तेंदुलकर व रैना के कमाल से भारत को ब़ढत
कोलंबो। कीर्तिमानों के बेताज बादशाह सचिन तेंदुलकर (२०३) के रिकार्ड पांचवें दोहरे शतक और युवा बल्लेबाज सुरेश रैना (१२०) के पर्दापण टेस्ट में शतक की बदौलत भारत ने श्रीलंका के खिलाफ दूसरे क्रिकेट टेस्ट को ड्रा की तरफ धकेल दिया है और इसके साथ ही भारत का नंबर एक ताज फिलहाल बच गया है। भारत ने मैच के चौथे दिन नौ विकेट पर ६६९ रन का स्कोर ख़डाकर श्रीलंका के चार विकेट पर ६४२ रन पारी घोषित के स्कोर को पीछे छ़ोड दिया। भारत ने सिंहलीज स्पोट्र्स क्लब मैदान पर अपना सर्वोच्च स्कोर बनाने के साथ ही इस टेस्ट को ड्रा की तरफ अग्रसर कर दिया। भारत के पास पहली पारी में अब २७ रन की ब़ढत है और उसका एक विकेट शेष है। मैच में अब एक दिन का खेल बाकी है और अंतिम दिन ड्रा की औपचारिकता पूरी की जाएगी।
मैच का चौथा दिन पूरी तरह सचिन और युवा बल्लेबाज रैना के नाम रहा। विश्व रिकार्डधारी सचिन ने जहां अपना पांचवां दोहरा शतक बनाकर राहुल द्रव़िड के भारतीय रिकार्ड की बराबरी की, वहीं रैना अपने पर्दापण टेस्ट में शतक बनाने वाले १२वें भारतीय बल्लेबाज बन गए। सचिन ने ३४७ गेंदों पर २०३ रन की अपनी पारी में २३ चौके और एक छक्का लगाया,जबकि रैना ने २२८ गेंदों में १२ चौकों और दो छक्कों की मदद से शानदार १२० रन बनाए। कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी ने ७६ रन और अभिमन्यु मिथुन ने अपने सर्वश्रेष्ठ ४१ रन का योगदान दिया।
क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन ने बेहतरीन २०३ रन बनाकर महानतम बल्लेबाज आस्ट्रेलिया के डान ब््रडौमैन को १५० से अधिक के स्कोर बनाने के मामले में पीछे छ़ोड दिया और इसके साथ ही वेस्टइंडीज के ब्रायन लारा के विश्व रिकार्ड की भी बराबरी कर ली। सचिन का अपने १६८ टेस्ट के लंबे कैरियर में यह १९वां मौका था,जब उन्होंने १५० से अधिक का स्कोर बनाया। इसके साथ ही उन्होंने ब्रैडमैन के १८ बार यह कीर्तिमान बनाने को पीछे छ़ोड दिया और इस मामले में लारा के १९ बार यह उपलब्धि हासिल करने के विश्व रिकार्ड की बराबरी कर ली।
सचिन के कैरियर का रिकार्ड ४८वां टेस्ट शतक था। उनका इस साल यह दूसरा दोहरा शतक है। उन्होंने इससे पहले ग्वालियर में दअफ्रीका के खिलाफ वनडे इतिहास का पहला दोहरा शतक बनाया था। उन्होंने इसके साथ ही द्रव़िड के सर्वाधिक पांच दोहरे शतक बनाने के भारतीय रिकार्ड की भी बराबरी कर ली। मास्टर ब्लास्टर और युवा बल्लेबाज रैना के बीच पांचवें विकेट के लिए २५६ रन की महत्वपूर्ण साझेदारी हुई,जिसने मैच पर से श्रीलंका की पक़ड खत्म कर दी। रैना ने युवराज सिंह के बुखार से पी़डत होकर इस मैच से बाहर हो जाने के बाद टेस्ट कैरियर शुरू करने के मिले मौके का पूरा फायदा उठाते हुए शतक ठोक डाला। रैना २२८ गेंदों में १२ चौकों और दो छक्कों की मदद से १२० रन बनाकर आउट हुए। इसके साथ ही वह उन विशिष्ट भारतीय बल्लेबाजों के क्लब में शामल हो गए, जिन्होंने अपने पर्दापण टेस्ट में शतक बनाया। वह अब पर्दापण टेस्ट की पहली पारी में शतक बनाने वाले नौवें भारतीय और पर्दापण टेस्ट में शतक बनाने वाले १२वें भारतीय बल्लेबाज बन गए हैं।
