महिला आरक्षण विधेयक पर झुकी सरकार
नई दिल्ली। महिला आरक्षण विधेयक के वर्तमान प्रारूप का विरोध कर रहे दलों को आज सरकार ने आश्वस्त किया कि लोकसभा में सभी संबद्ध पक्षों से सलाहमशविरे की प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही इस विधेयक को निचले सदन में चर्चा के लिए रखा जाएगा।
सुबह सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद राजद, जदयू और सपा नेताआें के साथ सदन के नेता प्रणव मुखर्जी की बैठक हुई। दोपहर दो बजे सदन की बैठक शुरू होने पर प्रणव ने कहा, ‘सदन का कामकाज सुचारु रूप से चलाने के बारे में सहमति हो गयी है, लेकिन सदस्य महिला विधेयक की प्रगति को लेकर सरकार से आश्वासन चाहते थे। मैं यह आश्वासन देना चाहता हूं कि विधेयक को चर्चा के लिए लाने से पहले सभी संबद्ध पक्षों से विचारविमर्श की प्रक्रिया सरकार पूरी करेगी।’
उन्होंने कहा कि सदन को वित्तीय और अन्य कामकाज पूरे करने हैं, इसलिए इसे सुचारु रूप से चलाने में हर किसी को सहयोग करना चाहिए।
मुखर्जी ने उम्मीद जाहिर की कि उनके इस बयान से सभी संबंधित पक्ष आश्वस्त होंगे और सदन की बैठक सामान्य रूप से चलेगी। नेता सदन के बयान के तुरंत बाद राजद के रघुवंश प्रसाद ने राज्यसभा से निलंबित किये गये सात सदस्यों का मसला उठाया, जिस पर संसदीय कार्य मंत्री पवन कुमार बंसल ने आश्वस्त किया, ‘उच्च सदन में भी यह मसला उठा था। बात चल रही है और उम्मीद है कि शाम तक ठीक हल हो जाएगा।’ इससे पहले लोकसभा में इस मुद्दे पर बने गतिरोध पर दो बार के स्थगन के बाद सदन के नेता प्रणव मुखर्जी के संसद भवन स्थित कक्ष में राजद, सपा और जदयू नेताआें के साथ हुई बैठक के बाद जदयू नेता शरद यादव ने कहा, ‘सर्वदलीय बैठक की हमारी मांग पर सरकार सहमत है। सरकार ने कहा है कि महिला विधेयक को लोकसभा में चर्चा के लिए पेश करने से पहले सदन के सभी वगा] से सलाहमशविरा किया जाएगा।’
सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव और राजद प्रमुख लालू प्रसाद ने कहा कि वे सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग को सरकार से मनवाने में सफल रहे। कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन ने स्पष्ट कर दिया है कि बजट सत्र के पहले चरण में विधेयक को लोकसभा में लाना संभव नहीं है। पहला चरण १६ मार्च को समाप्त हो रहा है। संसदीय कार्य मंत्री पवन कुमार बंसल ने संकेत दिया कि आने वाले कुछ दिनों में सभी संबद्ध पक्षों से बातचीत की संभावना नहीं है।
दिलचस्प बात यह है कि लोकसभा के एजेंडे में महासचिव द्वारा महिला आरक्षण का प्रावधान करने वाले संविधान संशोधन विधेयक के बारे में राज्यसभा से प्राप्त संदेश देना शामिल था, लेकिन तीनों यादव नेताआें की प्रणव से बातचीत के बाद एजेंडे को संशोधित कर इस हिस्से को निकाल दिया गया।
संसद सत्र का दूसरा चरण १२ अप्रैल से शुरू होकर सात मई तक चलेगा। इस बीच के समय में सरकार को विधेयक के बारे में रणनीति तैयार करने का काफी समय मिलेगा।
उधर, पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी कर रहीं रेल मंत्री ममता बनर्जी ‘तीनों यादव नेताआें’ को मिलाकर चल रही हैं। बंगाल में २७ प्रतिशत आबादी मुसलमानों की बतायी जाती है, जिसे विधेयक को लेकर आपत्तियां हैं।
ममता का मंत्र है कि सरकार को संप्रग के राजद एवं सपा जैसे पुराने सहयोगियों सहित सभी लोगों को विश्वास में लेना चाहिए, क्योंकि ये दल सरकार को बाहर से महत्वपूर्ण समर्थन दे रहे हैं। कल रात ममता की कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से बैठक भी हुई।
लालू ने कहा कि ममता हमारी नेता हैं और हमें उनसे काफी उम्मीदें हैं।
बिहार से कांग्रेस सांसद असरारूल हक ने यह कहकर पार्टी में थ़ोडी सुगबुगाहट पैदा कर दी कि विधेयक में भेदभाव दूर किया जाना चाहिए, लेकिन पार्टी प्रवक्ता ने इसे कुछ खास तवज्जो नहीं देते हुए कहा कि पार्टी पूरी तरह से सोनिया के साथ है।
कांग्रेस में भी महिला विधेयक के विरोध में उठे स्वर
उधर, बिहार से कांग्रेस के एक सांसद मोहम्मद असरारूल हक ने यह कह कर पार्टी में सुगबुगाहट पैदा कर दी कि महिला आरक्षण विधेयक पारित करने से पहले ‘समाज के सभी वगा] के हितों’ को सुनिश्चित किया जाए। हक ने संसद भवन परिसर में संवाददाताआें से कहा, ‘विधेयक में किसी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए। समाज के सभी वगा] के हितों को सुनिश्चित किया जाना चाहिए।’ कांग्रेस में हक पहले सांसद हैं, जिन्होंने यह मुद्दा उठाया है। भाजपा में पहले ही कई सदस्य महिला विधेयक के वर्तमान स्वरूप के बारे में आपत्ति उठा चुके हैं।
हक ने कहा, ‘मैं पार्टी आलाकमान से अपील करता हूं कि वह सभी के हितों का ध्यान रखे।’ किशनगंज के इस सांसद ने हालांकि यह भी कहा कि वह इस विधेयक को पारित किए जाने के पक्ष में हैं।
