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हिदी भाषियों के बचाव में उतरा सघ

Swatantra Vaartha  Tue, 2 Feb 2010, IST

हिदी भाषियों के बचाव में उतरा सघ

राटीय वय सेवक सघ (आरएसएस) ने पहली बार महाराट की क्षेवादी सकीण राजनीति के खिलाफ अपने को खडा करने का साहस किया ह। इसके लिए निचय ही सघ के धान, सर सघचालक मोहन भागवत की सराहना की जानी चाहिए। सघ एक राटीय व राटवादी सगठन ह, इसलिए उसने कभी किसी तरह की क्षेीय सकीणता का दशन नहीं किया, मगर उसने किसी क्षे की क्षेवादी राजनीति के खिलाफ भी अपने को नहीं खडा किया। महाराट में शिवसेना का जम ही क्षेवादी भावना को लेकर हआ था, लेकिन सघ ने कभी उसके किसी कदम का विरोध नहीं किया। यह पहला माका ह, जब सघ ने अपने कायकताआें को निर्देश दिया ह कि वे महाराट में उार भारतीय नागरिकों की रक्षा करें तथा हिदी विरोधी भावनाआें के विकास व सार को रोकने का काम करें।

सघ के इस निर्देश में किसी पार्टी का नाम नहीं लिया गया ह, किंतु भाषा व क्षे की राजनीति का पट विरोध किया ह। भागवत ने साफ शदों में कहा ह कि ‘अपने ही लोगों को देश के किसी भाग में बसने से रोकना उचित नहीं कहा जा सकता।

देश के येक नागरिक को देश के किसी कोने में जाकर रोजगार करने या बसने का पूरा हक ह। इसके जवाब में शिवसेना के कायवाहक अयक्ष उव ठाकरे ने सघ को चेतावनी दी ह कि वह अपने काम से काम रखे आर वह मुबइ की राजनीति में टाग अडाने की कोशिश न करे। उसे हिदी का चार करना ह तो दक्षिण भारत में जाकर करे। इसके पूव सेना के वरिठ नेता मनोहर जोशी ने तीखी तिकिया यत की आर भागवत को यह बताने की कोशिश की कि मुबइ केवल मराठियों की ह आर उहें ही यहा ाथमिकता मिलनी चाहिए। सेना हिदुव के साित पर हमेशा सघ के साथ ह, लेकिन वह मराठी मानुस के हितों की तथा मुबइ पर उसके अधिकारों की अनदेखी नहीं कर सकती।

वातव में शिवसेना की इस मराठी सकीणता ने ही उसे हाशिये में डाल दिया ह।

अपनी इस सकीणता के कारण उसने छपति शिवाजी का कद भी बाना कर दिया ह, जिसके नाम पर उसने इस सगठन को जम दिया ह। छपति सपूण भारतीय सकति व राटीयता के तीक थे, लेकिन शिवसेना ने उहें भी एक मराठी मानुस बना दिया ह। शिवसेना मुख बाल ठाकरे की इस सोच से तो उनकी हिदुव की समझदारी पर भी सदेह होने लगा ह। या मराठी मानुस के हितों की रक्षा से ही हिदुव की रक्षा हो सकती ह ? हिदुव मनुयमा की समानता में विवास करता ह।

वह केवल उसका विरोधी ह, जो इस समानता के साित को तोडता ह या उसके वि आचरण करता ह।शिवसेना अपने आचरण के ारा हिदुव की रक्षा नहीं कर रही, बकि उसकी जड खोद रही ह। उनका शाहख का विरोध तो जायज दिखता ह, योंकि शाहख जब आइपीएल किकेट में पाकितानी खिलाडियों को शामिल न किये जाने पर अफसोस यत करते ह तथा उहें किसी तरह कुछ टीमों में शामिल कराना चाहते ह, तो ऐसा वह पडोसी देश के साथ साहादय की भावनावश नहीं, बकि इलामी भातव की भावनावश करते ह, लेकिन जब वह हिदी भाषी या हिदी भाषा भाषियों का विरोध करते ह, तो वह हिदुव का वटवक्ष ही काटते नजर आते ह।

इसलिए मोहन भागवत ने हिदीमराठी विवाद में जो ख अपनाया ह, वह सामाजिक व राटीय सदभ में उनकी बेहतर सोच का परिचायक ह। भारतीय जनता पार्टी को भी इस मामले में बहत साफ ख अपनाना चाहिए आर बेहतर हो कि वह शिवसेना से किनारा ही कर ले। राजनीतिक समझाते समान विचारधारा वाले सगठनों के साथ ही हो सकते ह आर यदि साा सुविधा के लिए मा अपना सया बल बढाने के लिए ऐसे समझाते किये जाते ह, तो उनका उटा ही भाव पडता ह। जिहें दीघकालीन राटीय राजनीति करनी ह, उहें सकीणता की परछाइ से भी दूर हो जाना चाहिए।

चारचार मुयमी

या कोइ एक राय में चार मुयमयाेि की कपना कर सकता ह शायद नहीं। लेकिन अपने देश के सबसे छोटे रायों में एक मेघालय में यह एक सचाइ। यहा बाकायदे सरकारी अधिसूचना जारी करके तीन अय नेताआें को मुयमी का तर दान किया गया ह। कागेस पार्टी की वतमान सवधानिक सरकार के मुयमी डीडी लापाग ने राय के असतुट नेताआें को सतुट करके अपनी सरकार को बचाए रखने का अनूठा फामूला अतियार किया ह।

ाय: असतुटों को पटाने के लिए उहें उपमुयमी पद देने का ताव किया जाता ह। लेकिन कोइ यदि उससे भी सतुट न हो तो। लापाग अपने दो असतुट साथियों को पहले ही मुयमी पद का तर आर सुविधाए दे चुके थे, लेकिन इस गुवार को तीसरे का भी नबर आ गया। यूनाइटेड डेमोकेटिक पार्टी के अयक्ष जेडी रिबइ को मेघालय आथिक विकास परिषद का अयक्ष पद देने के साथ ही उहें मुयमी का तर भी दान किया गया था। इसके साथ ही पूव मुयमी डोंकुपुर राय को राय योजना आयोग का अयक्ष बनाकर उहें मुयमी के समकक्ष तर व सुविधाए देने की घोषणा की गयी थी। अब यदि इस तरह दोदो लोग मुयमी के समकक्ष ओहदे का आनद उठा रहे ह, तो कागेस की राय इकाइ के अयक्ष फाइडे लिंदोह यों पीछे रहते। उहोंने भी इसके लिए दबाव बनाया। लिंदोह को लापाग का दाहिना हाथ तथा सबसे निकट का सलाहकार माना जाता ह। अब गुवार को एक अधिसूचना जारी करके उहें भी मुयमी सम बना दिया गया ह।

अब इससे अनुमान लगाया जा सकता ह कि देश में साा सुविधाआें की बदरबाट किस तरह चल रही ह। यपि ऐसा नहीं ह कि इस मामले में सबसे खराब हालत केवल मेघालय की हो। ाय: पूरे देश में यही चल रहा ह। कें हो या राय हर जगह केवल साा के केक में बटवारे की लडाइ ह। लेकिन सविधान व लोकत का मखाल उडाने की जो किया मेघालय में शु हइ ह, वह जदी ही अय रायों में फल सकती ह। कल को कें में भी इस तरह की माग उठ सक

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