भारत ने सुबह चार विकेट पर ३८२ रन से आगे खेलना शुरू किया। उसे फालोआन टालने के लिए अभी ६१ रन और बनाने थे। नाबाद बल्लेबाजों सचिन और रैना ने द़ृढता के साथ बल्लेबाजी करते हुए श्रीलंकाई गेंदबाजों को हावी नहीं होने दिया।
श्रीलंका के कप्तान कुमार संगकारा को इस समय अपने करिश्माई स्पिनर मुथैया मुरलीधरन और तेज गेंदबाज लसित मलिंगा बहुत याद आ रहे थे। मुरली ने जहां गाले टेस्ट के बाद टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले लिया है,वहीं मलिंगा घुटने की चोट के कारण इस मैच से बाहर हो गए थे। रैना ने ६६ रन से अपनी पारी को आगे ब़ढाते हुए अपना पहला टेस्ट शतक १९२ गेंदों में दस चौकों और दो छक्कों की मदद से पूरा कर लिया। रैना ने धम्मिका प्रसाद की गेंद पर सीधे चौका मारने के साथ ही खुशी में अपने दोनों हाथ हवा में उठा लिए। दूसरे छोर पर ख़डे मास्टर ब्लास्टर ने रैना को गले लगाकर उनकी शानदार उपलब्धि के लिए बधाई दी।
दोनों बल्लेबाजों ने लंच तक भारत का स्कोर चार विकेट पर ४७७ रन पहुंचा दिया। भारत के ऊपर छाया फालोआन का खतरा टल चुका था, लेकिन भारत को श्रीलंका को ब़डी ब़ढत लेने से रोकना था। रैना को आखिर अजंता मेंडिस ने कुमार संगकारा के हाथों कैच कराकर श्रीलंका को पांचवीं सफलता दिलाई। रैना का विकेट ४९७ के स्कोर पर गिरा। इसके बाद सचिन ने कप्तान धोनी के साथ छठे विकेट के लिए ९५ रन की साझेदारी कर श्रीलंकाई गेंदबाजों का मनोबल त़ोड दिया। तेंदुलकर ने चायकाल से पहले अपना दोहरा शतक ३३८ गेंदों में २३ चौकों और एक छक्के की मदद से पूरा किया। चायकाल के समय भारत का स्कोर पांच विकेट पर ५८९ रन था।
अपने नियमित गेंदबाजों को कोई सफलता मिलती न देख संगकारा ने पार्टटाइम आफ स्पिनर तिलकरत्ने दिलशान को आजमाया और इसमें उन्हें भरपूर सफलता हाथ लगी। दिलशान ने चायकाल के बाद सचिन को विकेट के पीछे प्रसन्ना जयवर्र्द्धने के हाथों कैच करा दिया। भारत का छठा विकेट ५९२ के स्कोर पर गिरा। नये बल्लेबाज हरभजन सिंह खाता खोले बिना दिलशान की गेंद पर संगकारा को कैच थमा बैठे, लेकिन धोनी और मिथुन ने आठवें विकेट के लिए ५१ रन की साझेदारी कर भारत को श्रीलंका के ६४२ रन के स्कोर के पार पहुंचा दिया। धोनी अपना १८वां अर्द्धशतक बनाने के बाद दिलशान को उन्हें की गेंद पर कैच दे बैठे। धोनी ने १३८ गेंदों की अपनी पारी में सात चौके लगाए। मिथुन ने अपने दूसरे टेस्ट में अपना सर्वश्रेष्ठ स्कोर बना दिया।
गाले टेस्ट में उन्होंने २५ रन बनाए थे,लेकिन यहां वह ४१ रन बनाने के बाद मेंडिस की गेंद पर बोल्ड हो गए। मिथुन ने ९७ गेंदों की अपनी पारी में चार चौके लगाने के साथ यह साबित कर दिया कि वह निचले क्रम में विकेट पर टिककर खेलने की क्षमता रखते हैं। चौथे दिन के खेल की समाप्ति के समय इशांत शर्मा दस रन बनाकर और प्रज्ञान ओझा खाता खोले बिना क्रीज पर थे। यदि ये दोनों बल्लेबाज मैच के अंतिम दिन आठ रन और बना लेते हैं, तो वे भारत का श्रीलंका के खिलाफ कानपुर में १९८६ में बनाया सात विकेट पर ६७६ रन का दूसरा सर्वश्रेष्ठ स्कोर पीछे छ़ोड सकते हैं। श्रीलंका की तरफ से मेंडिस १५७ रन पर चार विकेट लेकर सबसे सफल रहे, जबकि दिलशान ने ५० रन पर तीन विकेट लिए। सूरज रणदीव के हाथों २१२ पर दो विकेट ही आए।
