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पीओके से लौटने की इच्छा रखने वालों का स्वागत : चिदंबरम

Swatantra Vaartha  Fri, 12 Feb 2010, IST

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नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण पहल करते हुए आज कहा कि वह पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) गये उन भारतीयों का स्वागत करने को तैयार है, जो उग्रवाद त्याग करके लौटना चाहते हैं। कैबिनेट की बैठक के बाद संवादादाताआें से बातचीत के दौरान गृहमंत्री पीचिदंबरम ने इस संदर्भ में जम्मूकश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा कि इस विचार का निश्चित तौर पर स्वागत है कि पाक अधिकृत कश्मीर गये उन भारतीयों की वापसी का रास्ता आसान बनाया जाये, जो लौटने की इच्छा रखते हैं।

चिदंबरम ने कहा, ‘यह विचार स्वीकार्य है, इस विचार को अब योजना में तब्दील किया जाये।’ उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव जम्मूकश्मीर की समस्याआें के निदान के लिए प्रधानमंत्री डॉमनमोहन सिंह द्वारा गठित कार्य समूहों की सिफारिशों से भी मेल खाता है। उन्होंने कहा कि इस विचार को योजना का रूप देना होगा।

इसके लिए पाक अधिकृत कश्मीर से लौटने की इच्छा रखने वालों की ‘पहचान, जांच, वापसी के सफर, उनकी भ्रांतियों को दूर करने, पुनर्वास और पुन: मुख्यधारा में लाने उपायों आदि जैसे पहलुआें पर विचार किया जाएगा। उमर के प्रस्ताव का पुरजोर समर्थन करते हुए गृह मंत्री ने कहा, ‘पाक अधिकृत कश्मीर वास्तव में भारतीय भूभाग है। सरकार उनकी वापसी को सुगम बनाएगी, जो किन्हीं कारणों से नियंत्रण रेखा के पार चले गये हैं।

’ चिदंबरम का यह बयान कैबिनेट के उनके सहयोगी गुलाम नबी आजाद के उस विचार से अलग है, जिसमें जम्मूकश्मीर के इस पूर्व मुख्यमंत्री ने आशंका जताई थी कि ऐसा करने से घुसपैठ ब़ढ सकती है। वर्ष १९८९ से हजारों कश्मीरी नियंत्रण रेखा पार करके पाक अधिकृत कश्मीर चले गये थे। उनमें से कई घुसपैठ से वापस आ चुके हैं, लेकिन ब़डी संख्या अभी वहीं है। बताया जाता है कि इनमें से लगभग ८०० ने विभिन्न माध्यमों से ‘घर वापसी’ की इच्छा जताई है। उमर ने कहा है, ‘और अधिक युवकों की राज्य में वापसी को ब़ढावा देने और उन्हें मुख्यधारा में शामिल करने के लिए हमें नई समर्पण और पुनर्वास नीति बनानी होगी। सरकार ऐसे नीति पर गंभीरता से विचार कर रही है।’

चिदंबरम ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि इस बारे में राज्य सरकार में सत्ताऱूढ नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस के साथ ही मुख्य विपक्षी दलों से भी चर्चा करके आम राय बनाई जाएगी। उमर के इस प्रस्ताव के बाद केंद्र ऐसी समपर्ण और पुनर्वास नीति पर विचार कर रहा है, जिसके तहत पाक अधिकृत कश्मीर गये गुमराह युवकों को आम माफी देकर उग्रवाद से अलग कर वापस लाया जा सके। पाक अधिकृत कश्मीर से कश्मीरी युवकों की वापसी का मुद्दा इससे पहले २००६ में उठा था, जब उमर अब्दुल्ला और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती एक प्रतिनिधिमंडल के साथ पाकिस्तान गये थे। तब पाक अधिकृत कश्मीर में फंसे सैक़डों कश्मीरियों ने इन नेताआें से उनकी वापसी की व्यवस्था करने का आग्रह किया था, लेकिन उस समय जम्मूकश्मीर सरकार ने उनकी वापसी की कोई योजना बनाने से इंकार कर दिया था। चिदंबरम के बयान से एक दिन पहले आजाद ने उमर के प्रस्ताव के संभावित खतरे के बारे में टिप्पणी करते हुए कहा, ‘उनकी (युवकों की) गारंटी कौन देगा और क्या हमें पाकिस्तान पर भरोसा करना चाहिए। क्या इसके सशस्त्र युवकों की घुसपैठ का एक और तरीका बनने का खतरा नहीं है।’ भाजपा ने भी प्रस्तावित समर्पण नीति का क़डा विरोध करते हुए कहा है कि शत्रुतापूर्ण देश के लिए काम करने वाले भ़ाडे के सैनिकों को माफी देना खतरनाक साबित होगा।पार्टी प्रवक्ता राजीव प्रताप रूडी ने कहा, ‘भाजपा का मानना है कि अंतर्राष्ट्रीय सीमाआें को पार करने वाले वस्तुत: ऐसे भ़ाडे के सैनिक हैं, जो एक शत्रुतापूर्ण देश की ओर से भारत के खिलाफ युद्ध चला रहे हैं।’

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