अमेिरका िकतना िमत् है हमारा ?
अभी अमिेरकी रक्षामी राबट गेटस साहब भारत आये थे। उनकी इस याा का मुय एजेंडा भारतअमेरिका सामरिक साझेेदारी को आर मजबूत करना था। इधर भारत में पिछले वष के मुबइ हमले के बाद से भारतीय राजनेता भी अमेरिका के चर लगाते रहे ह कि अमेरिका पाकितान पर दबाव बनाए की पाकितान, पाकितान की धरती पर फल फूल रहे आतकवादी सगठन लकरएतयबा पर लगाम लगाए एव २६/११ के हमले में जो पाकितानी नागरिक आर लकरएतयबा के कायकता पाकितान में पकडे गये ह, उन पर पाकितान सती से कायवाही करे।
अमेरिका ने भले ही पाकितान पर दबाव बनाया हो पर पाकितान ने २६/११ के आरोपियों पर कायवाही करने की कोइ भी तपरता नहीं दिखायी ह।
दबाव तो छोडिये, हाल फिलहाल में अमेरिका पाकितान सबधों का यह हाल ह कि पिछले महीने पाकितान में थित अमेरिकी राजदूत ने पाकितान को सीधी सीधी धमकी दी ह कि अगर पाकितान ने पाकितान की धरती पर कायरत अमेरिकी दूतावास के कमचारियों को परेशान करना नहीं छोडा तो पाकितान को १५ लाख डालरों की सालाना सहायता अमेरिका रोक सकता ह।
ज्ञाव हो कि फिलहाल में अमेरिका से नाराज पाकितानी सेना काफी हाथ पर पटक रही ह, चूकि अमेरिका ारा हाल में पारित करीलूगर विधेयक के तहत अब पाकितानी सेना को सारी सय सहायता पाकितान की लोकताकि सरकार के मायम से ही मिलेगी, पहले ही तरह सीधे अमेरिका से नहीं। यही नहीं पाकितानी सेना को इस सनिक सहायता का लेखाजोखा भी रखना पडेगा।
हमें भारत में यह बात अछी तरह समझ लेना चाहिए की हाल फिलहाल का अमेरिकापाकितान मनमुटाव इन दोनों देशों के आपसी वाथा] को लेकर ह। यह अमेरिका का भारत की ओर झान की वजह से नहीं ह। अपने वाथ के चलते अमेरिका कभी भी भारत के हितों को पाकितान के हितों के ऊपर नहीं रखेगा। अमेरिका आर पचिमी देशों का पाकितानी सेना को लेकर सबसे बडा भय यह ह कि अगर पाकितानी सेना, जिसका की वय काफी तालिबानीकरण हो चुका ह, को कुछ हो गया या उसमें भी दरारे पड गयीं आर उसका कोइ धड कटटरपथियो से मिल गया तब पाकितान के परमाणु अ इन जेहादियों के हाथ पड जायेंगे। जिहें कि यह लोग अमेरिका आर पचिमी देशों में उडा देंगे।
पाकितान सेना भी अमेरिका से आधुनिकतम हथियारों की उगाही यही डर दिखा कर करती ह।
अभी हाल में अमेरिका पाकितानी सेना को अपने आतकवाद के खिलाफ वविक यु के चलते १८ अति आधुनिक एफ१६ सी/डी लाक ५२ लडाकू विमान दे रहा ह। पाकितानी वायुसेना में कायरत ३२ एफ१६ लडाकू विमानों को अमेरिका आधुनिक भी बना रहा ह। अमेरिका, पाकितानी सेना को समु पर लबी गत लगाने के लिये अयाधुनिक एटी शिप आर एटी पनडुबी क्षमता रखने वाले पी३ सी ओरियन हवाइ जहाज दे रहा ह।
अमेरिका, पाकितान को हारपून एटी शिप क्षेपा, एआइएम९ एम साइडविंडर हवा से हवा में मारने वाला क्षेपा, टीओडयू२ए टक रोधी क्षेपा, एएच१ एफ ‘कोबरा’ अटक हेलीकाटर, एम १०९ ए ५ भारी मारक क्षमता वाली तोपें एव ‘फलानेस’ समुी लडाकू जहाजों को तोडने वाले क्षेपा दे रहा ह। यह सारे हथियार अयत अयाधुनिक ह आर भारत के पास भी नहीं ह।
एक पाचवी लास में पढने वाला बा भी बता देगा की अफगानितान में जहा ‘तालिबान’ आर ‘अलकायदा’ सकिय ह, वहा न तो समुद ह आर न ही समुी यु पोत या पनडुबिया। इन जेहादियों के पास तो कोइ वायुसेना भी नहीं ह कि पाकितानी सेना को इतने अयाधुनिक आर परमाणु सक्षम एफ१६ लडाकू हवाइ जहाजों की जरत हो। अमेरिका इतना नादान तो नहीं हो सकता की उसे समझ नहीं आ रही ह कि यह सारे हथियार पाकितानी सेना भारत के खिलाफ इतेमाल करेगी ?
