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तालिबान ने दो सिखों के सिर कलम किए

Swatantra Vaartha  Mon, 22 Feb 2010, IST

तालिबान ने दो सिखों के सिर कलम किए

पेशावर/इस्लामाबाद। पाकिस्तानी तालिबान ने देश के अशांत कबाइली इलाके में फिरौती के लिए अगवा किए गए दो सिखों के सिर कलम कर दिए, जो आतंकवादियों की बर्बरता का एक और उदाहरण है। अल्पसंख्यक समुदाय के कुछ और लोग अब भी आतंकवादियों के कब्जे में हैं।

सूत्रों ने आज रात बताया कि जसपाल सिंह का शव खैबर कबाइली इलाके में मिला, जो प्रांतीय राजधानी पेशावर से कुछ ही दूरी पर है। महाल सिंह का शव औराकजई एजेंसी में पाया गया। खैबर एजेंसी के बारा इलाके से तहरीकएतालिबान पाकिस्तान द्वारा अगवा किए गए सिखों की संख्या के बारे में अभी भ्रम की स्थिति बनी हुई है। एक सूत्र का कहना है कि चार सिखों को अगवा किया गया था, जबकि एक अन्य खबर के मुताबिक अपहृत किए गए कुल लोगों की संख्या छह है।

इन सिखों को ३४ दिन पहले अगवा किया गया था और तालिबान ने उनकी रिहाई के लिए तीन कऱोड रुपये की फिरौती मांगी थी। सूत्रों का कहना है कि रकम अदायगी की तय तारीख गुजरने के बाद इनमें से दो सिखों के सिर कलम कर दिए गए। पश्चिमोत्तर सीमांत प्रांत के मंत्री बशीर अहमद के मुताबिक संघ प्रशासित कबाइली इलाकों यानी फाटा में कारोबार करने वाले तीन सिखों का तालिबान ने अपहरण किया और उनमें से दो का ‘कत्ल’ कर दिया।

सूत्रों का कहना है कि गुरविंदर सिंह और गुरजीत सिंह अभी भी आतंकवादियों के चंगुल में हैं। इन लोगों का अपहरण उस इलाके से किया गया था, जहां सरकार का सीधा कोई नियंत्रण नहीं है और वहां आतंकवादियों की स्थिति मजबूत है। संघ प्रशासित कबाइली इलाका यानी फाटा के पूर्व सुरक्षा सचिव ब्रिगेडियर मेहमूद शाह ने तालिबान की इस हरकत को जघन्य बताया है और कहा है कि इस घटना की क़डी से क़डी निंदा होना चाहिए।

उन्होंने एक टीवी न्यूज चैनल से कहा, ‘यह वाकई एक जघन्य हरकत है। यह वाकई शर्मनाक है।’ एक अनुमान के मुताबिक पश्चिमोत्तर सीमांत प्रांत और कबाइली इलाके में लगभग १० हजार सिख रहते हैं। ये उन सिखों के वंशज हैं, जिन्होंने वर्ष १९४७ के बंटवारे के दौरान भारत नहीं जाने का विकल्प चुना था। इससे पहले वर्ष २००९ में पश्चिमोत्तर सीमांत प्रांत में तालिबान ने अल्पसंख्यक सिख आबादी को धार्मिक कर के रूप में सालाना लाखों रुपये देने पर विवश किया था। सुरक्षाबलों और तालिबान के बीच मुठभ़ेड के बाद पलायन के लिए मजबूर हुआ सिख समुदाय अनिश्चित भविष्य का सामना कर रहा है।

इधर, तालिबान द्वारा दो सिखों का सिर कलम किए जाने की खबरों पर भारत ने आज रात स्तब्धता जाहिर की, लेकिन सरकार ने फौरी तौर पर कोई टिप्पणी नहीं की, जो ब्याैेरे की प़डताल कर रही है। आधिकारिक सूत्रों ने नई दिल्ली में कहा, ‘मीडिया में आई इन खबरों से हम वाकिफ हैं। यदि यह सत्य है, तो स्तब्ध कर देने वाली बात है। हम तथ्यों की जांच कर रहे हैं।’

भाजपा ने आज इस जघन्य कार्रवाई की क़डी भर्त्सना की और अपहृत सिखों की रिहाई के लिए समय रहते राजनयिक दबाव नहीं बनाने के लिए सरकार के रवैये को ‘संवेदनाहीन’ होने का मामला बताया। भाजपा प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने कहा, ‘पाकिस्तान में सिख समुदाय के लोगों को इस तरह कत्ल किए जाने की भाजपा क़डी भर्त्सना करती है। इससे पता चलता है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ कैसा बर्ताव किया जाता है। उन्हें कोई सुरक्षा नहीं दी जाती।’ उन्होंने भारत सरकार की भी आलोचना की और आरोप लगाया कि ऐसे मामलों से निपटने के लिए पाकिस्तान के प्रति उसका रुख लचर रहा है।

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