अपनी रेखा ब़डी करें, दूसरे की रेखा छोटी न करें
इंदौर। वर्ष २००४ में लोकसभा चुनाव हारने के बाद से पार्टी के शीर्ष नेताआें के बीच मचे घमासान का क़डाई से संज्ञान लेते हुए संघ से आशीर्वाद प्राप्त नेता नितिन गडकरी ने आज कहा कि भाजपा में प्रश्न छोटे कार्यकर्ताआें ने नहीं, बल्कि ‘उन ब़डे नेताआें’ ने ख़डे किए, जिन्हें पार्टी ने ‘बहुत कुछ दिया’ है।
गडकरी ने भाजपा अध्यक्ष बनने के बाद पार्टी की पहली राष्ट्रीय कार्यकारिणी और राष्ट्रीय परिषद की बैठक को संबोधित करते हुए यहां कहा, ‘पार्टी के नेताआें को यह आत्मनिरीक्षण करना होगा कि वह राजनीति अपने भविष्य के लिए कर रहे हैं या पार्टी के भविष्य के लिए।’ पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राजनाथ सिंह के कार्यकाल पर एक तरह से प्रश्नचिह्न लगाते हुए गडकरी ने कहा कि भाजपा में प्रश्न छोटे कार्यकर्ताआें की वजह से नहीं, बल्कि उन ब़डे नेताआें की ओर से ख़डे होते हैं, जिन्हें पार्टी ने बहुत कुछ दिया है।
उन्होंने बहुत ही क़डे शब्दों में पार्टी के नेताआें से कहा, ‘अपनी रेखा ब़डी करें, दूसरे की रेखा छोटी करने की कोशिश न करें।’ गडकरी ने कहा, ‘सभी नेता इस बात का ध्यान रखें कि आदर आपको अपने आचरण से मिलना चाहिए और आदर की अपेक्षा नहीं करनी चाहिए।’ भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि छोटे दिल से ब़डे लक्ष्य हासिल नहीं किए जा सकते हैं। इस संदर्भ में उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की कविता की ये पंक्तियां दोहराईं ‘छोटे मन से कोई ब़डा नहीं होता, टूटे मन से कोई ख़डा नहीं होता।’ पार्टी में चुनाव के टिकटों के बंटवारे में भाईभतीजावाद की बीमारी का संकेत देते हुए गडकरी ने कहा, ‘पार्टी में कई बार तेरामेरा के आधार पर टिकट दिए जाते हैं। ऐसे में वे लोग टिकट से वंचित रह जाते हैं, जो चुनाव जीतने का दम रखते हैं।’ उन्होंने कहा कि इस संदर्भ में जवाबदेही तय होनी चाहिए। पार्टी की स्थिति पर यह क़डी टिप्पणी करने के साथ ही उन्होंने कहा कि निराश होने की जरूरत नहीं है, बल्कि स्थिति से उबरने की आवश्यकता है। गडकरी ने कहा, ‘मानव हारने से नहीं, बल्कि मैदान छ़ोडने से पराजित होता है। इसलिए एक नए संकल्प से पार्टी को मजबूत करने की जरूरत है।’
उन्होंने कहा, ‘इन हालात से हमें जरा भी कमजोर होने की जरूरत नहीं है। नौ राज्यों में अभी भी हमारी सरकारें हैं और हजार से अधिक हमारे विधायक हैं। पौने दो सौ सांसद हैं। अत: सकारात्मक दृष्टिकोण और ब़डा दिल तथा मानवीय संबंध अच्छे रखकर हमें आगे की ओर ब़ढना चाहिए।’
उधर, संप्रग सरकार को निशाने पर लेते हुए गडकरी ने सीधे आरोप लगाया कि अमेरिका के दबाव में केंद्र सरकार जम्मूकश्मीर में भारत के नियंत्रण को कमजोर करने और छ़ोडने की ओर आगे ब़ढ रही है।
