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जलवायु परिवतन पर नये सिरे से वाता शुरु

swatantravaarttha  Sat, 19 Dec 2009, IST

जलवायु परिवतन पर नये सिरे से वाता शुरु

कोपनहेगन, १८ दिसबर (भाषा)। जलवायु परिवतन पर एक समझाते को आकार देने की कोशिश के तहत विव के नेताओ ने आज देर रात तक चचा जारी रखी आर इसी के चलते धानमी डामनमोहन सिंह ने भी डेनमाक की राजधानी से अपने थान को टाल दिया। श्री सिंह अमेरिकी राटपति बराक ओबामा तथा अय नेताओ के साथ चचा में शामिल हुए है।

भूमडलीय तापमान में व की चुनाती से निपटने के समाधान पर शिखर समेलन में आम सहमति नहीं बन पाने के चलते बातचीत एक बार फिर शु की गयी है। श्री सिंह की डेनमाक की राजधानी से शाम को रवाना होने की योजना थी, लेकिन वह अमेरिकी राटपति बराक ओबामा की तरह ही आयोजन थल पर लाट आये। ओबामा ने भी अपनी वतन वापसी टाल दी ।

आयोजन थल पर पहचने के तुरत बाद श्री सिंह ने चीन, दक्षिण अफीका आर बाजील के नेताओ के साथ चचा की, ताकि ताजा मसादे के लिये एक रणनीति आर साझा नजरिया तयार किया जा सके। कहा जा रहा ह कि यह मसादा विकासशील देशों कीचिंताओ की तिकिया में होना चाहिये। इन नेताओ ने बाद में ओबामा से मुलाकात की। ओबामा की कोपनहेगन में कुछ ही घटे ठहरने की योजना थी, लेकिन उहोंने भी वापसी के अपने कायकम को बदल दिया।

सयुत राट महासचिव बान की मून के विव नेताओ से उनके थान को एक दिन के लिये टालने का आान करने के बाद इन नेताओ ने अपनी यातरा योजना में बदलाव किये ह। गहन कूटनीतिक गतिविधियों के बीच फास के राटपति निकोलस सारकोजी ने बिटेन के धानमी गाडन बाउन से मुलाकात की।

दिन में एक नया मसादा वितरित किया गया, जिसमें भूमडलीय तापमान में व से निपटने के लिये कानूनी प से बायकारी सधि को दिसबर २०१० की समय सीमा से पहले आकार देने की बात कही गयी, लेकिन भारत आर चीन जसे देश योटो टोकाल को ही जारी रखने पर जोर दे रहे ह, जिसके तहत विकसित देश एक समय सीमा के भीतर उसजन में भारी कटाती करने के लिये बाय ।

समझा जाता ह कि आटेलिया, फास आर डेनमाक ने पूरी कवायद की २०१६ में दोबारा समीक्षा कराने की माग की ह, ताकि टोकाल को भावी तार पर विराम दिया जा सके। शिखर समेलन में उच तरीय बठक को सबोधित करते हए सिंह ने कहा कि योटो टोकाल को एक माय आर वध त बना रहना चाहिये। पक्षों को इसके तहत अपनी गभीर तिबताओ को पूरा करना चाहिये। उहोंने कहा, ‘अगर हम नये आर कमजोर तिबता वाले बदलाव को मान वीकति दे देते ह तो यह अतराटीय जनमत के खिलाफ होगा।’

बहरहाल, श्री सिंह यादा उमीदें नहीं रहने की बात बेबाकी से कहते नजर आये, जब उहोंने कहा कि शिखर समेलन का नतीजा हमारी अपेक्षाओ से कुछ कम रह सकता ह। भारत आर अय विकासशील देश विकसित विव से कानूनी प से बायकारी आर सुपट आवासन लेने पर जोर दे रहे ह, जिसमें यह उलेख हो कि एक निचित समय सीमा के भीतर वे गीन हाउस गसों के उसजन में ठोस कमी लायेंगे।

विकासशील देशों का यह ख ह कि चूकि विकसित देश पयावरण में सबसे यादा दूषण फलाते है, लिहाजा उहें जलवायु परिवतन का असर कम करने के लिये बडी जिमेदारी भी उठानी चाहिये।


आयोजन थल पर पहचने के तुरत बाद श्री सिंह ने चीन, दक्षिण अफीका आर बाजील के नेताओ के साथ चचा की, ताकि ताजा मसादे के लिये एक रणनीति आर साझा नजरिया तयार किया जा सके। कहा जा रहा ह कि यह मसादा विकासशील देशों कीचिंताओ की तिकिया में होना चाहिये। इन नेताओ ने बाद में ओबामा से मुलाकात की। ओबामा की कोपनहेगन में कुछ ही घटे ठहरने की योजना थी, लेकिन उहोंने भी वापसी के अपने कायकम को बदल दिया।

सयुत राट महासचिव बान की मून के विव नेताओ से उनके थान को एक दिन के लिये टालने का आान करने के बाद इन नेताओ ने अपनी यातरा योजना में बदलाव किये ह। गहन कूटनीतिक गतिविधियों के बीच फास के राटपति निकोलस सारकोजी ने बिटेन के धानमी गाडन बाउन से मुलाकात की।

दिन में एक नया मसादा वितरित किया गया, जिसमें भूमडलीय तापमान में व से निपटने के लिये कानूनी प से बायकारी सधि को दिसबर २०१० की समय सीमा से पहले आकार देने की बात कही गयी, लेकिन भारत आर चीन जसे देश योटो टोकाल को ही जारी रखने पर जोर दे रहे है, जिसके तहत विकसित देश एक समय सीमा के भीतर उसजन में भारी कटाती करने के लिये बाय है ।

समझा जाता ह कि आटेलिया, फास आर डेनमाक ने पूरी कवायद की २०१६ में दोबारा समीक्षा कराने की माग की ह, ताकि टोकाल को भावी तार पर विराम दिया जा सके। शिखर समेलन में उच तरीय बठक को सबोधित करते हए सिंह ने कहा कि योटो टोकाल को एक माय आर वध त बना रहना चाहिये। पक्षों को इसके तहत अपनी गभीर तिबताओ को पूरा करना चाहिये। उहोंने कहा, ‘अगर हम नये आर कमजोर तिबता वाले बदलाव को मान वीकति दे देते है तो यह अतराटीय जनमत के खिलाफ होगा।’

बहरहाल, श्री सिंह यादा उमीदें नहीं रहने की बात बेबाकी से कहते नजर आये, जब उहोंने कहा कि शिखर समेलन का नतीजा हमारी अपेक्षाओ से कुछ कम रह सकता ह। भारत आर अय विकासशील देश विकसित विव से कानूनी प से बायकारी आर सुपट आवासन लेने पर जोर दे रहे ह, जिसमें यह उलेख हो कि एक निचित समय सीमा के भीतर वे गीन हाउस गसों के उसजन में ठोस कमी लायेंगे।

विकासशील देशों का यह ख ह कि चूकि विकसित देश पयावरण में सबसे यादा दूषण फलाते ह, लिहाजा उहें जलवायु परिवतन का असर कम करने के लिये बडी जिमेदारी भी उठानी चाहिये।

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