नयायाधीश का पद आरटीआइ के दायरे में
नइ दीि, १२ जनवरी (भाषा)। दीि उ यायालय ने एक ऐतिहासिक आर युगातकारी फसला सुनाते हए कहा है कि धान यायाधीश (सीजेआइ) का पद सूचना के अधिकार कानून (आरटीआइ) के दायरे में आता ह आर उतम यायालय की अपील खारिज करते हए कहा कि यायिक वतता किसी यायाधीश का विशेषाधिकार नहीं, बकि उसे सापी गइ जिमेदारी है । अठासी पों का यह फसला धान यायाधीश केजीबालाकणन के लिए एक निजी धके के प में देखा जा रहा है , जो लगातार कहते रहे है कि उनका पद पारदशिता कानून के तहत नहीं आता आर वह इस कानून के तहत यायाधीशों की सपायों की घोषणा जसी सूचना कट नहीं कर सकते। दीि उ यायालय के मुय यायाधीश एपीशाह की अयक्षता वाली पूण पीठ ने कहा कि धान यायाधीश एक लोक ाधिकार ह आर उतर यायपालिका को अपनी सपा के यारे को सावजनिक करना चाहिए, योंकि वे निन अदालतों के यायिक अधिकारियों से ‘कम जवाबदेह’ नहीं ह, जो सेवानियमों के तहत सपा की घोषणा के लिए बाय है ।
पीठ ने उतम यायालय की यह दलील खारिज कर दी, जिसमें इस आधार पर धान यायाधीश के पद को आरटीआइ अधिनियम के दायरे में लाने का जोरदार विरोध किया गया था कि इससे यायिक वतता का अतिकमण होगा। उ यायालय ने अपने फसले में कहा कि यायिक वतता किसी यायाधीश का विशेषाधिकार नहीं, बकि यह कानून आर साय के आधार पर इमानदारी आर निपक्षता से निणय करने के लिए येक यायाधीश पर डाली गइ जिमेदारी है ।
दीि उ यायालय का यह फसला शीष अदालत ारा दायर की गयी अपील पर आया ह। अपील में गत दो सितबर के उ यायालय की एक सदयीय पीठ के उस फसले को चुनाती दी गयी थी, जिसमें पीठ ने कहा था कि धान यायाधीश एक सावजनिक ाधिकार ह आर उनका पद सूचना का अधिकार कानून के दायरे में आता है ।
उ यायालय ने कहा कि यायिक पदकम में यायाधीश जितने ऊपर हों, उनके साथ उतने ही बडे तर की जवाबदेही आर सत छानबीन की जरत महसूस की जाती है । अदालत ने यह अपील खारिज कर दी कि उतम यायालय के यायाधीश अपनी सपा की घोषणा करने के लिये बाय नहीं है । उ यायालय ने कहा कि अगर अधीनथ यायिक अधिकारी की सपा की घोषणा उस तर पर जवाबदेही लागू कराने के लिये जरी मानी जाती ह, तो सवधानिक अदालतों के यायाधीशों के इस तरह की घोषणा करने की जरत आर भी बढ जाती है ।
उचयायालय ने कहा कि यायिक पदकम में यायाधीश जितने ऊपर हों, उनके साथ उतने ही बडे तर की जवाबदेही आर सत छानबीन की जरत महसूस की जाती ह। अदालत ने यह अपील खारिज कर दी कि उतम यायालय के यायाधीश अपनी सपा की घोषणा करने के लिये बाय नहीं ह। उ यायालय ने कहा कि अगर अधीनथ यायिक अधिकारी की सपा की घोषणा उस तर पर जवाबदेही लागू कराने के लिये जरी मानी जाती है , तो सवधानिक अदालतों के यायाधीशों के इस तरह की घोषणा करने की जरत आर भी बढ जाती है ।
