वह देश सफल होता है ह, जो माल को राता बनाता है । माल को सता बनाने में श्रम की महवपूण भूमिका होती है । अमेरिका में कुशल श्रमिक की एक दिन की मजदूरी लगभग २५,००० पये ह, जबिक भारत में ४०० पये। ऐसे में अमेरिकी कपनियो एव काल सेंटरों में लागत यादा आती है । अतएव सते माल की खोज में अमेरिकी कपिनया भारत आर चीन से माल तथा सेवाआें का आयात कर रही है । जनरल मोटस जसी कपनिया डेटाइट में कारखाने बद कर रही ह । अमीर देशों के श्रमिक बेरोजगारी की कगार पर ह। यही अमीर देशों के वतमान सकट का मूल कारण है ।
डलूटीओ में पेटेंट कानून शामिल किये जाने से अमीर देशों को कुछ लाभ अवय हआ ह। जस ेिपछले दशक में माइकोसाट कपनी के मािलक िबल गेटस विव के सबसे अमीर य बन गये। आपने पेटेंट कानून की आड में विंडोज साटवेयर को महगा बेचा आर भारी लाभ कमाये। परतु पिछले दशक में नये हाइटेक माल की खोज नहीं हइ। दवा कपनियों के लाभ दबाव में ह चूकि नइ दवाआें का आविकार धीमी गति से हो रहा है । अमीर देशों को पेटेंट से होने वाला लाभ भी यून रहाहै , जबकि यापार से होने वाला घाटा अधिक है ।
खुले यापार से चीन एव भारत का माल अमीर देशों में वेश कर रहा ह। फलत अमीर देशों की अथयवथाए सकट में ह। चूकि अथयवथा में उनका हिसा लगभग ७५ तिशत है , अत उनके सकट ने वविक सकट का प धारण कर लिया है । उनके ारा भारत से आयात कम किया जा रहा है । परिणामवप भारत में उनके सकट का असर मदी के प में पडाहै ।
इस मदी को देखते हए सरकार ने राहत पकेज लागू किया था। पचिमी देशों पर आये सकट के कारण हमारे नियात दबाव में थे। पचिमी बकों ने भारतीय शेयर बाजारों में भारी बिकवाली भी की थी। घरेलू सकट से निबटने के लिये उहें रकम चाहिये थी। पूव में आया हआ विदेशी निवेश वापस जाने लगा था। भारतीय अथयवथा पर पडने वाले इस दुभाव को काटने के लिये सरकार ने कदम उठाये थे। रिजव बक ने याज दरों में कटाती की थी आर वाि मालय ने एसाइज डयटी में। इन कदमों कमोबेश अछा भाव पडाहै । हमारी विकास दर ९ पतिशत से घटकर ६ तिशत पर रह गयी। परतु अब पुन उठने लगी ह। पिछली तिमाही में हमारी विकास दर ८ तिशत पर वापस पहच गयी है ।
इस सुधार को देखते हए सरकार ने राहत पकेज को वापस लेने का मन बनाया ह। यह कदम वागतयोय ह। हमें याद रखना चाहिये कि राहत पकेज का मूय हमें आने वाले समय में चुकाना पडेगा। जिस कार बक से लिये गये ऋण को शीघ चुकाना हितकारी होताहै , वसे ही राहत पकेज को समा करना भी लाभद होगा।
उेरणा पकेज के अतगत याज दरों में कटाती की गयी। बकों के पास ऋण देने की रकम में व की गयी। इस कदम का अथयवथा पर भाव यह पडा कि उमों पर याज का बोझ कुछ कम हो गया ह। उेरणा पकेज के अतगत एसाइज डयूटी में कटोती की गयी ह। इससे भी हमारे उमों को राहत मिली ह। परतु यह कटाती दीघकाल तक जारी नहीं रह सकती ह, योंकि बढे हए सरकारी खचा] के लिये उाराेार अधिक रकम की जरत ह। उेरणा पकेज के अतगत तीसरा कदम सरकारी खचा] में व का था। नरेगा, शिक्षा, सरकारी कमियों के वेतन एव बुनियादी सरचना में सरकारी खचा] में व की गयी ह। इससे जनता के हाथ में कय श में व हइ ह। नियातों में कटाती से घरेलू अथयवथा में जो सुती आयी थी, वह आशिक प से समा हो गयी। मसलन भारत से कार का नियात कम हआ। इहीं कारों को सरकारी कमियों ने खरीद लिया। अत यह कहा जा सकता ह कि मूल प से उेरणा पकेज सफल रहा ह।
परतु यह पालिसी लबे समय में घातक हो जायेगी जसे कुछ समय के लिये पाचक लेना लाभद रहता ह, परतु दीघकाल में यही घातक हो जाता है । कारण यह कि टस की दरों में कटाती करने से सरकार का राजव कम होता ह। साथसाथ सरकारी खचा] में व को भी अधिक रकम की जरत ह। खच आर आय के इस अतर को सरकार ारा नोट छापकर अथवा ऋण लेकर पूरा किया गया ह, जो टिकाऊ नहीं ह। नोट छापने से महगाइ बढती ह। ऋण लेने से सरकार पर भविय में आथिक भार बढता है । अतउेरणा पकेज को दीघकाल तक जारी रखना हानिद होगा।
अतिम आकलन इस कार ह। दीघकाल में वविक मदी हमारे लिये नुकसानदेह नहीं ह। मु यापार के कारण हमारे नियातों में व हो रही ह यही सकट का मूल कारण ह। अमीर देशों से मिलने वाले विदेशी निवेश में जो कटाती हइ ह, उसकी पूति आने वाले समय में दूसरे ाेतों से हो जायेगी । अत दीघकाल में हमारे ऊपर न तो सकट था आर न ही हमें उेरणा पकेज की जरत थी। अपकाल में वविक सकट के हमारे ऊपर दुभाव अवय पडे है । हमारे नियात गिरे है आर हमारा शेयर बाजार टूटा ह। सरकार ारा लागू किये गये उेरणा पकेज से इन दुभावों पर हमने यूनाधिक विजय ा कर ली है । अब हम वथ हो गये है । हमें दवा बद कर देनी चाहिये। उेरणा पकेज तकाल समा कर िदया जाना चाहिये। याज एव टस की दरों को बढाकर अपने पूव सामाय तर पर ले जाना चािहये। सरकारी खचा] की माा में कटाती करके उनकी गुणवाा बढाने पर यान केंित करना चािहये।
सपक : ०९४१११०९७७७
इमेल : लहरीरींक्षऽीरपलहरीपशींलो
