तेलंगाना के कांग्रेस सांसदों का संसद में प्रदर्शन
नई दिल्ली। तेलंगाना मुद्दे पर क्षेत्र के कांग्रेसी सांसदों ने आज अपनी आवाज बुलंद करते हुए संसद के समक्ष धरना दिया। सांसदों ने राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल के संबोधन में तेलंगाना मुद्दे का जिक्र नहीं होने के बाद संसद के सेंट्रल हॉल के अंदर भी प्रदर्शन किया।
तेलंगाना क्षेत्र के कांग्रेस सांसदों ने आज प्रधानमंत्री डॉमनमोहन सिंह से भी मुलाकात की, जिन्होंने संसद सदस्यों से कहा कि सरकार लंबित मुद्दे का समाधान निकालने के लिये काम कर रही है। निजामबाद से सांसद मधु यास्की ग़ौड ने संवाददाताआें से कहा, ‘हमने आज प्रधानमंत्री से मुलाकात की और उन्हें तेलंगाना के लिये चल रहे विरोध प्रदर्शन की गंभीरता के बारे में बताया। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह गंभीर स्थिति है और सरकार इस समस्या के समाधान के लिये काम कर रही है। उन्होंने विरोध प्रदर्शनों के दौरान लोगों की मौत होने पर भी चिंता जतायी।’ ग़ौड ने कहा कि सांसदों की इस मुद्दे पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से भी मुलाकात करने की योजना है। जब उन्हें मिलने का समय मिल जायेगा, तब वे मुलाकात करेंगे। सांसदों ने कांग्रेस के आंध्र प्रदेश मामलों के प्रभारी एमवीरप्पा मोइली से भी मुलाकात की।ग़ौड ने कहा, ‘हमारी मांगें ये हैं कि इस मुद्दे पर फैसला करने के लिये निर्धारित समयावधि को कम किया जाये और पृथक राज्य के गठन के मुद्दे पर गत नौ दिसंबर को आये केंद्रीय गृह मंत्री चिदंबरम के वक्तव्य को इस मुद्दे पर गौर करने के लिये गठित श्रीकृष्णा समिति के कार्यक्षेत्रों में शामिल किया जाये।’
ग़ौड ने कहा कि उन्हें मिलाकर छह से अधिक सांसदों ने तब काली कमीज पहनकर पृथक तेलंगाना राज्य के समर्थन में तख्तियां लहरायीं, जब राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल संसद के दोनों सदनों को संबोधित कर रही थीं। राष्ट्रपति के संबोधन में तेलंगाना का कोई जिक्र नहीं था। सांसद ने इन बातों को खारिज कर दिया कि ऐसा करने से संसद की गरिमा कम हुई है। ग़ौड ने कहा कि यह शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का गांधीवादी तरीका था।पृथक तेलंगाना मुद्दे को राष्ट्रपति के अभिभाषण में जगह नहीं दिये जाने को लेकर सांसदों के विरोध के बाद कांग्रेस ने यह कहते हुए उन्हें शांत कराने की कोशिश की कि इसका यह मतलब नहीं है कि सरकार ने इस मुद्दे को छ़ोड दिया है।
कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने संवाददाताआें को बताया, ‘कोई जरूरी नहीं कि राष्ट्रपति हर मुद्दे पर टिप्पणी करें, लेकिन किसी मुद्दे का जिक्र नहीं किये जाने का मतलब यह नहीं है कि उसे सरकार और कैबिनेट की नीति से बाहर कर दिया गया है। सिंघवी ने कहा कि ऐसा नहीं है कि सरकार इस मुद्दे को प्राथमिकता नहीं दे रही है। इसे इतनी तरजीह मिली है कि अब यह आयोग की प्रक्रिया में चला गया है।उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर व्यापक नजरिया तैयार किया जा रहा है, क्योंकि विस्तृत बातचीत के बाद आयोग का गठन किया गया और अब इस प्रक्रिया में जितना समय लगता है, लगने देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि प्रक्रिया के बिना इस मुद्दे को उछालने से केवल इसकी प्रगति पर असर ही प़डेगा।
