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राजग सरकार द्वारा गठित राज्यों से भिन्न है तेलंगाना का मामला

Swatantra Vaartha  Sat, 6 Mar 2010, IST

राजग सरकार द्वारा गठित राज्यों से भिन्न है तेलंगाना का मामला

नई दिल्ली। आंध्र प्रदेश को विभाजित कर पृथक तेलंगाना राज्य के लिये संसद में तत्काल विधेयक लाने की मांग को नामंजूर करते हुये प्रधानमंत्री डॉमनमोहन सिंह ने आज कहा कि जब भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार ने तीन राज्यों छत्तीसग़ढ, उत्तराखंड और झारखंड का सृजन किया था, तो उस वक्त मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार मे कोई मतभेद नहीं था और इस प्रकार का विरोध नहीं हुआ था, जैसा कि आंध्र प्रदेश में हो रहा है।श्री सिंह ने राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा राज्य विधानसभा के सभी राजनीतिक दलों के नेताआें की बुलाई गई बैठक का ब्यौरा प्राप्त होने के बाद तेलंगाना राज्य के गठन की प्रक्रिया प्रारंभ करने के अपने निर्णय की घोषणा की थी।

इस वक्त यह भी घोषणा की गई थी कि एक उचित प्रस्ताव राज्य विधानसभा में पेश किया जायेगा, लेकिन उसके बाद आंध्र प्रदेश में हुई घटनाआें से हमें ऐसा महसूस हुआ कि सभी संबंधित पक्षों के साथ एक आम सहमति बनाने के लिए व्यापक विचारविमर्श की आवश्यकता है।

उल्लेखनीय है कि भाजपा के वरिष्ठ नेता वेंकैया नायुडू राष्ट्रपति अभिभाषण पर अपनी पार्टी की ओर से चर्चा में और प्रकाश जावेडकर ने लोकहित के तहत मामले को उठाते हुये कल सरकार से मांग की थी कि आंध्र प्रदेश में शांति स्थापित करने के लिए पृथक तेलंगाना राज्य बनाने के वास्ते संसद में एक विधेयक लाया जाये और उनकी पार्टी उसका समर्थन करेगी। श्री सिंह ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश बीएन श्रीकृष्णा की अध्यक्षता में इस मुद्दे पर एक समिति गठित की गई है। उन्होंने कहा कि समिति समाज के सभी वगो] खास तौर से राजनीतिक दलों से इस संबंध में उनसे विचारविमर्श करेगी। इसके अलावा यह अन्य संगठनों के साथ इस समस्या को हल करने के लिये विस्तार से बातचीत करेगी और समाज के सभी वगो] के कल्याण के लिये एक कार्रवाई योजना और एक रोडमैप की सिफारिश करेगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि समिति उद्योग, मजदूर संगठनों, किसानों के संगठन महिला संगठनों और छात्र संगठनों के साथ भी राज्य के विभिन्न क्षेत्रों के चौतरफा विकास के बारे में विचारविमर्श करेगी। उन्होंने कहा कि समिति अपनी रिपोर्ट इस साल ३१ दिसंबर तक सौंप देगी।

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