पाक की भारत को काबुल से बाहर करने की कोिशश
पाकितान, भारत को अफगानितान से बाहर करने की हर कोशिश में लगा हआ ह। उसकी इस कोशिश में तुकी उसका नया मददगार देश बन गया ह। इस गुुवार २८ जनवरी को लदन में सभी देशों की शिखर बठक होने जा रही ह, जो किसी भी तरह अफगानितान के पुननिमाण तथा वहा थिरता कायम करने के यास में लगे हए ह। इस बठक की तयारी के लिए बीते मगलवार को तुकी के शहर इताबूल में एक बठक बुलायी गयी, जिसमें भारत को नहीं बुलाया गया। इस बठक का आयोजन तुकी ने किया था। यपि खबर ह कि अफगानितान ने तुकी के इस फसले का विरोध किया कि इताबूल की बठक से भारत को दूर रखा जाए, लेकिन उसने पाकितान के दबाव में उसकी एक नहीं सुनी। आचय की बात तो यह ह कि इस मामले में तुकी ने अमेरिका आर बिटेन का अनुरोध भी नहीं वीकार किया। इन दोनों देशों ने भी कहा था कि इताबूल की तयारी बठक में भारत का शामिल होना आवयक ह, इसलिए उसे अवय बुलाना चाहिए, किंतु तुकी ने उनका आगह भी ठुकराया दिया।
तुकी ने पहले फास आर जापान को भी इस बठक के लिए आमति नहीं किया था। उसका तक था कि ये देश न तो उसके पडोसी ह आर न लबे समय से उसके मामलों में शामिल ही ह, फिर उहें यों बुलाया जाए, किंतु बाद में अमेरिका आर बिटेन के आगह पर उहें बुलाना तो उसने वीकार कर लिया, किंतु भारत के बारे में वह हठपूवक अडा रहा कि उसे कतइ नहीं बुलाया जा सकता।
वतुत: पाकितान की कोशिश ह कि अफगानितान से सभी गर इलामी देशों को दूर रखा जाए, लेकिन ऐसा करना उसके लिए सभव नहीं ह, योंकि अमेरिका व उसके सहयोगी देश अफगानितान मसले से गहराइ से जुडे ह। फिर भी वह समझता ह कि आज नहीं तो कल अमेरिका, बिटेन आदि को वहा से जाना ही पडेगा, योंकि अनतकाल तक वे वहा नहीं रह सकते, लेकिन भारत की यहा गहरी जड जम जाएगी। भारत वहा वातविक निमाण काय में लगा ह आर अफगान जनता का जीवन सुधार रहा ह, इसलिए पूरे अफगानितान में उसकी तिठा बढ रही ह। यह ताि पाकितान को फूटी आख नहीं सुहा रही ह। भारत अफगानितान थित भारतीय दूतावास तथा अय तिठानों पर हमले कराये जा रहे ह। लेकिन भारत इन हमलों से बिना डरे अपने निमाण काय में लगा हआ ह। इस बात से पाकितान आर चिढा हआ ह। इसलिए उसने दूसरा कूटनीतिक तरीका अतियार किया ह।
सोवियत सेनाआें के वहा से हटने के बाद अफगानितान में जब तालिबान सरकार कायम हइ, तो पाकितान के लिए यह सवाधिक खुशी का दिन था। योंकि उसका याल था कि अफगानितान यथाथ में पाकितान का ही वितार ह, लेकिन ११/९ की घटना के बाद हए अमेरिकी हमलों ने उसके सपनों पर वजपात कर दिया, फिर भी उसने अभी आशा नहीं छोडी ह। अब वह नये सिरे से इस कोशिश में ह कि भले अफगानितान उसके अपने निजी नियण में न रहे, लेकिन वह इलामी नियण से बाहर न जाने पाए। इसलिए अब वह इलामी देशों के सगठन ‘ओआइसी’ इस मामले में शामिल कराना चाहता ह। पाकितानी तक ह कि अफगानितान के निकट पडोसी खाडी क्षे तथा मय एशिया के इलामी देश ही ह। भारत इस तरह उसका निकट पडोसी भी नहीं ह, फिर उसकी यहा या जरत ह।
