चीन की अमेरिका को खुली धमकी
चीन ने अमेरिकी राटपति बराक ओबामा को धमकी दी है कि यदि तिबत के वासी धामिक गु दलाइ लामा से मिले, तो इसके गभीर परिणाम होंगे। इससे दोनों देशों के राजनीतिक सबधों को गहरी क्षति पहचेगी। चीनी कयुनिट पार्टी के अधिकारी झी वीकुन ने कहा कि यदि ओबामा नहीं माने आर दलाइ लामा से मिले, तो चीन इसके अनुकूल कारवाइ (करेपाडिंग एशन) करेगा। उहोंने यह तो नहीं बताया कि चीन कसी ‘अनुकूल कारवाइ’ करेगा, लेकिन उनका सकेत था कि वह अमेरिकी आथिक सकट में उसका सहयोग रोक सकते ह, योंकि उनका आगे कहना था कि इस आथिक सकट के दार में या अमेरिका चीनी चेतावनी की उपेक्षा करने का साहस कर सकता ह।
अमेरिका को चीन की तरफ से इतनी गभीर धमकी शायद पहले कभी नहीं दी गयी थी। यह अतराटीय राजनीति में चीन के बढते भाव आर अमेरिका की आथिक दुबलता का माण ह। अमेरिका पर चीन का एक टिलियन डालर से भी अधिक का कज ह। चीन ने उसके इतने मूय के बाड खरीद रखे ह। इस कज के पसे से माज करने की उसकी वा अब उसके ऐसे अपमान का कारण बन रही ह कि चीन अब अमेरिका को इसका निर्देश दे रहा ह कि वह किससे मिले आर किससे न मिले।
१९८९ के शाति के नोबेल पुरकार विजेता दलाइ लामा को चीन ‘झूठा’ आर ‘सकट पदा करने वाला’ बताता ह। वह चाहता ह कि दुनिया का कोइ देश दलाइ लामा को अपने यहा न आने दे तथा कोइ राटायक्ष उनसे मुलाकात न करे। भारत से उसकी दुमनी का मूल कारण भी यही ह कि भारत ने दलाइ लामा को अपने यहा शरण दे रखी ह आर यहा उनकी वासी सरकार थापित ह।
चीन अभी भी सय शति में अमेरिका को चुनाती देने की थिति में नहीं ह, लेकिन वह अपनी बढती आथिक ताकत से अमेरिका को चुनाती देने की थिति में अवय आ गया ह। अमेरिकी अथयवथा में चीन की बढी हइ भागीदारी के कारण ही आथिक मदी के इस दार में अमेरिका चीन से दबा हआ महसूस कर रहा ह। पिछले दिनों अपनी चीन याा के दारान राटपति ओबामा जिस तरह चीनी इशारों पर नाचते रहे, उसका यही कारण था। चीनी दबाव के कारण ही उहोंने अपनी बीजिंग याा के पहले वाशिंगटन में उहोंने दलाइ लामा से मिलने से इनकार कर दिया था।
इधर उहोंने केवल एक काय ऐसा किया ह, जो चीन के लिए अयि ह, वह ह ताइवान को ६४ अरब डालर के हथियारों की बिकी का निणय। चीन ने इसके खिलाफ भी अमेरिका को चेतावनी दी ह। ताइवान को हथियार बेचने का यह निणय भी अमेरिकी अथयवथा सुधार का ही एक अग ह, लेकिन चीन इसे अपने क्षे में हथियारों की होड मान रहा ह। वतुत: चीन अमेरिका को अपनी ताजा धमकियों से यह भी देखना चाहता ह कि अमेरिका कितना दबाव झेल सकता ह। यदि चीनी धमकियों के आगे अमेरिका झुक गया, तो यह इस बात का माण होगा कि अमेरिकी रीढ में अब इतनी ताकत नहीं रह गयी ह कि वह दुनिया के सनिक व आथिक दबावों के बीच भी सीधा खडा रह सके। यह चीनी शति के आगे उसके आमसमपण का भी माण होगा। बाकी दुनिया के लिए भी यह देखना रोचक होगा कि आज की दुनिया में अमेरिका की थिति या ह।
