समझनी होगी भत्तेसुविधाआ पर टैक्स की प्रक्रिया
फ्रिंज बेनिफिट टैक्स वित्त वर्ष २००९१० से समाप्त हो गया है। ऐसे में कर्मचारियों को नियोक्ता से वेतन के साथ मिलने वाले भत्ते और सुविधाआ(परिलब्धियां अथवा परक्यूसिट) पर कराधान आयकर कानून के मौजूदा प्रावधानों के अनुरूप निर्धारित किया जाएगा। फ्रिंज बेनिफिट टैक्स (एफबीटी) समाप्त होने से इन प्रावधानों का महत्व और भी ब़ढ गया है। संक्षेप में कहें तो वेतन पर कर निर्धारण की संपूर्ण जानकारी के लिए अब आयकर अधिनियम १९६१ के सेक्शन १७ को काफी बारीकी से समझना जरूरी हो गया है। अधिनियम के इस भाग में वेतन और परिलब्धियों पर कर निर्धारण से संबंधित प्रावधानों का विवरण विस्तार से दिया गया है। आयकर अधिनियम के उपरोक्त खंड के अलावा संदर्भ के लिए कर्मचारी आयकर नियमावली १९६२ के नियम २ ए, २बी, २ बीबी और नियम ३ का भी सहारा ले सकते हैं।
परिलब्धियों में पहला नंबर आता है मुफ्त आवास का। कर्मचारी को १५ लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में रहने के लिए नियोक्ता के स्वामित्व वाला आवास दिए जाने पर परिलब्धि का मूल्यांकन वेतन के १५ फीसदी के बराबर किया जाएगा। दस लाख से अधिक, पर २५ लाख से कम आबादी वाले शहरों में इसका मूल्यांकन वेतन के १० फीसदी के बराबर होगा। इसी तरह १० लाख से कम आबादी वाले स्थान पर आवास दिए जाने पर परिलब्धि को वेतन के ७५ फीसदी के बराबर माना जाएगा। कर्मचारी को दिया गया आवास यदि नियोक्ता की मिल्कियत नहीं हैं और नियोक्ता ने इसे लीज या किराए पर लिया है, तो परिलब्धि वेतन के १५ फीसदी के बराबर मानी जाएगी। मकान के साथसाथ यदि नियोक्ता द्वारा कर्मचारी को फर्नीचर आदि भी मुहैया कराया गया है, तो कर निर्धारण करते वक्त फर्नीचर और फिटिंग्स आदि की लागत की १० फीसदी राशि कर्मचारी के वेतन में ज़ोड दी जाएगी।
कर्मचारी को आवास भत्ता (हाउस रेंट एलाउंस) दिए जाने पर भत्ता उसी सूरत में करमुक्त माना जाएगा, जबकि किराए का भुगतान स्वयं कर्मचारी द्वारा किया जा रहा हो। यदि कर्मचारी अपने मकान में रह रहा है, तो वह आवास भत्ते पर किसी भी तरह की छूट का हकदार नहीं होगा। आयकर नियमावली के नियम २ ए के तहत आवास भत्ते पर मिलने वाली छूट की अधिकतम सीमा निम्नलिखित मदों में जो सबसे कम हो, उसके अनुरूप होगी १ कर्मचारी को मिल रही आवासभत्ते की वास्तविक राशि। २ किराए में दी जा रही राशि, जो कि वेतन के १० फीसदी से ज्यादा हो। ३ आवास दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई शहरों में से किसी एक में होने पर वेतन की ५० फीसदी राशि, अन्य शहरों में आवास दिए जाने पर वेतन की ४० फीसदी राशि।
कर्मचारियों को उपरोक्त फार्मूले के आधार पर ही आवास भत्ते में छूट का आकलन करना चाहिए। कर्मचारी को मिलने वाले मेडिकल रीइंबर्समेंट पर कर छूट की अधिकतम सीमा १५,००० रुपये सालाना है। कर्मचारी को मेडिकल एलाउंस मिलने पर वह पूरी तरह कर योग्य होगा अर्थात एलाउंस की पूरी राशि पर उसे कर देना होगा। कर्मचारी को लीव ट्रेवल एसिस्टेंस (एलटीए) मिलने की दशा में चार कलेंडर वषा] के ब्लॉक में दो बार यह कर मुक्त रहेगा। यदि कर्मचारी को हर साल एलटीए मिलता है, तो कानून के मुताबिक चार कलेंडर वषा] के ब्लॉक के दौरान कुछ वषा] में उसे इस पर कर देना होगा। कर्मचारी को अपनी मर्जी के मुताबिक ब्लॉक के किन्हीं भी दो सालों में कर छूट के लिए आवेदन करने की स्वतंत्रता होगी।