यह पाकितान का ही शिगूफा ह कि अफगानितान के शीष तालिबान नेताआें से बातचीत का वातावरण बनाया जाना चाहिए। लदन की बठक में इस मुे पर गभीरता से विचार होने वाला ह। अमेरिकी राटपति ओबामा को अफगानितान से बाहर निकलने की जदी ह, इसलिए वहा थिरता की गारटी देने के लिए इलामी देश सामने आ सकते ह। देश के पुननिमाण के लिए जिस विराट धन राशि की जरत ह, उसकी भी इन इलामी देशों के पास कमी नहीं ह। जाहिर ह पाकितान अब इलामी भातव की भावना के तहत अफगानितान समया का समाधान निकालने की कोशिश में ह। तुकी के राटपति अदुला गुल उसकी इस भावना में शायद सबसे बडे सहायक ह। अब देखना ह कि इन दोनों की यह कोशिश अफगानितान में या रग लाती ह।
श्रीनगर में नहीं फहराया जा सका तिरगा
पिछले १९ वषा] में पहली बार इस बार जमूकमीर की राजधानी श्रीनगर में भारतीय गणत दिवस पर राटीय वज फहराने का कायकम नहीं हो सका। यपि जमूकमीर में पिछले कइ वषा] से राटीय दिवसों पर यह वजारोहण मा एक कमकाड रह गया ह, जो सुरक्षा बलों के भारी बदोबत के बीच सप होता ह, लेकिन इस बार वह भी नहीं हो सका, योंकि घाटी की अलगाववादी इलामी सगठनों ने वहा बद का आवान कर रखा था आर राजधानी का लाल चाक पूरी तरह सुनसान था। शुक यही रहा ह कि इस दिन वहा काले झडे या पाकितान के झडे नहीं फहराए गये।
इतना ही नहीं, इस बार गणत दिवस के दिन ही तडके दोढाइ बजे पाकितानी सेना ने दो बार यु विराम उलघन किया आर सीमा की दो सुरक्षा चाकियों पर भारी गोलीबारी की। यह गोलीबारी भी वातव में जिहादी घुसपठियों को सीमा पार कराने के लिए थी, जिसे भारतीय सनिकों ने नाकाम कर दिया। पाकितानी सनिकों ने शायद सोचा था कि इस दिन भारतीय सनिक गणत दिवस मनाने या अपनी इकाइयों में झडा फहराने की तयारी में रहेंगे, इसलिए तडके ही घुसपठ करायी जा सकती थी, लेकिन सयोग से सनिक सतक थे। दोनों तरफ से करीब ४ घटे तक गोलीबारी चली, जिसमें एक भारतीय जवान घायल हो गया।
यह ह पाकितान का रवया, जिसके साथ हम खुशिया बाटने का सपना देखते रहते ह। वह भारत के वतता दिवस या गणत दिवस का समान नहीं करता आर जिसके गुर्गे जमूकमीर में इन दिवसों पर काला दिवस मनाते ह आर भारत विरोधी नारे लगाते ह। पाकितान ऐसा कोइ माका नहीं चूकता, जिसमें भारत को घेरा जा सके, उसे किसी कटघरे में खडा किया जा सके या नहीं कुछ तो उसे मुह चिढाया जा सके। अभी दिली में होने जा रहे राटकुल खेलों के फेडरेशन के वेबसाइट पर जो भारत का नशा दिखाया गया था, उसमें से कमीर आर गुजरात का बडा हिसा पाकितानी सीमा में दिखाया गया था। यह शरारत कसे हइ या करायी गयी यह तो पता नहीं, लेकिन भारत के तीव विरोध के बाद यह नशा हटाया गया। भारत जितनी ही अपनी उदारता की छाप छोडने की कोशिश करता ह, पाकितान उतना ही उसकी पीठ में सुइ चुभोने का काम करता ह। ऐसे में कसे यह कपना की जा सकती ह कि पाकितान से सहज ढग से कभी सबध सुधर सकेंगे। एक कहावत ह ‘भय बिन होय न ीति’। पाकितान जसे देश भयवश ही मी का हाथ आगे बढा सकते ह, योंकि उदारता की भाषा उहें समझ में नहीं आती।
