भारत हमें उपदेश न दे ः पाक
नई दिल्ली। चौदह महीने के अंतराल के बाद द्विपक्षीय वार्ता बहाल करते हुए भारत ने आज पाकिस्तान को आतंकवाद पर तीन दस्तावेज (डोजियर) सौंपे, लेकिन पाकिस्तान का रुख एकदम अलग रहा और उसने कश्मीर को प्रमुख मुद्दा बताकर उस पर जोर दिया तथा कहा कि भारत उसे उपदेश न दे कि उसे क्या करना चाहिए।
भारत की पहल पर विदेश सचिव निरुपमा राव और उनके पाकिस्तानी समकक्ष सलमान बशीर के बीच मैराथन बैठक तीन घंटे से अधिक समय तक चली और इसे भारतीय पक्ष ने उपयोगी करार दिया, जबकि बशीर ने कहा कि वह वार्ता का ब़डी सफलता के रूप में या कामयाबी अथवा नाकामी के नजरिये से चरित्रचित्रण नहीं करेंगे।
भारत द्वारा सौंपे गये तीन दस्तावजों में ३४ आतंकवादियों के नाम हैं, जिनमें भारत की ओर से वांछित लश्करएतैयबा प्रमुख हाफिज सईद का नाम भी शामिल है। इसमें यह मांग की गयी है कि इन आतंकवादियों को सौंपा जाये और अन्य प्रभावी कदम उठाये जायें। बशीर ने सईद के बारे में भारत की ओर से दी गयी जानकारी को ‘सबूत कम और साहित्य ज्यादा’ करार देते हुए उसे मानने से इंकार कर दिया। गौरतलब है कि सईद ने गत पांच फरवरी को कहा था कि एक मुंबई हमला पर्याप्त नहीं है। बशीर ने कहा, ‘हमें जानकारी के तीन सेट मिले हैं। हम इन पर गंभीरता से गौर करेंगे। बैठक में कश्मीर के बारे में क्या बात हुई, इस बारे में निरुपमा और बशीर ने अलगअलग बात कही। निरुपमा ने जहां कहा कि इस मुद्दे पर संक्षिप्त तौर पर चर्चा हुई, वहीं बशीर ने कहा कि वह इस नजरिये का समर्थन नहीं करते, क्योंकिप्रमुख मुद्दे पर व्यापक चर्चा हुई है। दोनों पक्षों ने गौर किया कि संबंधों में विश्वास की कमी है और फैसला किया वे विश्वास बहाली के लिये ‘संपर्क में रहना और कोशिशें करना जारी रखेंगे। निरुपमा ने कहा, ‘हमने विश्वास पुनर्निर्माण करने के लिहाज से पहले कदम की योजना बनायी और मेरा मानना है कि पाकिस्तानी विदेश सचिव के साथ मेरी मुलाकात ने पहला कदम बनाया है। उन्होंने कहा कि बातचीत का काफी हिस्सा आतंकवाद पर केंद्रित रहा और इस दौरान पाकिस्तान में तालिबान द्वारा एक सिख का सिर कलम करने की घटना के बारे में चिंता जतायी गयी।
बशीर ने कहा कि कश्मीर के अलावा जल विवाद का मुद्दा भी वार्ता में उठा। उन्होंने यह भी दावा किया कि बलूचिस्तान और अन्य हिस्सों में अशांति भ़डकाने में भारत की संलिप्तता के बारे में पाकिस्तान के पास ‘पर्याप्त सबूत’ हैं।
यह एक ऐसा आरोप है, जिसे निरुपमा ने बेबुनियाद बताकर सिरे से खारिज कर दिया।
पाकिस्तानी पक्ष ने इस पर भी जोर दिया कि ‘कोई भी कश्मीर मुद्दे के प्रति उपेक्षापूर्ण नहीं रह सकता और इस मुद्दे को नजरअंदाज करने की कोई भी कोशिश मददगार नहीं होगी। पाकिस्तान कश्मीर की जनता के संघर्ष को राजनीतिक, कूटनीतिक और नैतिक समर्थन देना जारी रखेगा। उन्होंने प्रधानमंत्री डॉमनमोहन सिंह की तारीफ करते हुए कहा कि भारतीय नेता के पास शांतिपूर्ण तथा खुशहाल दक्षिण एशिया के लिये एक दृष्टिकोण है।