‘भारतीय लोकत के काल की सबसे महवपूण घटना’ करार दिये गये पारदशिता हिमायती कानून की यापक याया करते हए अदालत ने कहा कि सूचना का अधिकार सविधान में निदि मूल अधिकारों अनुछेद१४ (समानता का अधिकार), अनुछेद१९ (१) ‘ए’ (अभिय की वतता) आर अनुछेद २१ (जीने का अधिकार) का एक हिसा है ।
दीि उ यायालय ने कहा कि सूचना का अधिकार का ाेत सूचना का अधिकार कानून नहीं ह। यह वह अधिकार ह, जो अनुछेद१९/(१) ‘ए’ के तहत दी गयी सवधानिक गारटी से आता ह, जसा कि उतम यायालय ने भी कइ फसलों की श्रखला में कहा है । आरटीआइ कानून सूचना के अधिकार का कोष नहीं ह। अदालत ने कहा कि पीठ में या पीठ से इतर यायिक यवहार का तर आमतार पर अयधिक उ किम का होता है । मुय यायाधीश यायमूति एपीशाह, यायमूति विकमजीत सेन आर यायमूति एसमुरलीधर की तीन सदयीय पीठ ने सवसमति से यह फसला दिया। फसले में कहा गया कि एक यायाधीश के इमानदारी आर निपक्षता से इस तरह के तर के भटकाव से उहें सापे गये विवास पर आघात होगा। यायपालिका से जुडा घोटाला किसी कायकारी या विधायिका के किसी सदय की सलितता वाले घोटाले के मुकाबले हमेशा से अधिक निंदनीय रहा है । अदालत में अनियमितता या अनुपयुता का छोटासा सकेत अयधिक उकठा आर सतकता जगाता ह। अपनी अपील में उतम यायालय के पजीयक ने दलील दी कि एक सदयीय पीठ ने यह यवथा देने में भूल की कि धान यायाधीश का पद पारदशिता कानून के दायरे में आता ह। अपील में कहा गया कि पीठ ने सूचना का अधिकार कानून के ावधानों की याया भी खराब तरह से की, जो ‘गरजरी’ आर ‘अताकिक’ थी।
शीष अदालत के पजीयक अब इस फसले को उतम यायालय में चुनाती देने वाले ह। पजीयक ने यह भी दलील दी कि यायाधीशों को सावजनिक छानबीन के तहत नहीं रखा जा सकता, योंकि इससे उनके कामकाज आर वतता में खलल पदा होगा।
शीष अदालत के पजीयक की ओर से उपथित एटार्नी जनरल जीइ वाहनवती ने दलील दी, ‘हम हमारे यायाधीशों को सावजनिक छानबीन या जाच के तहत नहीं रख सकते, योंकि इससे उनके कामकाज आर वतता में खलल पदा होगा।’ उेखनीय ह कि सपा के मुे पर जनमत बढने के चलते गत दो नवबर को उतम यायालय के धान यायाधीश आर अय यायाधीशों ने वेछा से अपनी सपा की घोषणा कर विवरण आधिकारिक वेबसाइट पर डाल दिये थे।
अपने ऐतिहासिक फसले में उ यायालय ने कहा कि विधायिका का कोइ सदय या शासक रा की बुनियाद को जाहिरा तार पर खतरे में डाले बिना भाचार के मामले में दोषी करार दिया जा सकता ह। पीठ ने कहा कि लेकिन एक यायाधीश को यायपालिका की निपक्षता आर वतता के सरक्षण तथा जनता का भरोसा बनाये रखने के लिये खुद को सदेह से पूरी तरह ऊपर रखना चाहिये।
अदालत ने कहा कि लोकत तथा कानून के शासन का अनुपालन सुनिचित कराने के लिये अविवादित इमानदारी वाली यायपालिका एक अनिवाय मूलभूत सथान ह। यहा तक कि जब सभी अय सरक्षण विफल हो जाते ह, तो यायपालिका जनता को उसके अधिकारों या वतता पर किसी भी तरह के अतिकमण से कानून के तहत बचाव मुहया कराती ह। दीि उ यायालय ने गार किया कि यायपालिका को यवहार के उ तर को बनाये रखने से कतराना नहीं चाहिये आर कहा कि ऐसा करने की यायपालिका की विफलता यायिक वतता में खलल पदा करेगी। अदालत ने कहा कि जब ऐसा होगा, तो यायिक वतता के उस साित का कुछ हद तक या शायद गभीर प से महव कम होगा, जिस पर (जिस साित पर) यायपालिका की थापना हइ ह आर जिस पर वह टिकी हइ है ।
