उस्मानिया विश्वविद्यालय में लाठीचार्ज, 30 घायल
हैदराबाद। उस्मानिया विश्वविद्यालय परिसर में श्रीकृष्णा समिति के कार्यक्षेत्र के खिलाफ रैली निकाल रहे छात्रों पर पुलिस द्वारा लाठीचार्ज व हवाई फायरिंग करने से ३० से अधिक लोग घायल हो गये, जिनमें छात्राएं व मीडियाकर्मी शामिल हैं। जवाबी कार्रवाई करते हुए छात्रों ने भी पुलिस पर पथराव किये, जिससे कई पुलिसकर्मी घायल हो गये। पांच घंटे से ज्यादा समय तक दोनों ओर से झ़डपें होती रहीं। विश्वविद्यालय परिसर में तनाव की स्थिति है। इस घटना पर गृहमंत्री सबिता इंद्रा रेड्डी ने कहा कि पुलिस लाठीचार्ज घटना की जांच होगी।
इससे पूर्व, छात्रों द्वारा रैली निकालने की खबर पाते ही पुलिस ने उस्मानिया विश्वविद्यालय परिसर को चारों ओर से घेर लिया और विद्यानगर, जामिया उस्मानिया, सीताफलमंडी गेट, तारनाका व बी छात्रावास से जाने वाले सभी मागा] को बंद कर दिया। पुलिस ने बी छात्रावास की लाइट काट दी, जिससे वहां अंधेरा छा गया। खबर संग्रह करने गये मीडियाकर्मियों को भी परिसर में घुसने से रोक दिया गया।
उस्मानिया विश्वविद्यालय के छात्र संयुक्त कार्रवाई समिति (जेएसी) ने आरोप लगाया है कि पुलिस लाठीचार्ज से कम से कम सात छात्राएं घायल हुई हैं। उन्होंने बताया कि जब छात्राआें ने बी छात्रावास की ओर जाने की कोशिश की, तो पुलिसकर्मियों ने उन्हें पीटा और घसीट कर ले गयी। वहीं, हैदराबाद के संयुक्त पुलिस आयुक्त पीएसआर आंजनेयलु ने कहा है कि छात्रों द्वारा किये गये पथराव में कई पुलिसकर्मी घायल हो गये, जिनमें वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं।पुलिस ने दो विधायकों को विश्वविद्यालय परिसर में घुसने से रोक दिया, जबकि तेलंगाना जेएसी के संयोजक प्रोकोदंडराम को भी अंदर घुसने नहीं दिया गया। इसके अलावा घायलों को चिकित्सा सुविधाएं मुहैया करने पहुंचे उस्मानिया मेडिकल कॉलेज व गांधी मेडिकल कॉलेज के छात्रों को भी बाहर ही रोक दिया गया। इधर, उस्मानिया विश्वविद्यालय में लाठीचार्ज की खबर लगते ही छात्रों व विभिन्न संगठनों के सदस्य स़डकों पर उतर आये और तेलंगाना के समर्थन में नारे लगाने लगे। प्रदर्शनकारियों ने स़डकें जाम कर दीं, जिससे यातायात सेवाएं बाधित हुईं। उधर, वरंगल में भी काकतिया विश्वविद्यालय के छात्र स़डकों पर उतर आये और विरोध प्रदर्शन करने लगे। इसके अलावा पलमूर विश्वविद्यालय के छात्रों ने महबूबनगर में राष्ट्रीय राजमार्ग पर प्रदर्शन किया। तेलंगाना समर्थक छात्रों ने नलगोंडा जिले के सूर्यापेट और मेदक जिले में राष्ट्रीय राजमागा] को जाम कर दिया।
इससे पूर्व, उस्मानिया विश्वविद्यालय के छात्रों ने श्रीकृष्णा समिति के कार्यक्षेत्र के विरोध में इस्तीफा देने वाले विधायकों को बधाई देने के लिए एक रैली निकाली थी। रैली में शामिल छात्र जब तारनाका पहुंचे, तब पुलिस ने उन्हें विश्वविद्यालय परिसर जाने से रोक दिया। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच झ़डप शुरू हो गयी। इस दौरान छात्रों ने पुलिस पर पथराव करना शुरू कर दिया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया, जिसमें कई लोग घायल हो गये। छात्र जब तितरबितर हो रहे थे, तब पुलिसकर्मियों ने मीडियाकर्मियों पर लाठीचार्ज किया। मीडियाकर्मियों में अधिकांश फोटो जर्नलिस्ट तथा सैटलाइट चैनलों के कैमरामैन थे। मीडियाकर्मियों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने आठ कैमरों को त़ोड डाला है। उस्मानिया विश्वविद्यालय की जेएसी के कार्यकारी सदस्य कुमार स्वामी भी घायलों में शामिल हैं। उन्हें सिर पर चोटें आयी हैं। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि पुलिस ने आंसू गैस के गोले भी दागे, हालांकि पुलिस ने इसकी पुष्टि नहीं की है।
प्रत्यक्षदर्शियों ने दावा किया कि उस्मानिया विश्वविद्यालय में पुलिस ने १०८ एंबुलेंस सेवा को भी प्रवेश करने से रोक दिया। विश्वविद्यालय १६ से अधिक पुलिस तथा अर्द्ध सैनिक बलों की प्लाटूनों से घिरा हुआ था। पुलिस ने छात्रों का पीछा किया तथा बी छात्रावास के निकट उनपर लाठियां भांजीं। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि जैसे ही छात्रों ने बलों पर पथराव शुरू किया, तो जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने हवाई फायरिंग की। बताया जाता है कि जब पुलिस ने आवासीय क्षेत्रों में प्रवेश किया, तब मानिकेश्वरनगर के निवासियों ने उनपर पथराव किया।
उधर, तेलंगाना जेएसी के संयोजक प्रोएमकोदंडाराम को भी आज विश्वविद्यालय परिसर में प्रवेश करने से रोक दिया गया। बाद में उन्होंने मीडियाकर्मियों को बताया कि छह छात्रों को गंभीर चोटें आने के कारण उन्हें गांधी अस्पताल भेजा गया है। उस्मानिया विश्वविद्यालय के छात्रों तथा मीडिया पर हुए हमले की निंदा करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने विरोध प्रदर्शन को दबाने के लिए लाठीचार्ज किया है। इस बीच, उस्मानिया विश्वविद्यालय परिसर में स्थिति आज तनावपूर्ण रही और वहां पर अतिरिक्त बल भेजे गये। छात्रों ने पुलिस को विश्वविद्यालय परिसर से हटाने की मांग करते हुए नारेबाजी की।
