नानाजी देशमुख नहीं रहे
सतना (मध्यप्रदेश)। प्रबुद्ध समाजसेवी और विचारक नानाजी देशमुख का आज शाम यहां से ८० किलोमीटर दूर सद्गुरु सेवासंघ अस्पताल में निधन हो गया। वह ९५ वर्ष के थे। नानाजी देशमुख लंबे समय तक जनसंघ और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से ज़ुडे रहे, लेकिन स़ाढे चार दशक पूर्व उन्होंने खुद को राजनीति से अलग कर लिया और आदर्श समाज के निर्माण का ब़ीडा उठाया। कुछ समय से बीमार चल रहे नानाजी को आज सुबह सीने में दर्द की शिकायत के बाद अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली।
महाराष्ट्र में जन्मे और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के जीवनव्रती प्रचारक नानाजी का जन्म महाराष्ट्र में हुआ था और वे राज्यसभा के सदस्य रह चुके थे। आजीवन समाज सेवा का व्रत ले चुके नानाजी ने दीनदयाल शोध संस्थान की स्थापना करके उत्तर प्रदेशमध्य प्रदेश सीमा के दोनों तरफ के क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और लोगों को आर्थिक दृष्टि से आत्मनिर्भर बनाने के लिए सराहनीय काम किया और देश के प्रतिष्ठित अलंकरण पद्मविभूषण से अलंकृत किये गये थे। उन्होंने दोनों राज्यों के पांच सौ सीमावर्ती गांवों में शिक्षा के प्रचारप्रसार और लोगों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए उल्लेखनीय काम किया है। नानाजी आरएसएस से जनसंघ में गये थे। उन्होंने ६० साल की उम्र पूरी होते ही राजनीति छ़ोड दी थी, क्योंकि उनका मानना था कि ६० साल की उम्र के बाद व्यक्ति को राजनीति छ़ोड देनी चाहिए। इसके बाद वह नयी ऊर्जा के साथ रचनात्मक कार्य में लग गये।
इस बीच, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष डॉरमापति राम त्रिपाठी एवं अन्य भाजपा नेताआें ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है और कहा है कि उनकी नि:स्वार्थ समाज सेवा मौजूदा एवं आने वाली पी़ढयों को हमेशा प्रेरण देती रहेगी। नानाजी देशमुख को लोकनायक जयप्रकाश नारायण और इंडियन एक्सप्रेस के रामनाथ गोयनका का बहुत करीबी माना जाता था।
वह राजनीति में अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी जैसे भाजपा के नेताआें से वरिष्ठ थे और भाजपा के गठन के काफी पहले राजनीति को अलविदा कह चुके थे। नानाजी ने अपने जीवनकाल में दीनदयाल शोध संस्थान, ग्रामोदय विश्वविद्यालय और बालजगत जैसे सामाजिक संगठनों की स्थापना की। उन्होंने उत्तरप्रदेश के गोंडा जिले में भी उल्लेखनीय सामाजिक कार्य किया था। उन्हें १९९९ में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। चित्रकूट स्थित दीनदयाल शोध संस्थान में पधारे पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने नानाजी देशमुख द्वारा कमजोर वर्ग के उत्थान में उठाए गए कदमों की सराहना की और इस क्षेत्र में उनकी उपलब्धियों को अनुकरणीय बताया। नानाजी उस वक्त विवाद के घेरे में आ गये, जब १९८४ में उन्होंने कहा था कि अब समय आ गया है कि संघ राजीव गांधी के साथ ख़डा रहे।
आरएसएस के वरिष्ठ नेता शत्री का निधन
उधर, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ नेता श्रीपति शत्री का आज पुणे के एक अस्पताल में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वह ७५ साल के थे। अस्पताल के सूत्रों ने यह जानकारी दी। वह इतिहास के विद्वान थे। संघ के प्रचारक के रूप में शत्री ने पांच दशकों तक काम किया। उन्होंने विवाह नहीं किया था।