भारत पर पाकिस्तान का आतंकवाद के स्रोत के तौर पर चित्रण करने का आरोप लगाते हुए बशीर ने कहा कि पाकिस्तान नहीं चाहता कि आतंकवाद पर उसे उपदेश दिये जायें, क्योंकि वह जानता है कि आतंकवाद से कैसे निपटा जाये।
उन्होंने कहा, ‘अगर आप यह कहते रहें कि आपकी सभी मुश्किलों का स्रोत पाकिस्तान है, तो मुझे खेद है कि यह अदूरदर्शिता होगी। बशीर ने कहा कि हमने हमारी बात कही। हमने कोशिशें की हैं, लेकिन हम हताश नहीं हैं।
निरुपमा ने कहा कि उन्होंने पाकिस्तानी समकक्ष से कहा है कि ‘आतंकवाद किसी उद्देश्य को आगे नहीं ब़ढा सकता, बल्कि वह निरर्थक हिंसा को ही आगे ब़ढाता है और यह पाकिस्तान का नैतिक कर्तव्य है कि वह उसकी सरजमीं से गतिविधियां चलाने वाले सभी आतंकवादी समूहों का सफाया करे, फिर भले ही वे किसी भी विचाराधारा के हों या उनका कोई भी एजेंडा हो। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के मुद्दे को व्यापक तौर पर उठाना और इसके चलते दोनों देशों के बीच समग्र संबंधों की प्रक्रिया को रोकना अनुचित, अवास्तविक और प्रतिकूल है।
बशीर ने कहा कि बिना किसी सार तत्व के बातचीत की तस्वीर निर्मित करने के ये मायने हैं कि हम संबंधों या मुद्दों को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। पाकिस्तान के शीर्ष राजनयिक ने कहा कि उनका देश ‘दिखावटी संवाद’ में यकीन नहीं रखता और वह नहीं चाहता कि भारत उससे यह मांग करते हुए उपदेश दे कि उसे यह करना चाहिये या वह करना चाहिये। बशीर का यह मत था कि दोनों देशों के बीच ‘अपेक्षाआें और अविश्वास’ का ब़डा अंतर आज मौजूद है।
दस्तावेज में पाक के सेवारत अधिकारी के नाम का जिक्र
भारत की ओर से आज पाकिस्तान को सौंपे गये तीन में से एक दस्तावेज में पाकिस्तान के एक सेवारत सैन्य अधिकारी के नाम का जिक्र किया गया है। मुंबई आतंकवादी हमलों में इस अधिकारी के संदिग्ध रूप से शामिल रहने को लेकर उसके नाम का जिक्र है।
सूत्रों ने आज बताया कि दस्तावेज में एक अन्य अधिकारी का भी नाम है, जो मेजर के रूप में सेवानिवृत्त हो गया है। इन दोनों अधिकारियों के नाम ‘मेजर इकबाल’ और मेजर ‘समीर अली’ बताये गये हैं।
भारत ने मेजर इकबाल और ‘जमात उद दावा’ (जेयूडी) के नेतृत्वकर्ता एवं मुंबई हमलों के संदिग्ध मास्टरमाइंड हाफिज सईद सहित आठ लोगों का नाम लिया है।
उधर, पाकिस्तान के वार्ता के लिए ‘बेताब’ नहीं होने के तर्क के जवाब में भारत ने आज रात कहा कि वह भी वार्ता के लिए बेताब नहीं है।
पाकिस्तान के विदेश सचिव सलमान बशीर द्वारा पत्रकार वार्ता के बाद सरकारी सूत्रों ने कहा कि वार्ता का प्रस्ताव देकर भारत ने विश्वास बनाने का गंभीर प्रयास किया, जिसके बाद वह देख रहा था कि पाकिस्तान भारत की आतंकवाद संबंधी चिंता पर कैसे प्रतिक्रिया देता है।
सूत्रों ने कहा कि अपने लोगों की सुरक्षा भारत सरकार की सबसे ब़डी प्राथमिकता थी और इसी संदर्भ में वह इस बात का दबाव डाल रहा है कि पाकिस्तान से भारत के खिलाफ उपजने वाले आतंकवाद के खिलाफ वह ठोस कार्रवाई करे।
