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अपनी नादानियों सेे और न ब़ढाएं पति की परेशानी

Swatantra Vaartha  Wed, 21 Apr 2010, IST

अपनी नादानियों सेे और न ब़ढाएं पति की परेशानी

विजय का प्रमोशन होना निश्चित था। बॉस उसके काम से काफी संतुष्ट थे। सीनियरिटी में भी वह सबसे ऊपर था, लेकिन सिफारिश के कारण प्रमोशन विजय के जूनियर विनय का हो गया। विजय इसके बाद से गहरे डिप्रेशन में चला गया। अब न वह किसी से हंसताबोलता और न ही ठीक से खातापीता। हमेशा खुश रहने वाला विजय अब हर समय बुझाबुझा सा रहने लगा।

एक दिन पत्नी नयना ने उनकी प्लेट में एक चपाती ज्यादा क्या रख दी कि विजय ने प्लेट ही जमीन पर दे मारी। इस पर नयना को भी गुस्सा आ गया और उस दिन उनके बीच काफी झग़डा हो गया। विजय ने कमरा भीतर से बंद कर ़ढेर सारी नींद की गोलियां गटक ली, जो वह नींद न आने की वजह से इन दिनों रोज लिया करता था और थ़ोडी ही देर में वह हमेशा के लिए दुनिया छ़ोड गया।

काश ! ऐसे समय में पत्नी ने धीरज से काम लेकर पति का मनोबल ब़ढाया होता लेकिन पत्नी की नादानी ने ही उसे हमेशा के लिए रोने पर मजबूर कर दिया।

निपुण पर रातोंरात कऱोडपति बनने का जुनून सवार था। तनख्वाह का काफी हिस्सा वह दुनिया भर के लॉटरी टिकटों पर और इसी तरह की स्कीमों में खर्च कर देता है। एक बार किसी लॉटरी में उसका एसी क्या निकल आया, उसका तो हौंसला ब़ढता गया। वह अब चोरी छिपे जुआ भी खेलने लगा कि बस किसी तरह मालामाल हो जाऊं। वह शेखचिल्ली की तरह ख्याली पुलाव पकाता।

उसकी पत्नी मानसी काफी समझदार महिला थी। वह उसे प्यार से ही समझाती रहती, क्योंकि जानती थी कि झग़डे से कुछ नहीं होने वाला, लेकिन मानसी द्वारा निपुण को समझाने पर वह उसे ‘हां’, ‘अच्छा’, ‘बस ये आखिरी बार’ कहकर टाल देता, किन्तु अगले महीने फिर वही सब दोहराता।

मानसी प़ढीलिखी थी। अतः उसने नौकरी कर ली और बहुत जल्द उसकी पदोन्नति भी हो गई। अपने पैसों पर पति को न तो उसने हाथ धरने दिया और न ही अपनी तनख्वाह की हवा लगने दी। निपुण के स्वाभिमान के लिए यह चैलेंज था। पत्नी की पदोन्नति और अपने सर्कल में उसका ब़ढता सम्मान देख निपुण ने आखिरकार अपना रवैया बदल लेने में ही भलाई समझी।

अनिकेत पत्नी के होते हुए भी अपने ही ऑफिस में काम करने वाली एक मुस्लिम ल़डकी अफशां से प्यार करने लगा। दोनों अक्सर रेस्तरां तथा पिक्चर इकट्‌ठे जाते। अनिकेत को अच्छी तनख्वाह मिलती थी, इसलिए वह अक्सर उसे कीमती उपहार आदि देकर खुश रखता। अफशां का इस बीच एक ब़डे घर से रिश्ता आ गया और अफशां ने वहां ‘हां’ कहकर अनिकेत की उपेक्षा करनी शुरू कर दी।

अनिकेत तो अब तक अफशां के प्यार में ऐसा पागल हो गया था कि उसे उसके बिना चैन न था। अफशां द्वारा एकाएक इस तरह ठुकराए जाने पर वो बुरी तरह बौखला गया और हर समय परेशान सा रहने लगा। उसे यह सब अपने पुरूषत्व का अपमान लगा। उसमें हीन भावना घर कर गई। अब वह अपना सारा क्षोभ पत्नी और बच्चों पर निकालने लगा।

पत्नी मधु अनिकेत और उस मुस्लिम ल़डकी के बारे में सब कुछ जानती थी, लेकिन उसने समझदारी दिखाते हुए पति से इस विषय में कभी कुछ नहीं कहा। उसे विश्वास था कि आखिर उसका पति उसके पास ही लौटेगा और हुआ भी यही।

अनिकेत ने जब इस बात को रियलाइज किया कि मधु ने कैसे दरियादिली दिखाते हुए उसे न केवल माफ कर दिया है, बल्कि सब कुछ जानते हुए भी कभी उफ तक न की, कभी कोई शिकायत नहीं की तो उसके मन में पत्नी का दर्जा प्रेयसी से कहीं ऊंचा हो गया। मधु की वफादारी के आगे वो नतमस्तक हो गया। अफशां की बेवफाई ने अनिकेत की आंखें खोल दी थी।

अक्सर देखा गया है कि पुरुष अपनी हार को स्वीकार नहीं कर पाता है। असफलता से वह बौखला जाता है, जिसका खामियाजा अक्सर पत्नी को भुगतना प़डता है। अगर ऐसे समय में वो थ़ोडी समझदारी दिखाए और ल़डनेझग़डने, रोनेधोने या क्रोध करने के बजाय पति की मनोदशा को सहानुभूति पूर्वक समझने की कोशिश करे तो यही सच्चे प्यार की पहचान है।

पति का सुख यदि आप मजे से बांटती हैं, फिर उनका दुःख या परेशानी आप क्यों नहीं बांट सकती हैं ? विवाह के समय उनके साथ आपने भी तो सुखदुःख दोनों परिस्थितियों में एकदूसरे का साथ निभाने का वादा किया था।

पति को आप तभी हिम्मत बंधा सकती हैं, जब आपमें स्वयं में भीतरी ताकत हो। अगर नहीं है तो आपको अपने पति और बच्चों के लिए इसे पैदा करना ही है। कभी ताने, तिश्ने से बात न करें, क्योंकि ये तो जलती आग में घी का काम करते हैं।

बच्चों के मन में पापा के लिए इज्जत हो, इस बात का ध्यान रखते हुए उनसे कभी अपने पति की बुराई न करें। ‘नेगिंग वाइफ’ बनने से बचें अर्थात्‌ हर बात में खोट निकालना और हर समय आलोचना करना इन बातों से पति में हीनभावना आ सकती है। जिस तिरह आप प्रशंसा की भूखी रहती हैं, उसी तरह पति भी आपसे इसकी अपेक्षा करते हैं। अतः सही मौके पर अच्छे काम के लिए उनकी प्रशंसा करने से न चूकें और समयसमय पर उनकी उपलब्धियां गिनाने में भी कोताही न बरतें। ध्यान रहे कि पति की परेशानी आपकी भी परेशानी है। अपनी नादानियों से उसे और न ब़ढाएं और न ही पल्ला झ़ाडने जैसी खुदगर्जी अपनाएं।

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