संप्रंग शासन में महगाइ ने तोडी कमर
कागेसनीत सग सरकार को जनता ने िजस िववास के साथ साा पर बठने का अिधकार सापा वतुत सरकार की नीितयों से नहीं लग रहा है िक वह जनता के ति गभीर ह। सरकार ारा जारी आकडों में भारत वविक तर पर तेजी से उभर रहा ह। देश में हर सेटर में दिन दूनी रात चागनी तरी दशायी जा रही ह। भारत की चालू वाि वष में आथिक विकास दर ७८ से लेकर ८ तिशत है । एशियन िवकास बक (एडीबी) का भी यही माननाहै िक भारत की िवकास दर ७ तिशत से कम नहीं होगी, लेकिन तरी के यह आकडे तब बेमानी लगते है , जब जमीन पर महगाइ की मार झेलता आम आदमी अपनी इछा से भरपेट भोजन की थाली भी नहीं खरीद सकता।
सग सरकार के राज में खा पदाथा] ने सभी रिकाड तोड दिए ह। बढी हइ महगाइ ने जसे मयम वग के मािसक बजट की रहीसही कसर पूरी कर दी है । सजी आर अनाज के दाम सातवें आसमान पर पहच गए ह। खाान में २० तिशत व हो चुकी ह। बों की पढाइ भी महगाइ की मार से नहीं बची। साधारण कापी की कीमतों में ३५ ितशत तक इजाफा हआ ह, कितु के सरकार ह कि अपने जादुइ आकडे दिखाने में लगी हइ है । माइनस पर माजूद महगाइ तथा बढती जीडीपी गोथ दिखाकर वह अपनी पीठ थपथपा रही है ।
सरकार मान रही ह कि बढी हइ कीमतें वविक घटना है , लेकिन सच यह ह कि आज देश में खा वतुआें आर आवयक उपादों की कीमतों पर सरकार का कोइ नियण नहीं रह गया ह। बिचालिए, दलाल, सेबाज आर बडे यापारी जमाखोरी कर दाम बढा देते ह। के सरकार फिर उहें कम कराने की मशत करती दिखाइ देती है । इसकी अपेक्षा होना यह चाहिए था कि सरकार का खा वतुआें के यापार में लगे वग पर पहले से भय आर नियण होता ताकि कोइ यापारी अधिक लाभ के लालच में देश की जनता को लूटने से पहले दड के भय से बेेइमानी ही नहीं करता।
अथशाी महगाइ के लिए माग आर आपूति के अतर को दोषी मानते है , कितु यह भारत में बढ रही महगाइ के पीछे का सच कदापि नहीं है । सिफ दालों की यथाथिति देखें तो वष २००८ मे भारत में १४७६ टन तथा २००९ में १४६६ लाख टन दालों का उपादन हआ था। २००८ की तुलना में २००९ बीते एक वष में १ लाख टन की गिरावट आइ। भारतीय अथशायाेिं के अनुसार देश में १७० लाख टन दाल की वाषिक माग ह। यिद इस बात को मान भी लिया जाए िक हमारे अथशाी सही कह रहे है , तब जो शासकीय आकडे ह कि एक वष में केद सरकार ने २५ लाख टन दाल का आयात किया इसे किस प में देखा जाए ? योंकि इस तरह बाजार में १७१६ लाख टन दाल उपलध होनी चाहिए थी। जब माग से यादा आपूति की गइ ह, फिर गत एक वष के अदर कीमतों में दुगने का अतर कसे आ गया? निचित ही यह जमाखोरी आर कालाबाजारी का परिणाम है । इसी तरह अय रोजमरा की आवयक वतुआें में बढोतरी जारी है ।