यहा यह उलेखनीय ह कि ओबामा को दलाइ लामा से न मिलने की यह चेतावनी दलाइ लामा के तिनिधियों के साथ चीनी अधिकारियों की ताजा दार की बातचीत के बाद आयी ह। दलाइ लामा तथा चीन सरकार के बीच २००२ में शु हइ वाताआें का यह ९वा दार था, जो पहले की तरह ही विफल रहा। झी वीकुन का कहना था कि दोनों पक्षों के बीच तीखे मतभेद ह। दलाइ लामा के नेतव वाले तिबती अभी भी तिबत की वायाता की रट लगाए हए ह, जबकि चीन तिबत पर अपनी भुसाा के साथ राइराी का भी समझाता करने के लिए तयार नहीं ह। ऐसे में यदि राटपति ओबामा दलाइ लामा से इस महीने मिलते ह, तो चीन इसे बदात नहीं करेगा। इसके जवाब में वह अमेरिकी कपनियों पर तिबध लगा सकता ह आर अमेरिका से चीन के आयात को रोक सकता ह। चीन इस बात से भी क्षुध हो सकता ह कि ओबामा ने इस बार कागेस के समक्ष पेश किये गये अपने वाषिक बजट में चीन में तिबती सकति व परपरा के सरक्षण के लिए ७४ लाख डालर का कोश निधारित किया ह। यह धन वहा तिबती सकति सरक्षण काय में लगे गर सरकारी सगठनों के लिए निधारित किया गया ह। जाहिर ह कि चीन को अमेरिका का यह कदम भी पसद नहीं आया होगा।
अमेरिका आर चीन इस समय निविवाद प से दुनिया के दो सबसे बडी सय व आथिक शतिया ह, इसलिए दोनों के बीच भुता का ۧ होना वाभाविक ह। इसे एक नये शीतयु काल की शुआत भी कह सकते ह, जिसमें अमेरिका के मुकाबले सोवियत सघ की जगह चीन आ गया ह।
अब अमरमुलायम ۧ का नया अयाय
समाजवादी पार्टी ने अपने पूव महासचिव अमर सिंह (रायसभा सदय) तथा सासद जयादा को पार्टी की ाथमिक सदयता से निकाल बाहर किया ह। अमर सिंह ने पहले महासचिव पद से इतीफा दिया था, लेकिन उसके बाद जो कटु बयानबाजियों का दार शु हआ, उसकी परिणति इस प में हइ ह। रामपुर से लोकसभा सदय जयादा ने अमर सिंह के समथन में जो बयानबाजी शु की, उसके परिणामवप उहें भी पार्टी से बाहर का राता देखना पडा। वातव में अमर सिंह व जयादा दोनों ही समाजवादी पार्टी छोडना चाहते थे, लेकिन वे वय इतीफा देने के बजाए यह चाहते थे कि पार्टी वय उहें निकाल दे। इसके पीछे एक ही रणनीति थी कि यदि पार्टी उहें निकासित करती ह, तो उनकी ससद की सदयता बनी रहेगी, लेकिन यदि वे वय इतीफा देते ह, तो उनकी सदयता समात हो जाएगी।
पार्टी ने उनके साथ चार विधायकों को (सदीप अगवाल, मदन चाहान, अशोक चदेल तथा सर्वेश सिंह) को भी पार्टी से निकाल दिया ह, जो अमर सिंह का गुणगान कर रहे थे। पार्टी में अमर सिंह के गुट की एक मुख सदय जया बचन आर रह गयी ह, लेकिन उहें भी आज नहीं तो कल पार्टी से बाहर आना ही ह। वह भी शायद यह चाहती होंगी कि उहें भी पार्टी से निकाल दिया जाए, जिससे उनकी रायसभा की सदयता बनी रहे। फिलहाल पार्टी ने उनके खिलाफ कोइ कारवाइ नहीं की ह। अमर सिंह की जगह आये पार्टी के नये महासचिव मोहन सिंह का कहना ह कि जया बचन एक सय आर शालीन महिला ह। उहोंने अब तक पार्टी के वि अनुशासनहीनता का काय नहीं किया ह, इसलिए उनके वि कोइ कारवाइ करने का सवाल ही नहीं उठता। हा, भविय में उनका कसा आचरण या यवहार होता ह, यह भविय की बात ह। आगे जब जसी जरत होगी, वसी कारवाइ होगी।
वातव में अब इस निकासन कारवाइ के साथ ही दोनों नेताआें अमर व मुलायम के बीच सीधी तलवारें खिंच गयी ह। अमर ने मुलायम पर जातिवादी होने के साथ सादायिक होने का भी आरोप लगाना शु कर दिया ह। मुलायम सिंह सीधे उनके खिलाफ कोइ टिपणी नहीं कर रहे ह, लेकिन मोहन सिंह ने उन पर अपना हार जारी रखा ह। अभी यह पट नहीं ह कि अमर सिंह का अगला राजनीतिक कदम या होगा वह अपनी नइ पार्टी बनाएगे या किसी अय पार्टी में शामिल होंगे किंतु उार देश की राजनीति में अमरमुलायम ۧ का यह निचय ही एक रोचक अयाय होगा।
