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आंप्र कांग्रेस समन्वय समिति के गठन पर विवाद

Swatantra Vaartha  Sun, 7 Feb 2010, IST

congress meeting in rao  houseआंप्र कांग्रेस समन्वय समिति के गठन पर विवाद

हैदराबाद। कांग्रेस समन्वय समिति के गठन पर तेलंगाना के कांग्रेस नेता सख्त नाराज हैं। क्षेत्र के कांग्रेसी विधायक, मंत्री, सांसद व विधान परिषद सदस्यों ने एक साथ समन्वय समिति के गठन को लेकर पार्टी आलाकमान के खिलाफ बगावत का झंडा उठाया हैै। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व राज्यसभा सदस्य के केशव राव के आवास पर आज हुई तेलंगाना क्षेत्र के मंत्रियों, सांसदों, विधायकों व विधान परिषद सदस्यों की बैठक में सभी ने कांग्रेस आलाकमान तथा पार्टी प्रदेश मामलों के प्रभारी व केंद्रीय विधि मंत्री वीरप्पा मोइली की व्यवहार शैली पर असंतोष जताया।

लगभग सभी नेताआें का कहना था कि जहां केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम तेलंगाना राज्य के अनुकूल काम कर रहे हैं, वहीं वीरप्पा मोइली तेलंगाना मामले में अ़डचनें पैदा कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वीरप्पा मोइली तेलंगाना के साथ अन्याय करने के लिए ही समन्वय समिति के अध्यक्ष पद पर काबिज हुए हैं। तेलंगाना के कांग्रेस जनप्रतिनिधियों, यहां तक कि मंत्रियों ने भी प्रदेश कांग्रेस समिति के अध्यक्ष को मिलने वाले समन्वय समिति के अध्यक्ष पद पर प्रदेश कांग्रेस मामलों के प्रभारी वीरप्पा मोइली को नियुक्त किये जाने को पूरी तरह तेलंगाना के लोगों को अपमानित करने वाला करार देते हुए अपना विरोध जताया।बैठक में मुख्य रूप से वीरप्पा मोइली के रवैये पर विस्तृत चर्चा हुई और मोइली के रवैये पर ‘ब्रेक लगाने’ का निर्णय लिया गया।

मंत्री कोमटीरेड्डी वेंकट रेड्डी, पूर्व मंत्री आर दामोदर रेड्डी और विधान परिषद सदस्य यादव रेड्डी ने बताया कि वे वीरप्पा मोइली को समन्वय समिति के अध्यक्ष पद से हटाकर उनकी जगह प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डी श्रीनिवास को नियुक्त करने की मांग के साथ एआईसीसी अध्यक्ष सोनिया गांधी, प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह, अहमद पटेल तथा प्रणव मुखर्जी को पत्र लिखने जा रहे हैं। इस बारे में के केशव राव के आवास पर बैठक में उपस्थित तेलंगाना के विधायक, विधान परिषद सदस्य व सांसदों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया।

बाद में केशव राव ने मीडिया को बताया कि जब वे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष थे, तब उन्होंने भी समन्वय समिति के अध्यक्ष के रूप में काम किया था और समिति में पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्षों व वरिष्ठ नेताआको शामिल किया था। दामोदर रेड्डी ने कहा, ‘डी श्रीनिवास को समन्वय समिति का अध्यक्ष नहीं बनाये जाने का हम क़डा विरोध करते हैं।’ उन्होंने तुरंत समिति में संशोधन करने की मांग की। उन्होंने कहा कि अब तक तेलंगाना के साथ नौकरियों, विकास व निधि आवंटन आदि मामलों में काफी अन्याय हुआ है और भविष्य में भी ऐसा होने पर तेलंगाना की ओर से सवाल उठाने के लिए डी श्रीनिवास जैसे वरिष्ठ नेता को समिति अध्यक्ष बनाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि वीरप्पा मोइली का केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम की निंदा करना ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि बजट में निधि आवंटन व विकास कार्यक्रम एक सुनिश्चित कार्यक्रम के तहत होना चाहिये।

