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मायावती ने फिर पहनी नोटों की माला

Swatantra Vaartha  Thu, 18 Mar 2010, IST

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लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की ‘रजत जयंती’ पर आयोजित महारैली में बसपा सुप्रीमो मायावती को एकएक हजार रुपये के नोटों से गुंथी माला पहनाये जाने के बाद आज तीसरे दिन बसपा कार्यकर्ताआें ने यहां आयोजित एक बैठक में मायावती को पुन: १८ लाख रुपये की माला भेंट करते हुए यह भी कहा कि अब भविष्य में बसपा कार्यकर्ता बसपा सुप्रीमो का स्वागत फूलों की मालाआें से नहीं, नोटों की मालाआें से करेंगे।

बसपा सुप्रीमो मायावती द्वारा आज पार्टी कार्यालय में पार्टी के सांसदों, विधायकों और मंत्रियों की बैठक में प्रदेश के सभी १८ मंडलों के बसपा कार्यकर्ताआें ने एकएक लाख रुपये एकत्र कर मुख्यमंत्री मायावती को १८ लाख रुपये के नोटों से गुंथी एक और माला पहनाकर स्वागत किया। बैठक में मौजूद लोक निर्माण मंत्री नसीमुद्दीन सिददीकी ने संवाददाताआें को बताया कि महारैली को विफल करने के लिए विपक्षी दलों ने अपनी पूरी ताकत लगा दी थी, जब रैली सफलता पूर्वक हो गयी, तो विपक्ष ने नोटों की माला को मुद्दा बनाकर तिल का त़ाड बनाने का प्रयास किया, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यह बात भी सर्वविदित है कि बसपा आज जिस मुकाम पर पहुंची है, उसके पीछे कार्यकर्ताआें के इसी तरह के आर्थिक सहयोग और चंदे का ही हाथ है। नसीमुद्दीन ने कहा कि यह बात भी जगजाहिर है कि बसपा के स्थापना काल से ही पार्टी कार्यकर्ता कांशीराम और मायावती के कार्यक्रमों को आयोजित कर कभी उनके वजन के बारबर या उम्र के लिहाज से इसी तरह आर्थिक सहयोग देते रहे हैं। सिद्दीकी ने कहा कि विपक्षी दलों द्वारा महारैली में पहनायी गयी नोटों की माला को लेकर की जा रही आलोचना से क्षुब्ध कार्यकर्ताआें ने यह भी निर्णय लिया है कि अगर पार्टी सुप्रीमो मायावती अनुमति देंगी, तो भविष्य में बसपा कार्यकर्ता उनका स्वागत फूल मालाआें से न कर, नोटों की मालाआें से ही करेंगे और आज भेंट की गयी १८ लाख

हैदराबाद फ्री जोन मुद्दे

शोभा नागीरेड्डी तथा लोकसत्ता के जयप्रकाश नारायण ने भाग लिया। टीआरएस को इस बैठक में नहीं बुलाया गया था, क्योंकि उसका विधानसभा में प्रतिनिधित्व नहीं है।

गौरतलब है कि गत वर्ष अक्टूबर में सर्वोच्च न्यायालय ने व्यवस्था दी थी कि हैदराबाद तेलंगाना का हिस्सा नहीं है तथा सरकारी भर्तियों एवं नियुक्तियों के मामले में यह फ्री जोन (मुक्त क्षेत्र) होगा। इस निर्णय को चुनौती देते हुए राज्य सरकार द्वारा दाखिल विशेष अवकाश याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने बीते मंगलवार को प्रारंभिक दौर में ही खारिज कर दिया। इसका अर्थ यह हुआ कि राज्य के सभी हिस्सों के लोगों को हैदराबाद में नौकरियों, नियुक्तियों एवं पदोन्नतियों के मामले में समान अधिकार होंगे, जबकि तमाम वषा] में स्थानीय क्षेत्र के दर्जे के तहत सरकारी नौकरियों में तेलंगाना क्षेत्र के लोगों को ७० प्रतिशत कोटा मिलता आ रहा था। तेलंगाना के रंगारेड्डी, महबूबनगर, नलगोंडा, निजामाबाद व मेदक जिलों के साथ हैदराबाद भी जोन६ का ही हिस्सा बना हुआ था। १९५६ में आंध्र प्रदेश के गठन के वक्त हैदराबाद सहित १० जिलों वाले तेलंगाना को इसमें विलीन कर दिया गया था, परंतु तेलंगाना के लोगों को जेंटलमेन्स एग्रीमेंट१९५६ तथा उसके बाद राष्ट्रपति आदेश व छह सूत्री फार्मूला के तहत कुछ आरक्षण दिये गये थे।