यह वही अमेरिका ह,जब चीन एक धुडकी लगाता ह, तो अमेरिकी रापति ओबामा साहब इतने घबडा जाते ह कि वह तिबती धम गु दलाइ लामा से अपनी चीन याा के पहले नहीं मिलते ह। यही नहीं, चूकी चीन को पसद नहीं ह अत अमेरिका ‘ताइवान’ को ऐसे अयाधुनिक हथियार नहीं देता ह, जो कि वह पाकितानी सेना को खुश करने के लिये भारत के खिलाफ दे रहा ह।
हम भारतीयों को यह अछी तरह समझ लेना चाहिए की पाकितानी सेना अछी तरह जानती ह कि अमेरिका का दोहन कसे किया जाए। हाल फिलहाल में जो वह अमेरिका के खिलाफ गुसा दिखा रही ह, वह सिफ अमेरिका को डरा कर उससे आर फायदा उठाने की चाल ह।
बराक ओबामा साहब ने अपने जनरलों की बात मानते हए अफगानितान में ‘तालिबान’ के खिलाफ अपने सनिक अभियान में जो ३०,००० सनिको की बढोतरी की ह, इससे उनकी तिता दाव पर लग गयी ह। ओबामा साहब ने सावजनिक एलान किया हआ ह कि जुलाइ २०११ में अमेरिकी सनिकों की अफगानितान से वापसी शु हो जाएगी।
पाकितानी सेना, जिसकी की शह पर पाकितान की ही धरती से अफगान तालिबान अफगानितान में कायरत अमेरिकी सेना पर घात लगाकर हमले करती रहती ह, अमेरिकी सेना को कभी भी अफगानितान में जीत हासिल नहीं करने देगी। अत में अमेरिका को पाकितान पर ही भरोसा करना पडेगा। पाकितानी सेना अमेरिका आर पचिमी देशों के हितों की देखभाल के लिए अफगानितान में दरोगा का काम करेगी। इसके लिये वह अमेरिका आर पचिमी देशों से आधुनिक हथियार आर पसे वसूलेगी तथा ‘तालिबान’ एव लकरएतयबा जसे आतकी सगठनों की मदद से भारत में जेहाद चलाएगी। अमेरिका आर पचिमी देश अपने वाथ में चुप रहेंगे। हमारे राजनेताआें को समझना होगा कि अपनी सुरक्षा के लिये अमेरिका की बसाखी थामना बहत नादानी होगी। पाकितान आर चीन ने भारत के खिलाफ हाथ मिलाया हआ ह। यह हमारे मि कभी भी नहीं हो सकते ह। अमेरिका हमारा मि तभी तक ह, जब तक उसका उलू सध रहा ह। हम दक्षिण एशिया में अकेले ह आर जुलाइ २०११ के बाद सारा जेहादी खतरा हम झेलेंगे। नितात जरी ह कि हम समय रहते जाग जाए आर अपनी नयी रणनीति इस खतरे से निबटने के लिये बना ले।
