
‘मुखबिर’
‘मुखबिर’ की कहानी समीर दाानी की कहानी है, जो अडरवड की खबरें पुलिस को लाकर देता है। काम बहत ही खतरनाक है, जिसमें इस मुखबिर की जान को भी हमेशा खतरा बना रहता है। इसलिए वह लगातार भेष बदलकर अपना काम करता रहता है। इस तरीके में यह भी दित है कि उसे अडरवड के लोगों के सपक में हमेशा बने रहना पडता है, ताकि वहा की खबरें वह पुलिस को लाकर दे सके। ऐसे में यदि किसी को यह शक हो जाए कि यही य भेष बदलकर कल भी मिला था, तो आर मुसीबत? इसलिए इस मुखबिर को भेष के साथसाथ अपनी भाषा भी बदलनी पडती है। भाषा बदलने के साथसाथ उसे इस बात का भी खास याल रखना पडता है कि पिछले दिनों हइ कोइ भी बात उसके मुह से न निकल जाए, वरना सामने वाले को मालूम पड सकता है कि यही शस पहले भी आ चुका है। इस मुखबिर की जिंदगी में पुलिस आफिसर (ओम पुरी) का बहत बडा दखल है। वे मुखबिर से सहानुभूति तो रखते ही है, वहीं उसका अछा इतेमाल भी करते है, लेकिन उसे मारते नहीं। इधर जब उसकी जिंदगी में एक लडकी (रायमा सेन) आती है, तब उसे किन परिथितियों का सामना करना पडता है, यही इस फिम में दिखाया गया है। या वह सिफ एक मुखबिर बनकर ही अपना जीवन गुजारना चाहता ह या फिर उसकी मजिल कुछ आर है?
(टार गोड पर शाम4 .30बजे)