अदालत ने उतम यायालय की वह अर्जी भी खारिज कर दी, जिसमें कहा गया था कि अय यायाधीशों से जुडी जानकारी की का गोपनीय ह आर धान यायाधीश ऐसी जानकारी का खुलासा नहीं कर सकते।
उ यायालय ने कहा कि धान यायाधीश उतम यायालय के यायाधीशों की भी जिमेदारी लेने वाले य नहीं हो सकते। उतम यायालय के यायाधीशों का वत पद होता ह आर उनके यायिक कामकाज में कोइ पदकम नहीं होता। इसके चलते वे धान यायाधीश के मुकाबले विभि धरातल पर होते ह।
अदालत ने कहा, ‘धान यायाधीश के समक्ष सपा की घोषणा निजी सबधों या विवास के चलते नहीं की गयी, बकि ऐसा यायिक जीवन के उतर तर आर सयनिठा को बनाये रखने के सवधानिक दायिव तथा यापक जनहित में किया गया।’ अदालत ने कहा कि इस तरह की जानकारी का खुलासा ‘कतय निवहन का उलघन’ नहीं होगा।
अदालत ने उाम यायालय की यह दलील भी वीकार नहीं की कि धान यायाधीश का पद उाम यायालय के पजीयक से अलग ह। दिली उ यायालय ने कहा कि इस तरह का कोइ सकेत माजूद नहीं ह कि कानून के तहत धान यायाधीश का पद उतम यायालय के लोक सूचना कायालय से एक अलग तिठान ह। लिहाजा, यह नहीं कहा जा सकता कि उतम यायालय के मुय लोक सूचना अधिकारी का कायालय धान यायाधीश के कायालय से अलग ह। पीठ ने कहा कि सावजनिक ाधिकार की अभियति, जसी कि कानून में की गयी ह, एक यापक आयाम ह आर इसमें वह ाधिकार शामिल होता ह, जिसकी रचना भारत के सविधान की ओर से या सविधान के तहत की गयी ह आर धान यायाधीश के मामले में इसकी याया अछी तरह से होती है ।
दिली उ यायालय ने कहा कि शीष अदालत के यायाधीशों का उनकी सपा की घोषणा के बारे में पारित ताव यायाधीशों के लिये बायकारी ह। इस तरह अदालत ने एटार्नी वाहनवती की यह दलील खारिज दी कि यायाधीशों का ताव कानूनी प से बायकारी नहीं है । अदालत ने कहा कि अगर बतार सथान यायपालिका का उचित कामकाज सुनिचित कराना हो, तो इस तरह की दलील वीकार नहीं की जा सकती। इस तरह की दलील वीकार करने के नतीजे के ये मायने होंगे कि यतिक यायाधीश आसानी से यह घोषणा करेंगे कि वे अदालत के किसी भी ताव के लिये बाय नहीं ह आर वे अपने मुताबिक काम करने के लिये वत है ।
अदालत ने कहा, ‘इस तरह का ख यायपालिका के उचित कामकाज के लिये असमथनीय आर अवीकाय है ।’ एक सदयीय पीठ के फसले को बरकरार रखते हए पीठ ने कहा कि यह (पीठ का फसला) उचित आर माय ह तथा इसमें हतक्षेप की जरत नहीं है । अदालत ने कहा कि लोकत पारदशिता की अपेक्षा रखता ह आर मुत समाज कीपारदशिता सहगामी होती ह। सूरज की किरण सबसे श्रेठ कीटाणुनाशक है ।
