
बीटी बैगन पर फैसला टला
विभिनं राजयों के विरोध के आगे झुकी सरकार
नइ दिली, ९ फरवरी (भाषा)। कइ राय सरकारों आर गरसरकारी सगठनों के विरोध बाद सरकार ने बीटी बगन की यावसायिक खेती पर आज फसला टाल दिया आर कहा कि जब तक वत वज्ञानिक अययन आर मानव वाय तथा पयावरण के ति सुरक्षा को लेकर सतुटि न हो, तब तक इस पर निणय लबित रखा जायेगा।
देश के कषि जगत के अब तक के सबसे विवादापद आर भावनाए उफान पर ले जाने वाले इस मुे के दारान पूरे समय ‘हाट सीट’ पर रहे पयावरण मी जयराम रमेश ने बीटी बगन के इतेमाल से जुडा फसला करने के लिये निधारित १० फरवरी की तारीख से एक दिन पहले ही आज अचानक सवाददाता समेलन बुलाकर यह घोषणा की। रमेश के कहा, ‘जब राय सरकारों की ओर से जरत से अधिक विरोध हो, जब जिमेदार नागरिक समाज आर गरसरकारी सगठनों ने कइ गभीर सवाल उठाये हों आर उनके जवाब सतोषजनक नहीं पाये गये हों, जब जनभावना नकारामक हो आर जब बीटी बगन के इतेमाल की इजाजत देने की देश में जरत से यादा जदबाजी न हो, तो यह मेरा कतय ह कि एक चाकस आर विज्ञान आधारित टिकोण अपनाते हए इस पर फसला लबित रखू। सरकार का फसला ऐसे समय आया है , जब बगन उपादन में ६० फीसदी से अधिक की हिसेदारी रखने वाले कइ गरकागेस शासित राय इस बीटी किम को अपनाने के खिलाफ विरोध जाहिर कर चुके है। रमेश ने कहा, ‘सरकार बीटी बगन की खेती सबधी फसला तब तक नहीं करेगी, जब तक इस उपाद से मानव वाय तथा पयावरण की सुरक्षा को लेकर सतुटि न हो।’
गारतलब ह कि कागेस शासित आध देश के साथ ही गरकागेस शासित राय केरल, कनाटक, बिहार, पचिम बगाल, उडीसा, तमिलनाड, उाराखड तथा मय देश बीटी बगन को अपनाने के खिलाफ ह। रमेश ने सवाददाताआें से कहा, ‘जब तक बीटी बगन के इतेमाल से मानव सुरक्षा की पूरी तरह सतुटि न हो, वत नियमन आर वत जाच न हो आर जब तक लोग सहजता से इसे वीकार न करें, तब तक हम कोइ फसला नहीं कर सकते।’ आनुवाशिकी अभियाकीि मजूरी समिति (जीइएसी) ने बीटी बगन के कषि क्षे में यावसायिक इतेमाल को गत १५ अतूबर को ही हरी झडी दे दी थी आर अतिम फसला पयावरण मालय पर छोड दिया था।
इसके बाद रमेश ने गत १३ जनवरी से छह फरवरी के बीच सात शहरों में जनसुनवाइ की। कोलकाता, भुवनेवर, अहमदाबाद, नागपुर, चडीगढ, हदराबाद आर बेंगलूर में जनसुनवाइ के दारान रोष, तीखी बयानबाजी आर वज्ञानिक दलीलें देखी गयीं। इस बीटी फसल के समथक आर विरोधी समूहों से हमलों का सामना कर रहे रमेश ने कइ बार सावजनिक तार पर नाराजगी भी जाहिर की।