आज थिति यहा तक आ पहची ह कि पिछले १२ वषा] का रिकाड इस महगाइ ने तोड दिया है । महगाइ की दर १९८३ पर पहच गइ ह। सजियों में जिस तेजी से बढोतरी हइ ह, उसने तो भारतीय मयवर्गीय रसोइ का जायका ही बिगाड कर रख दिया। इस मयवग आर मजदूर वग की हालत यह हो गइहै कि दिन तिदिन बढती महगाइ के कारण आवयक वतुए खरीदने में उहें पसीना आ रहा ह। आलू के दामों में १३२७४ तिशत, याज ४०७५ अय सजियों में ४६७० तिशत तथा दालें ४१६९ तिशत महगी हइ ह। इसी अनुपात में फलों में तेजी आइ है । चीनी ६० पये किलो आर दूध की कीमत २२ पए लीटर से बढकर ३० पए पहच गइ ह। खाान में बाजरा १२, गेह, ९४ आर चावल २ तिशत महगे हए है । थोक मूय पर आधारित अय गर खा वतुआें में भी ८७४ तिशत का इजाफा हआ ह। इसके बावजूद भी सरकार का महगाइ के ति लचीला ख समझ के परे है । के की कागेसनीत सग सरकार के इस ख से यही दशित हो रहा ह कि वह महगाइ के ति गभीर नही।
यही कारण ह कि उसके इस गरजिमेदारी भरे कदम को लेकर िपछले ससद स में िव मालय की ससदीय थाइ सिति मने भी सरकार की कायणाली पर उगली उठाइ थी। समिति ने अपनी रपट में कहा कि सरकार ारा इसे रोकने के लिए जो महवपूण कदम उठाए जाने चाहिए थे, वह उसने अभी तक नहीं उठाए ह। वाि मालय महगाइ पर अकुश लगाने में पूरी तरह विफल रहा है ।
वतमान परिथितियों को देखते हए ऐसा लगने लगा ह कि महगाइ यूपीए सरकार के नियण से बिकुल बाहर हो गइ ह। केवल धानमी डामनमोहन सिंह आर कषि मी के बारबार आने वाले वयों जिनमें वह इस बात की दुहाइ दे रहे ह कि सूखा तथा बढती महगाइ से निपटने के लिए सरकार के पास पया अनाज ह, बकि आयात के लिए जरी विदेशी मुा का भडार भी माजूद ह से अब काम नहीं चलने वाला न यह बताने से की किसानों ने पिछले साल २३ करोड ४० लाख टन खाा का रिकाड उपादन किया था।
सरकार जिसतरह से आम जनता को भरोसा दिला रही ह , उससे देश में तेजी से बढती महगाइ को नही रोका जा सकता ह। के सरकार जिन थाेेक मूय सूचकाक की आड में महगाइ से बचने तथा मुह चुराने का यास कर रही है , वह थोक मूय सूचकाक की पति केवल भारत में अपनाइ गइ है , जिससे उपभाेा को सरकारों ारा भम में रखा जा सके। यूरोप में हाेेलसेल के थान पर रिटेल दर के अनुसार महगाइ का अनुमान लगाया जाता है । भारत में यह पति इसलिए भी अपनाइ गइ है िक यिद महगाइ छपे मूय के अनुसार बतायी जायेगी तो जनता कहीं महगाइ के भय से सरकार के विरोध में आदोलन न कर बठे आर लोकतामक शासन यवथा में इस आदोलन के पिणाम रसे सरकार न चली जाये। केीय वाि मालय का सायिकी विभाग जो आकडे हमारे सामने रखता ह ाय वह इसी कार के होते ह। आज भारत की अथयवथा विव की चाथे नबर की अथयवथा है , कितु तिय आय में यह १३३वें पायदान पर है । यानी आय ा की से १३२ देश भारत की अपेक्षा बेहतर थिति में ह। समय रहते महगाइ पर बेक नहीं लगाया गया तो कागेसनीत सग सरकार को यह बात समझ लेना चाहिए कि आने वाले दिनों में थिति बहत भयकर हो जायेगी।