बैठक के बाद विपक्षी नेताआें ने मीडिया के समक्ष कहा कि सरकार के उदासीन रवैये की वजह से ऐसी स्थिति पैदा हुई है। सरकार को केंद्र सरकार पर संविधान में शीघ्र से शीघ्र संशोधन करने के लिए दबाव डालना चाहिए, ताकि तेलंगाना की जनता के सामने समस्याएं ख़डी न हों। कुछ नेताआें ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय में जाना ही नहीं चाहिए था, क्योंकि उच्च न्यायालय ने हैदराबाद को जोन६ में शामिल रखने के पक्ष में निर्णय दिया था।

इससे पूर्व, आज सुबह विधानसभा में इस मुद्दे पर सरकार व विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जिस पर मुख्यमंत्री के रोशय्या ने शाम को सर्वदलीय बैठक में इस विषय पर चर्चा कर इस बारे में निर्णय लेने की बात कही।

इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल विशेष अवकाश याचिका खारिज हो जाने के मद्देनजर आज विधानसभा में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच भारी वादविवाद हुआ। मुख्यमंत्री कोणीजेटी रोशय्या ने कहा कि हैदराबाद फ्री जोन नहीं, बल्कि छठे जोन का हिस्सा है और इस मामले में विपक्ष के मुकाबले कांग्रेस पार्टी का रुख हजार गुणा अधिक स्पष्ट है।

रोशय्या के ऐसा कहते ही मुख्य विपक्षी दल तेदेपा के सदस्य इस पर चर्चा कराये जाने की जिद पर अ़ड गये। विपक्षी सदस्यों के इस बर्ताव से गुस्साये मुख्यमंत्री ने कहा, ‘लोगों ने हमें सत्ता सौंपकर शासन करने के लिए यहां बिठाया है और जनसमस्याआें को सरकार के समक्ष लाने के लिए आप (विपक्ष) को वहां बिठाया है। विपक्षी सदस्यों के इशारे पर सदन नहीं चलेगा और विपक्ष के सदस्यों को सदन का गौरव बनाये रखना सीखना चाहिये।’

इससे पूर्व आज सुबह सदन की कार्यवाही शुरू होते ही पीआरपी के अलावा अन्य सभी विपक्षी दलों के ‘हैदराबाद फ्री जोन’ (मुक्त क्षेत्र) संबंधी स्थगन प्रस्ताव को विधानसभा अध्यक्ष ने खारिज कर दिया।

इस पर तेदेपा सदस्य स्थगन प्रस्ताव को अनुमति देकर सर्वसम्मति से विधानसभा में प्रस्ताव पारित कराने की जिद पर अ़ड गये। विधानसभा अध्यक्ष ने जब इस मांग को स्वीकार नहीं किया, तो तेदेपा सदस्य ‘संविधान संशोधन के लिए विधानसभा में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित करो’, ‘शासनादेश६१० पर क़डाई से अमल करो’ व ‘सरकार अपना अ़डयल रुख बंद करे’ आदि नारे लिखे प्लेकार्ड लहराते व नारेबाजी करते हुए पोडियम तक पहुंच गये। इस पर विधानसभा अध्यक्ष ने १५ मिनट के लिए सदन की कार्यवही स्थगित कर दी।