जनसुनवाइ के दारान रमेश पर जव ााेगिकी क्षे की कपनी मोनसाटो का ‘एजेंट’ होने के आरोप लगे। जब यह आरोप लगा कि वह आनुवाशिक तार पर सवधित बीज तयार करने वाले खेमों के जाल में फसे ह, तो मी ने कहा, ‘म बेलगाम आरोपों को कतइ बदात नहीं कगा।’ उहोंने कहा, ‘म यहा किसी को खुश करने के लिये नहीं ह। म यह अपेक्षा नहीं रखता कि मेरे फसले से सभी सहमत होंगे, लेकिन बीटी बगन पर फसला हमारे लिये इसलिये महवपूण ह, योंकि भारत दुनिया में सबसे यादा बगन उपादन करता ह। हमारे पास बगन की चार हजार से अधिक किमेंहै ।
रमेश ने पिछले दिनों उन पर लगे विभि तरह के आरोपों को सिरे से खारिज करते हए कहा, ‘पिछले वष २९ मइ को पयावरण आर वन राय मी बनने के बाद से म ऐसी किसी भी कपनी के किसी भी यति से नहीं मिला ह, जो आनुवाशिकी तार पर सवधित बीज तयार करती हो।
रमेश से सवाददाताआें ने जब यह पूछा कि बीटी बगन के बारे में फसला करने के लिये उन पर या कषि में शरद पवार या गरसरकारी सगठनों का कोइ दबाव ह, तो उहोंने कहा, ‘मुझ पर कोइ दबाव नहीं ह।’ यह बीटी बगन पर निणय लबित रखने का फसला मेरा ह। लोकत में आर विशेषकर इस (बीटी बगन के) मामले में सरकार सर्वोपरि ह। मेरा फसला समाज आर विज्ञान के ति जवाबदेही भरा ह। मने पारदर्शी आर लोकताकि किया अपनायी ह। पूव जव ााेगिकी नियामक निकाय जीइएसी के सदयों को लेकर भी सवाल उठे थे, योंकि विशेषज्ञों की तीिय समिति के एक तिहाइ सदयों ने अधिक अययन करने के विकप को छोडने का फसला किया। वहीं, शीष वज्ञानिक पीएम भागव का दावा था कि विशेषज्ञों की तीिय समिति के अयक्ष उनके इस आकलन पर सहमत थे कि आनुवाशिक तार पर सवधित बीज तयार करने वाली कपनी ‘महिको’ ने आठ जरी परीक्षण नहीं किये थे।
रमेश ने कहा कि बीटी बगन पर फसले के लिये जीइएसी ने जो मानदड अपनाये वो अतरराटीय नियमन मानदडों से मेल नहीं खाते थे।
उहोंने कहा, ‘जीइएसी की कियाआें को बदलने आर अधिक पारदर्शी बनाने की जरत ह।’ रमेश ने कहा कि आनुवाशिकी तार पर सवधित उपादों का बिना लेबलिंग के आयात करनना अवध ह आर ऐसा करने पर विदेश यापार ‘विकास आर नियमन’ अधिनियम १९९२ के तहत दडामक कारवाइ हो सकती।
उहोंने कहा कि ‘महिको’ की ओर से विकसित बीटी बगन पर फसला रोका गया ह। इस कपनी में मोनसाटो की २६ फीसदी हिसेदारी ह। कोयबटूर आर धारवाड थित कषि विववािलय तथा भारतीय कषि अनुसधान परिषद की दो योगशालाए भी बगन की आनुवाशिक तार पर सवधित किम विकसित कर रहीहै ।
रमेश ने कहा, ‘मुझे उमीद ह कि बीटी कपास के दारान हइ उस तरह की घटनाआें जसी पुनरावा नहीं होगी, जब बाजार में बीटी कपास के अवध बीज बाजार में आ गये थे।
बीटी बगन के उपादन के लिये मीि के जीवाणु ‘बेकिलस थुरिनजेनेसिस’ (बीटी) के जरिये विषले जीन ‘काय एसी’ को आनुवाशिक अभियाकीि तकनीक का इतेमाल कर बगन के पाधे में डाला जाता है। महाराट हाइबिड सीडस कपनी इस फसल को तकनीकी मदद के साथ विकसित कर रही है।