दामोदर रेड्डी ने कहा कि मुख्यमंत्री के रोशय्या दिल्ली में एकीकृत आंध्र प्रदेश की वकालत कर रहे हैं, जो कि दुर्भाग्यपूर्ण है। मुख्यमंत्री के पद पर काम कर रहे व्यक्ति को पूरे राज्य को एक तरह से देखना चाहिये, लेकिन मुख्यमंत्री अपनी दोनों आंखें तटीय आंध्र्र पर ही ग़डाए हुए हैं। उन्होंने कहा, ‘रोशय्या से तेलुगु देशम पार्टी के अध्यक्ष नारा चंद्रबाबू नायुडू बेहतर हैं, क्योंकि नायुडू ने तेलंगाना और तटीय आंध्र को अपनी दो आंखें करार दिया था।’ उन्होंने पार्टी के प्रदेश प्रभारी वीरप्पा मोइली से तेलंगाना और तटीय आंध्र को समान दृष्टि से देखने की मांग की। उन्होंने कहा कि मोइली का तटीय आंध्र के अनुकूल पेश आना ठीक नहीं है।

उन्होंने कहा कि मंत्री पद हासिल किये बिना तेलंगाना आंदोलन में भाग लेंगे, क्योंकि मंत्री पद मिलने से तेलंगाना के द्रोही कहे जाएंगे। उन्होंने कहा, ‘हमारे लिए पद जरूरी नहीं और हम तेलंगाना के लिए किसी भी प्रकार का त्याग के लिए तैयार रहेंगे।’ उन्होंने कहा कि वे तेलंगाना की मुख्य समस्याआें को पार्टी आलाकमान के समक्ष रखने के लिए एक पत्र लिखने जा रहे हैं। उन्होंने जस्टिस श्रीकृष्णा समिति के लिए समय सीमा सुनिश्चित करने और विधिविधान स्पष्ट करने की मांग भी की। बैठक में मंत्री कोमटी रेड्डी वेंकट रेड्डी, डी श्रीधर बाबू, डीके अरुणा, सुनीता लक्ष्मा रेड्डी सहित सांसद जी विवेक, ११ विधान परिषद सदस्य तथा १६ विधायक उपस्थित थे।

समन्वय समिति के गठन में मेरा कोई हाथ नहीं : रोशय्या

कांग्रेस आलाकमान द्वारा गठित समन्वय समिति पर पार्टी के ही कई नेताआें में भ़डके असंतोष के बाद इस मसले पर मुख्यमंत्री के रोशय्या भी काफी सूझबूझ से पेश आ रहे हैं।

उन्होंने आज यहां पत्रकारों से बातचीत के दौरान समन्वय समिति के गठन में अपना किसी तरह का हस्तक्षेप होने से इंकार करते हुए कहा कि पार्टी आलाकमान के निर्णय से ही समिति का गठन किया गया है। उन्होंने अपनी ही पार्टी के नेताआें की ओर से की जा रही निंदा पर कुछ भी कहने से इंकार कर दिया।

रोशय्या ने कहा,‘कांग्रेस में समन्वय समिति होती है और इसमें कोई नयी बात नहीं। यह फैसला अखिल भारतीय कांग्रेस नेतृत्व का है और इसका सम्मान करना मेरा कर्तव्य और धर्म है। हम पार्टी आलाकमान के निर्देशानुसार ही चलते हैं।’ रोशय्या ने कहा कि वे मुख्यमंत्री बनने के पहले से पार्टी आलाकमान के आदेश व निर्देशानुसार चलते आये हैं।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आर दामोदर रेड्डी की तीखी टिप्पणी के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि वे सभी सवालों के जवाब नहीं दे सकते। उन्होंने यह कहकर मामले पर विराम चिह्न लगा दिया कि कुछ भी कहने और करने में उनकी उम्र आ़डे आती है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को समन्वय समिति का चेयरमैन बनाये जाने की परंपरा से हटकर इस बार समिति अध्यक्ष केंद्रीय मंत्री व प्रदेश कांग्रेस मामलों के प्रभारी वीरप्पा मोइली को बनाने की कोई खास वजह है क्या? इस सवाल पर ने रोशय्या ने यह कहकर सभी को चुप करा दिया कि इसका जवाब मोइली से मांगना ही बेहतर होगा।

रोशय्या ने बताया कि उन्होंने केंद्रीय मंत्री ममता बनर्जी से भेंट कर उन्हें प्रदेश की कुछ समस्याआें से अवगत कराया तथा आगामी रेल बजट में आंध्र प्रदेश को उचित प्राथमिकता देने की अपील रेल मंत्री से की है। उन्होंने कहा कि मुनाफे के मामले में दमरे अच्छे स्थान पर है और बजट आवंटन भी उसी के अनुरूप होना चाहिये

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