डीमड विववािलयों के छातराें को िडगरी िमलेगी : िसबल
नइ दिली, । सरकार ने आज पट किया कि जिन 44डीमड िवववािलयों की मायता समात करने से सबधित कायबल की िरपोट को वीकार िकया गया ह, उन सथाआें के किसी भी छा को इससे भावित नहीं होने दिया जायेगा आर उहें विववािलय की िडगी िमलेगी।
मानव ससाधन िवकास मी कपिल िसबल ने आज कहा िक यह मामला उचतम यायालय के अधीन ह। डीड विववािल के सबध में कइ तरह की शिकायतों के मेनजर जून, २००९ में ाेपीके टडन के नेतव में एक कायबल का गठन िकया गया था। समिति ने अपनी सिफारिशे पेश की है । हमने कायबल की रिपोट को वीकार कर लिया ह आर इसे उचतम यायालय के समक्ष पेश कर दिया ह। उहोंने कहा कि अब यह विषय यायालय को तय करना ह। सामाजिक मुाें पर सपादकों के १०वें समेलन से इतर एक न के उार में सिबल ने कहा कि सरकार का इरादा यह बिकुल नहीं है कि इसके कारण कोइ भी छा भावित हो।
इसके दायरे में आने वाले सभी छााें को डिगी मिलेगी। उनके हितों की रक्षा की जायेगी। कें ने कल उचतम यायालय में पेश हलफनामे में कहा कि उसने देश के उन ४४ डीड विववािलयों की मायता समात करने से सबधित एक कायबल की रिपोट को वीकार कर लिया ह, जिन पर आरोप ह कि वह शक्षिक सथाआें की बजाय पारिवारिक जागीर के प में काम कर रहे ह। सिबल ने कहा कि छााें के हितों को यान में रखते हए ही कुछ समय पहले रिपोट ात हो जाने के बावजूद इसे सावजनिक नहीं किया गया था। उहोंने कहा कि कायबल की रिपोट के आधार पर हमने अदालत के समक्ष यह पट कर दिया कि इन छााें के हितों की रक्षा के लिए या काययोजना है ।
आधिकारिक सूाें ने बताया कि डीड विववािलय मूल प से कालेज रहे है , जिहें डीड का दजा दान किया गया था, अब इनका डीड विववािलय का दजा वापस लेने के बाद भी ये कालेज तो बने ही रहेंगे। उहोंने कहा कि इस थिति में ये (जिनका डीड विववािलय का दजा वापस लिया जायेगा) किसी अय विववािलय से सबता ात कर डिगी दान कर सकते ह। बहरहाल सिबल ने मामला यायालय के अधीन होने के कारण इस पर विशेष कुछ भी बताने से इकार कर दिया।
हालाकि उहोंने उमीद यत की कि आने वाले समय में डीड विववािल की अवधारणा समात हो जायेगी। इससे पहले कल कें ने अपने एक शपथप में कहा था कि १३ रायों में थित इन विववािलयों के कालेजों में पढने वाले करीब दो लाख वािथियों के भविय को अधकारमय होने से बचाने के लिए उहें मूल विववािलयों से मायता ात कालेजों में फिर से पढने जाने की अनुमति होगी।
यायालय में कल यह शपथप मानव ससाधन विकास मालय ने पेश किया था। मालय ने कहा था कि सरकार ने उचाधिकार ात पीएन टडन समिति की सिफारिशों को वीकार कर लिया ह तथा इस समया से निपटने के लिए सुझाव देने के लिए विशेष काय बल गठित करने का निणय किया है ।
शपथप में कहा गया कि समीक्षा समिति को डीड विववािलय की मायता ात कुछ सथानों की कायणाली में कइ गडबडियों की जानकारी ात हइ। इन शिक्षण सथाआें के बधन बोड की सरचना थी बेढगी थी, योंकि इनके कामकाज पर नियण पेशेवर शिक्षाविदों की बजाय परिवार के लोगों का था।
कें के अनुसार नियमों का उलघन करने वाले ४४ डीड विववािलयों में से अधिकतर पोट गेजुएट आर अडरगेजुएट पाठयकमों का सचालन कर रहे थे। पाठयकम ढीलेढाले आर इनके नाम भी भमित करने वाले थे आर उनमें दाखिला क्षमता से कहीं अधिक आर असगत तरीके से वािथियों को वेश दिया गया था।
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