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सइद की नकेल कसे पाक : भारत

Swatantra Vaartha  Wed, 3 Mar 2010, IST

सइद की नकेल कसे पाक : भारत

मुंबई हमलों में लशकर प्रमुख की भूमिका की जाँच हो

नइ दिलली, । भारत ने आज इस बात पर खेद जताया कि पाकितान सरकार ने लकरएतयबा के मुख हाफिज सइद को भडकाऊ आर कपटपूण भाषण देने की छूट दे रखी है तथा इस बात पर बल दिया कि मुबइ में २६/११ के हमलों में सइद की भूमिका की जाच की जाये। गहमी ने यहा सवाददाता समेलन में कहा, ‘हमने जो सूचनाए उपलध करायी है, उसके आधार पर कोइ भी जिमेदार सरकार हाफिज सइद की भूमिका की जाच करेगी। उसकी भूमिका की जाच की बजाय पाकितान सरकार उससे भडकाऊ आर कपटपूण भाषण देने की छूट दे रही है। यह बेहद खेदजनक ह।’

भारतीय विदेश सचिव निपमा राव ने २५ फरवरी को अपने पाकितानी समकक्ष सलमान बशीर को तीन डोजियर सापे ह, जिनमें सइद सहित ३४ वाछित आतकवादियों के नाम है। इसमें इन आतकियों को सापने के साथसाथ भावी कदम उठाने को कहा गया है। चिदबरम ने कहा, ‘गहमालय ारा तयार किये गये तीन डोजियरों को हमारी विदेश सचिव ने पाकितान के विदेश सचिव को सापा है। हमें उमीद ह कि पाकितान इन तीनों डोजियर में उलिखित ययाेिं के खिलाफ कारवाइ करेगा।’

चिदबरम ने कहा कि सात फरवरी को हए मुयमयाेिं के समेलन से पहले वितरित १५ सूी नावली के जवाब के आधार पर सरकार ने येक राय में पुलिस की क्षमता आर तयारी के आधार पर एक आधार रेखा तयार की ह। उहोंने कहा, ‘यह मेरा यास होगा कि रायों को आधार रेखा को बेहतर बनाने के लिए ाेसाहित किया जाये तथा सुरक्षा से निपटने की क्षमता आर चुनातियों को बढावा दिया जाये। यह यान देने की बात ह कि समेलन में एक भी विरोध का वर नहीं उठा। उेय के लिए एकजुटता की भावना का सुखद सकेत है।’

यह पूछे जाने पर कि पथक तेलगाना राय की माग पर विचार के लिए गठित यायमूति श्रीकणा समिति की या कोइ कानूनी मायता ह, चिदबरम ने कहा, ‘समिति पूरी तरह से कानूनी ढग से माय ह। इस मामले मे किसी कार का सदेह य करने का कोइ आधार नहीं ह। इसका गठन सरकार के कायपालिका आदेश से हआ है।’ छोटे रायों के बारे में उनके पूव के विचार पूछे जाने पर गहमी ने कहा कि उहोंने पूव में जो भी कहा था, वे उनके निजी विचार थे। गह मी ने कहा, ‘मने एक यति के तार पर जो कहा, उसे म वापस नहीं लूगा, लेकिन अब मेरे विचार सरकार के विचार ह। सरकार जो फसला करती है, म वहीं बोलता है, मुझे लगता है कि भारतीय मीडिया इस साइ को समझने लायक परिपव हो गया ह कि लोग सरकार के बाहर हो सकते है, लोग सरकार के भीतर भी आ सकते है।’

चिदबरम ने माओवादियों की सघषविराम की पेशकश को ‘विचि’ बताते हए कहा कि यह अजीब ह कि सरकार के सामने शाति ताव रखने के बाद वे सुरक्षा बलों पर हमला भी कर रहे ह।

चिदबरम ने कहा, ‘यह एक अजीबोगरीब पेशकश ह, तथाकथित शाति ताव किये जाने के बमुकिल तीन घटे बाद ही भाकपा (माओवादी) ने पचिमी मिदनापुर के लालगढ में पुलिस आर सीआरपीएफ के सयुत गती दल पर हमला भी किया।’ गारतलब है कि माओवादी नेता किशनजी ने पिछली २२ फरवरी को सरकार के सामने ७२ दिनों के सघषविराम की पेशकश की थी।

चिदबरम ने कहा कि सघषविराम की पेशकश के बाद के सात दिनों में बिहार, छाीसगढ, झारखड, उडीसा आर पचिम बगाल में हिंसा की १८ वारदात हो चुकी है। गहमी ने कहा कि उहोंने भाकपा (माओवादी) से बातचीत की पेशकश की ह, बशर्ते वे हिंसा का राता छोड दें।

उहोंने कहा कि उस ताव पर कोइ अथपूण तिकिया नहीं मिली है। पिछली २३ फरवरी को मने कहा था कि भाकपा माओवादी अगर हिंसा छोडने के सिलसिले में एक सामाय आर शतरहित बयान जारी करे, तो सरकार उससे बातचीत करने को तयार है, मगर मुझे अपने बयान पर कोइ तिकिया नहीं मिली है।


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