भारतपाक के बीच ‘तीसरा’ स्वीकार्य नहीं
नई दिल्ली। भारतपाक के बीच बहाल हुई वार्ता को जायज ठहराते हुए प्रधानमंत्री डॉमनमोहन सिंह ने दोनों देशों के बीच संबंधों में किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता से साफ इंकार किया। उन्होंने विपक्ष के इन आरोपों को खारिज कर दिया कि कृषि क्षेत्र में भारत अमेरिका की गुलामी कर रहा है। श्री सिंह ने कहा कि विपक्ष न तो कोई गलतफहमी पाले और न ही देश को गुमराह करे।
अर्थव्यवस्था के दोहरे अंकों की विकास दर के रास्ते पर आने की गुलाबी तस्वीर पेश करते हुए आर्थिक मोर्चे पर उन्होंने स्वीकार किया कि चीनी क्षेत्र में कमजोरी रही है और सरकार इसके उतारच़ढाव के चक्रीय रुझानों का उचित प्रबंधन नहीं कर पायी। भारतपाक संबंधों को लेकर भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी सहित कई विपक्षी सदस्यों द्वारा अमेरिका के आगे घुटने टेकने के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्होंने कहा, ‘मैं सदन को आश्वासन देता हूं कि हम किसी मध्यस्थ को स्वीकार नहीं करेंगे। हम (पाकिस्तान से) सीधे बात करेंगे।’ अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा द्वारा जम्मूकश्मीर मसला हल करने के लिए भारत पर कथित रूप से दबाव डालने के आडवाणी के आरोपों का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, ‘राष्ट्रपति ओबामा से कई बार बात हुई है और मैंने स्पष्ट रूप से कहा है कि भारत पर दबाव नहीं डाला जा सकता है। उन्होंने हमेशा हमारी स्थिति को समझा।’ अमेरिकी दबाव का आरोप लगाने वालों से उन्होंने कहा, ‘जो संवेदनशील मुद्दे हैं, उन पर गलत जानकारी न दें।’
अपनी हाल की सऊदी अरब यात्रा की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि सऊदी नेताआें के साथ बातचीत में उन्होंने यही कहा कि पाकिस्तान को आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मध्यस्थता का कोई प्रस्ताव नहीं किया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतपाकिस्तान के बीच किसी की मध्यस्थता की कोई जरूरत नहीं है। देश की खेती को अमेरिका के हाथ गुलाम बनाने के भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी के आरोप पर प्रधानमंत्री ने कहा, ‘डाक्टर जोशी ने कृषि में अमेरिकी गुलामी की बात कही है। मैं आश्वस्त करना चाहता हूं कि कोई गलतफहमी न पालें। इसकी कोई गुंजाइश नहीं है।’ दोनों ही सदनों ने विपक्ष द्वारा पेश संशोधनों को नामंजूर करते हुए ध्वनिमत से राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। राज्यसभा में संशोधन पेश करने वाले अधिकांश सदस्य मौजूद नहीं थे और जो उपस्थित थे, उन्होंने अपने संशोधन वापस ले लिये।
इससे पहले राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री ने दोनों ही सदनों में कहा कि पाकिस्तान के साथ समस्याआें के समाधान के लिए वार्ता जरूरी है, लेकिन साथ ही यह भी सच है कि किसी भी सार्थक वार्ता के लिए पाकिस्तान नियंत्रित भूमि से आतंकी मशीन पर लगाम लगाना आवश्यक है, भले ही वह नान स्टेट ऐक्टर्स का काम क्यों न हो। मेरा कभी इस बात पर विश्वास नहीं रहा कि पाकिस्तान के साथ संवाद के चैनल टूट जाएं। जिस समय शीतयुद्ध अपने चरम पर था, तब भी अमेरिकी और सोवियत संघ एकदूसरे से बातचीत करते थे।’ पिछले तीन दिन से आडवाणी और श्री सिंह के बीच तकरार आज भी जारी रही। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘आडवाणीजी ने पूर्व सैनिकों के एक रैंक एक पेंशन का मुद्दा उठाया है। उन्होंने कहा है कि पिछले वर्ष स्वतंत्रता दिवस के अपने भाषण में मैंने और वित्त मंत्री ने छह जुलाई, २००९ के अपने बजट भाषण में जो वायदे किये थे, उन्हें पूरा नहीं किया गया। यह सच नहीं है।’
श्री सिंह ने कहा कि पिछली संप्रग और इस बार की संप्रग सरकार दोनों का रुख है कि चुनाव सुधार केवल व्यापक राजनीतिक आम सहमति से ही किये जाने चाहिए। महंगाई को चिंता का विषय बताते हुए प्रधानमंत्री ने संकेत दिया कि राहत पहुंचाने का कोई भी व्यावहारिक तरीका अपनाने को सरकार तैयार है। खाद्य पदाथा] की कीमतें ब़ढना चिंता का विषय है, लेकिन राहत पहुंचाने का यदि कोई भी व्यावहारिक तरीका अपनाने की बात होगी, तो सरकार उसके प्रति संवेदनशील रहेगी। श्री सिंह ने कहा कि खाद्यान्न की स्थिति को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि देश के पास पर्याप्त अनाज भंडार हैं। रबी की फसल भी उत्साहजनक रहने की उम्मीद है। मूल्य नियंत्रण के लिए उन्होंने राज्य सरकारों से जमाखोरों और कालाबाजारी करने वाले लोगों के खिलाफ एस्मा के तहत क़डी कार्रवाई करने को कहा। आर्थिक मोर्चे पर वैश्विक मंदी और दक्षिणपश्चिम के विफल मानसून के पैमाने पर अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन को जांचने की अपील करते हुए उन्होंने कहा कि चालू वित्त वर्ष में विकास दर ७५ प्रतिशत रहने की उम्मीद है।श्री सिंह ने कहा कि मंदी के कारण २००८०९ में जहां अमेरिका और यूरोप के कई देशों में नकारात्मक विकास दर दर्ज की गयी, वहीं भारत ने ६७ प्रतिशत की विकास दर हासिल की और चालू वर्ष में ७५ प्रतिशत तक विकास दर हासिल होने की उम्मीद है। मुझे यकीन है कि आने वाले वषा] में आठ और नौ प्रतिशत की विकास दर हासिल होगी और उसके बाद दोहरे अंक की आर्थिक विकास दर हासिल करने का दीर्घकालिक लक्ष्य भी पूरा होगा। कृषि क्षेत्र को पटरी पर लाने को सरकार की प्राथमिकता बताते हुए उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में सार्वजनिक निजी निवेश को ब़ढावा दिया जाएगा। किसानों की आत्महत्या को लेकर आडवाणी द्वारा व्यक्त चिंता से सहमति जताते हुए उन्होंने कहा कि यह काफी संवेदनशील मसला है, लेकिन सरकार किसानों का संकट दूर करने का हरसंभव प्रयास कर रही है। अल्पसंख्यक कल्याण की चर्चा करते हुए श्री सिंह ने कहा कि सरकारी नौकरियों में अल्पसंख्यकों का उचित प्रतिनिधित्व नहीं है और उनकी सरकार ने इस स्थिति को दुरुस्त करने के लिए पिछले तीन साल में जो कदम उठाये हैं, उसके सकारात्मक परिणाम आये हैं।