बाद में सदन की कार्यवाही शुरू होते ही इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने एक घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बहुत ही संवेदनशील मसला है और इस पर आमसहमति की जरूरत है। इसलिए आज शाम ही सभी दलों के नेताआें की बैठक आयोजित कर बाद में की जाने वाली कार्रवाई के बारे में निर्णय लेंगे। परंतु तेदेपा के सदस्य यह कहते हुए तत्काल सदन में प्रस्ताव पारित करने की मांग करने लगे कि इस मसले पर सभी पार्टियों के बीच आम सहमति बनी हुई है।

इस पर मुख्यमंत्री ने पुन: मामले में हस्तक्षेप करते हुए कहा कि इस मामले में किसी भी तरह की जल्दबाजी नुकसान का कारण बन सकती है, इसलिए इस पर विस्तृत चर्चा के बाद ही कोई फैसला लिया जा सकता है। इस दौरान कांग्रेस व तेदेपा के सदस्यों के बीच एकदूसरे पर आरोपप्रत्यारोप लगाने का दौर शुरू हो गया।

इस दौरान, मुख्यमंत्री ने कहा कि फ्री जोन का मसला कानून की परिधि में होने के कारण इस पर सावधानीपूर्वक चर्चा करके निर्णय लेना ही हितकर रहेगा। इस पर तेदेपा विधायक दल के उपनेता नागम जनार्दन रेड्डी ने कहा, ‘जब सदन में कार्यवाही चल रही है, तो बाहर जाकर उस पर चर्चा करने की क्या जरूरत है। इस मसले पर यहां चर्चा से बचने के लिए ही सबज्यूडिशियरी के बहाने की आ़ड ली जा रही है।’

नागम की इस टिप्पणी से मुख्यमंत्री भन्ना उठे और कहा, ‘मैंने सबज्यूडिशियरी शब्द का इस्तेमाल नहीं किया। अगर मेरे द्वारा यह शब्द इस्तेमाल करने की बात साबित हुई, तो मैं मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दूंगा। और अगर मेरे द्वारा इस शब्द का इस्तेमाल नहीं करने की बात साबित हुई, तो क्या नागम विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने को तैयार हैं?’ मुख्यमंत्री की इस चुनौती पर सत्तापक्ष के सदस्यों ने तालियां बजाकर उनका साथ दिया।

इस दौरान मुख्यमंत्री और नागम के बीच वादविवाद शुरू हो गया, परंतु करने की बात कही। करते हुए स्थिति को संभाला। शासनादेश६१० के मसले पर उच्च शिक्षामंत्री डी श्रीधर बाबू ने तेदेपा सदस्यों से ‘बिना कोई राजनीति किये’ उनकी सलाह मांगी और कहा कि अब तक केवल कांग्रेस पार्टी ही इस शासनादेश पर अमल करती आ रही है।

मायावती ने फिर

की माला विपक्ष की आलोचना का जवाब है। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल बसपा को अपनी तरह न समझे, ये दल ब़डेब़डे उद्योगपतियों और धन्ना सेठों से चोरी छिपे पैसा लेते हैं और अपनी पार्टी चलाते हैं तथा चुनाव ल़डते हैं। बसपा शुरू से ही पार्टी कार्यकर्ताआें के आर्थिक सहयोग और चंदे से ही चलने वाली पार्टी है और चुनाव भी ल़डती रही है और यही पार्टी की ताकत भी है। सिद्दीकी ने कहा कि बसपा सुप्रीमो को भेंट की गयी नोटों की माला विपक्ष को रास नहीं आयी और उसे लगने लगा, जो पैसा कार्यकर्ता देंगे, वह वोट भी देंगे, इससे विपक्षी दलों की नींद उ़ड गयी और बसपा तथा ये दल बसपा सुप्रीमो को बदनाम करने की मुहिम चलाये हुए हैं।

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