राज्यसभा में आज पेश होगा महिला विधेयक
नई दिल्ली। राज्यसभा में कल महिला आरक्षण विधेयक को विचार और पारित किए जाने के लिए पेश किया जाएगा। भाजपा तथा वामदलों ने जहां इसका समर्थन करने की घोषणा की है, वहीं इस विधेयक के विरोधियों के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं।
पिछले करीब ड़ेढ दशक से आम सहमति का इंतजार कर रहे इस विधेयक की राह राज्यसभा से बन रही है, जहां इस पर कल चर्चा होनी है। विधेयक को उच्च सदन (राज्यसभा) में मंजूरी मिलना लगभग तय है, क्योंकि कांग्रेस, भाजपा, वामदलों के अलावा अन्य छोटे दल जैसे तेदेपा, द्रमुक, अन्नाद्रमुक, अकाली दल और नेशनल कांफ्रेंस ने इसका समर्थन करने का ऐलान किया है।
राज्यसभा की सदस्य संख्या २४५ है, लेकिन १२ रिक्तियों की वजह से फिलहाल सदन के सदस्यों की संख्या २३३ है। इन १२ रिक्तियों में छह नामांकित सदस्यों के लिए रिक्तियां शामिल हैं। बिहार के मुख्यमंत्री और जदयू नेता नीतीश कुमार ने अचानक रुख बदलकर विधेयक के पक्ष में आवाज उठाई है। जदयू में नीतीश कुमार के बयान के बाद गहरे मतभेद नजर आ रहे हैं। महिला आरक्षण के लिए संविधान में संशोधन करने वाले विधेयक को मतदान के दौरान सदन में विशेष बहुमत के लिए १५५ मतों की जरूरत होगी। फिलहाल विधेयक के पक्ष में १६५ से अधिक सदस्यों का समर्थन नजर आ रहा है। विधि एवं न्याय मंत्री एम वीरप्पा मोइली संविधान (१०८वां संशोधन) विधेयक को विचारविमर्श के लिए सदन में पेश करेंगे। महिला आरक्षण विधेयक के नाम से जाना जाने वाला यह विधेयक संयोगवश आठ मार्च को सदन में पेश करने का फैसला किया गया है, जिस दिन दुनिया अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाएगी। एक खास बात यह भी है कि आठ मार्च, २०१० को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के सौ साल पूरे हो रहे हैं। इस विधेयक में लोकसभा और राज्यों की विधायिकाआें में महिलाआें के लिए ३३ फीसदी आरक्षण देने का प्रावधान है। महिला आरक्षण विधेयक के विरोधियों ने इसके खिलाफ युद्ध का ऐलान कर दिया है। सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव, राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव और जदयू प्रमुख शरद यादव ने इस विधेयक के वर्तमान स्वरूप पर अपना विरोध बरकरार रखा है।
ये दल इस विधेयक में पिछ़डे वगा] और मुस्लिम समुदाय की महिलाआें के लिए आरक्षण की मांग कर रहे हैं। राज्यसभा में कांग्रेस के ७१ सदस्य, भाजपा के ४५, माकपा के १५, अन्नाद्रमुक के सात, राकांपा के पांच, द्रमुक के चार, बीजद के चार, तेदेपा के दो, तृणमूल कांग्रेस के दो और फॉरवर्ड ब्लाक का एक सदस्य है। इन सभी दलों ने विधेयक के लिए अपना समर्थन जताया है। सदन में अकाली दल के तीन सदस्य हैं। अकाली दल ने पहले ही विधेयक के प्रति अपने समर्थन की घोषणा कर दी है। विधेयक पर विचारविमर्श से पूर्व सरकार ने इसके विरोधियों का समर्थन जुटाने के लिए एक स्वर में इसका समर्थन करने की अपील की तथा इसके विभिन्न पहलुआें पर बातचीत करने का आश्वासन दिया है। संसदीय मामलों के मंत्री पवन कुमार बंसल ने बताया कि उन सभी से यह अपेक्षा, उम्मीद और अपील है कि हमें इस महत्वपूर्ण विधेयक का इसके वर्तमान स्वरूप में समर्थन करना चाहिए।
